13 मिनट में आजाद पाकिस्तानी के उखाड़े पांव

Kushinagar Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
पडरौना (कुशीनगर)। भारतीय कुश्ती के पुरोधा दारा सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी स्मृतियां पडरौना नगर से जुड़ी हैं। 29 जनवरी-79 में हुए दंगल में जब पहली बार दारा सिंह यहां आए थे, तो उनकी टाइगर आजाद पाकिस्तानी से 13 मिनट की कुश्ती भी हुई थी। वह कुश्ती लोगों के जेहन से भुलाए नहीं भूलती है। पूरी कुश्ती में पाकिस्तानी पहलवान भागने के अंदाज में लड़ा और आखिर में पांव उखड़ जाने के कारण उसे लादकर अखाड़े से ले जाना पड़ा था। इसके बाद भी वर्ष 85, 90 व 93 में दारा सिंह दंगल के मुख्य अतिथि बनकर पडरौना आए थे।
पडरौना नगर में पं. दयाशंकर उपाध्याय रहते हैं। 82 वर्षीय दयाशंकर उपाध्याय के दारा सिंह से अच्छे रिश्ते थे। बृहस्पतिवार की दोपहर तक उनके पहलवान पुत्र पप्पू उपाध्याय ने उन्हें नहीं बताया था कि दारा सिंह नहीं रहे। दारा सिंह और पडरौना के बीच संबंध के बारे में दयाशंकर उपाध्याय ने इत्मीनान से बात की। बताते हैं कि वर्ष 1956 में लखीमपुर खीरी में उनकी तैनाती दुग्ध इंसपेक्टर के रूप में हुई थी। 12 वर्ष की उम्र से उन्हें कुश्ती का शौक था, तो लखीमपुर में भी उन्होंने दंगल शुरू कराया। वहीं दारा सिंह व उनके भाई रंधावा से मुलाकात हुई। फिर देश व पूर्वी एशिया के कई देशों में दारा सिंह से मुलाकात होती रही। कोलकाता में 60 के दशक में हुई एक कुश्ती का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि वहां खजनी के पहलवान स्व. ब्रह्मदेव ने दारा सिंह से हाथ मिलाते हुए निकाल दाव से ढाई मिनट में पटकने की बात कही और कर दिखाया। इसके बाद दारा सिंह ने भारतीय कुश्ती छोड़ दी और फ्री स्टाइल को आगे बढ़ाना शुरू किया। उपाध्याय बताते हैं कि 29 जनवरी-79 को पडरौना में आयोजित दंगल में दारा सिंह व टाइगर आजाद पाकिस्तानी के बीच कुश्ती हुई। बड़ी भीड़ थी, बनारस से टीन मंगवाकर बाउंड्री कराई गई थी जबकि 11 हाथियों को किनारों पर खड़ा कराकर दीवार बनाई गई थी। कुश्ती शुरू हुई और 13 मिनट तक चली। पाकिस्तानी पहलवान को लादकर बाहर ले जाना पड़ा। भीड़ को देख दारा सिंह ने खुद बाउंड्री हटाने को कहा। बाउंड्री हटवा दी गई, लेकिन कुश्ती के बाद एक ट्राली से अधिक चप्पल-जूते मौके पर ही छूट गए थे। दयाशंकर उपाध्याय के पुत्र पप्पू उपाध्याय बताते हैं कि वर्ष 85, 90 व 93 के दंगलों में दारा सिंह मुख्य अतिथि बनकर आए थे। पडरौना से उनका बेहद लगाव हो गया था। उनके घर पर कई बार उन्होंने रात्रि प्रवास किया। एलबम दिखाते हुए वे दारा सिंह की स्मृतियों को ताजा करते हैं। कहते हैं कि वर्ष 90 में पडरौना आगमन पर जनता की डिमांड पर दारा सिंह ने रामायण के प्रसिद्ध डायलाग जयश्री राम को बोलकर लोगों का मन मोह लिया था। बकौल पप्पू उन्होंने दारा सिंह के निधन की खबर अभी अपने बुजुर्ग पिता को नहीं दी है, क्योंकि रात में जब दारा सिंह को गंभीर अवस्था में अस्पताल से घर ले जाने की खबर टीवी पर उन्होंने देखी, तब वे बेचैन हो गए। बहरहाल यह तो एक बानगी है। पडरौना में हुई कुश्ती के चश्मदीद लोग भी दारा सिंह की कला को कभी नहीं भूल पाएंगे।

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