नियमों को ताक पर रख चल रहे मेडिकल स्टोर्स

Kushinagar Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
पडरौना। स्वास्थ्य विभाग जनता के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भले ही जवाबदेह हो, लेकिन उतना गंभीर नहीं दिखता। स्वास्थ्य विभाग के नियमाें की अवहेलना करके तमाम मेडिकल स्टोर्स, पैथालोजी, नर्सिंगहोम और अल्ट्रासाउंड संचालित करने वाले लोग गरीबों की जिंदगी न केवल मौत की ओर धकेल रहे हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। शासन के आदेश पर इन दिनों स्वास्थ्य महकमे में थोड़ी सरगर्मी जरूर आई है, लेकिन इससे जुड़े अधिकतर लोगाें का व्यवसाय अभी भी बदस्तूर चल रहा है।
मेडिकल स्टोर्स पर दवा बेचने, नर्सिंग होम और पैथालोजी चलाने के साथ-साथ एक्सरे एवं अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कुछ नियम और शर्तें बना रखी हैं। इन पर खरा उतरने वाला व्यक्ति ही मेडिकल स्टोर्स, पैथालोजी, नर्सिंग होम अथवा अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाने के काबिल होता है, परंतु कुशीनगर जिले में तमाम मेडिकल स्टोर्स, नर्सिंग होम, पैथालोजी, एक्सरे एवं अल्ट्रासाउंड सेंटर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सबसे दयनीय हालत तो ग्रामीण क्षेत्रों के चौक-चौराहाें और बाजारों में है, जहां गुमटी तथा मेज पर दवाएं रखकर बेची जाती हैं। इसी तरह पैथालोजी और क्लिनिक गांव-देहात के बाजारों में कुकुरमुत्ते की तरह हैं, जो मनमाने ढंग से मरीजाें से पैसे तो लेते ही हैं, जांच और इलाज भी मनमाना करते हैं। दवाआें की बिक्री पर नजर रखने के लिए जिले में एक ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती है और सीएमओ तथा अन्य सम्बंधित अधिकारियों पर निगहबानी की जिम्मेदारी होती है, परंतु यदि कोई विशेष आदेश न मिले तो ये अधिकारी जांच करने की जहमत नहीं उठाते हैं।
मेडिकल स्टोर्स संचालित करने के लिए नियम
नियम के मुताबिक हर मेडिकल स्टोर पर एक फार्मासिस्ट होना चाहिए।
फार्मासिस्ट के पास डी फार्मेसी का प्रमाण पत्र होना चाहिए।
हर मेडिकल स्टोर्स का बोर्ड तथा उस पर रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज होना चाहिए।
मेडिकल स्टोर्स पर फ्रीज की व्यवस्था होनी चाहिए।
मेडिकल स्टोर शीशायुक्त हो ताकि धूल के कण दवाआें पर न जमें।
शहरी क्षेत्र के मेडिकल स्टोराें पर कंप्यूटर अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
पंजीयन प्रमाण-पत्र तथा हर पांच साल पर नवीनीकरण का प्रमाण-पत्र हो।
मेडिकल स्टोर चलाने वाले की योग्यता कम से कम हाईस्कूल हो।
पैथालोजी के लिए निर्धारित नियम
पैथालोजी के लिए आवेदन करने वाला एमबीबीएस डाक्टर होना चाहिए।
पैथालोजी पर उसका डाक्टरी सर्टिफिकेट उपलब्ध रहे।
स्वास्थ्य विभाग में आवेदनकर्ता डाक्टर का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए।
भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा रजिस्ट्रेशन हो।
10 रुपये के स्टांप पर मकान मालिक का किरायानामा हो।
जांच की जा रही है: मुख्य चिकित्साधिकारी
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके पांडेय का कहना है कि बिना रजिस्ट्रेशन के मेडिकल स्टोर्स, पैथालोजी या अन्य इस तरह के प्रतिष्ठान चलाने वालाें के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। जो दोषी पाए गए, उन्हें नोटिस दिया गया है। डर के मारे तमाम व्यवसायी अपने प्रतिष्ठान बंद करके घर बैठ गए हैं, परंतु जब उनसे यह पूछा गया कि जांच खत्म होने के बाद यदि दुकानें फिर खुलीं तो? उनका जवाब था कि किसी दुकान का ताला तोड़कर तो जांच की नहीं जाएगी?

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