बदहाल है कसया का दुग्ध उत्पादन कें द्र

Kushinagar Updated Thu, 19 Jul 2012 12:00 PM IST
कसया। जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और उत्पादकों को सहूलियत देने के लिए कसया में खुले दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ की दशा अत्यंत खराब है। समिति का कार्यालय प्राइवेट बाबुओं के भरोसे चलता है और दुग्ध अवशीतन गृह अव्यवस्था और गंदगी का पर्याय बन चुका है। समिति के प्रबंधक हमेशा ही सरकारी कार्यों के चलते बाहर रहते हैं। मंगलवार को अमर उजाला ने इस कार्यालय और अवशीतन गृह की दशा देखी तो तस्वीर इस तरह की उभरकर सामने आई।
प्राइवेट बाबुओं के भरोसे है कार्यालय
दुग्ध उत्पादन समिति कसया कार्यालय पर सरकारी कर्मचारी के तौर पर एक प्रबंधक, चार सुपरवाइजर और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति है। इसमें से दो सुपरवाइजर निलंबित चल रहे हैं। शेष बचे दो में से एक मेडिकल पर हैं और दूसरे दुग्ध अवशीतन गृह के इंचार्ज हैं। प्रबंधक लखनऊ मीटिंग में गए थे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी मंगलवार को नहीं आया था। पूरा कार्यालय दो प्राइवेट बाबुओं के हवाले था।
कागजों में ही बढ़ रहा दुग्ध उत्पादन
कुशीनगर जनपद में दुग्ध उत्पादन की स्थिति बेहद खराब है। मांग और आपूर्ति में जबरदस्त अंतर के चलते दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ के लिए लोगों को अतिरिक्त समय और पैसा खर्चा करना पड़ता है। परंतु जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का प्रयास केवल कागजों में है। इस समिति से जो भी योजनाएं संचालित होती हैं, उनका प्रचार-प्रसार न होने से ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
साढ़े तीन सौ किमी में 700 लीटर दूध
इस दुग्ध विकास समिति से संबद्ध कुल 46 समितियां हैं। इन समितियों से दुग्ध संग्रह के लिए तीन रूटों पर गाड़ी चलती है। एक रूट कसया से तमकुही है। इस पर 120 किमी यात्रा होती है। दूसरा रूट कसया से रामकोला वाया हाटा का है। इसकी भी दूरी 120 किमी है। तीसरा रूट कसया-पडरौना-दुदही वाया तुर्कपट्टी है। इसकी दूरी 117 किमी है। इन तीनों रूटों प्रतिदिन 700 लीटर दूध ही यहां संग्रह होता है।
दुग्ध अवशीतन गृह में गंदगी का अंबार
दूध जैसा पेय पदार्थ जहां एकत्र करके जांच करने और फिर गोरखपुर भेजने का काम होता है वहां गंदगी का अंबार लगा है। जिस परिसर में अवशीतन गृह स्थापित है, वह बाहर से किसी मोटर गैराज जैसा दिखता है। कबाड़ और शराब की बोतलें इधर-उधर फेंकी दिखती हैं। अंदर भी साफ-सफाई का कोई विशेष ख्याल नहीं रखा जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि इस केंद्र की देखरेेख कोई नहीं करता है।
क्या कहते हैं प्रबंधक
जिला दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ लिमिटेड कुशीनगर के प्रबंधक विकास बालियान ने फोन पर बताया कि कर्मचारियों की कमी है। दुग्ध अवशीतन गृह किराए के मकान में चलता है। यहां सिर्फ दूध इकट्ठा करके गोरखपुर भेजने का काम होता है। नियमिति सफाई कराई जाती है।

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