माफिया और विभागीय गठजोड़ हो रहा उजागर

Kushinagar Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
पडरौना। छापेमारी के दौरान जगह जगह मिल रहे सरकारी राशन एवं सरकारी बोरों ने माफिया एवं विभागीय गठजोड़ को उजागर कर दिया है। अगर जिलाधिकारी रिग्जियान सैंफिल का कड़ा रुख यूं ही बना रहा तो वह दिन दूर नहीं जब इस खेल में शामिल कई बड़ी मछलियां शिकंजे में हाेंगी।
जिलाधिकारी के आदेश पर जनपद में राशन माफियाओं पर शिकंजा कसने लगा है। पहले सेवरही, फिर खिरकिया तथा इसके बाद जनपद के अन्य जगह छापेमारी कर प्रशासन ने हड़कंप मचा दिया है। लेकिन अभी भी बड़ी मछलियां शिकंजे से बाहर हैं। सरकारी राशन की बरामदगी कर कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखवाने से जनपद में राशन के सिंडिकेटों पर लगाम नहीं लगाई जा सकती है। इसके लिए कुछ अहम सवालों के जवाब भी ढूंढने पड़ेंगे, जिसके बिना निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो सकती है। मुकदमा तो प्रशासन ने दर्ज करा दिया, लेकिन यह सवाल भी ढ़ूंढना पडे़गा कि जब खिरकिया गोदाम पर कोई गेहूं क्रय केंद्र नहीं है तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में सरकारी बोरे किन केंद्रों के हैं। आखिर किसके आदेश पर बोरों का आवंटन किया गया। जब वह स्थान क्रय केंद्र नहीं है तो वहां गेंहू की भराई क्यों कराई जा रही थी। सवाल यह भी है कि आखिर भारी मात्रा में पुराना चावल मिलर के पास कहां से आया।
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आरोपी को मिलर क्यों बनाया गया?
पडरौना। जनपद में हो रहे राशन घोटाले में पूरा सिंडीकेट काम कर रहा है। सूत्रों की अगर मानी जाए तो बुधवार को जिस गोदाम पर प्रशासन ने छापा मार कर सरकारी राशन बरामद किया था, उस गोदाम मालिक के एक अन्य गोदाम पर वर्ष 2007 में छापेमारी की गई थी। इस सिलसिले में वर्ष 2007 में 3/7, 419, 420 का मुकदमा दर्ज हुआ था और प्रोपराइटर को गिरफ्तार भी किया गया था। लेकिन विभाग ने एक बार फिर नियम कानून को ताक पर रखकर खिरकिया में मिलर लाइसेंस जारी कर दिया। सवाल उठता है कि आखिर एक आरोपी पर विभाग क्यों मेहरबान है। कहीं विभागीय मिलीभगत से ही यह धंधा तो नहीं हो रहा है।
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क्या कहते हैं जिलाधिकारी
पडरौना। जिलाधिकारी रिग्जियान सैंफिल का कहना है कि हर हाल में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जांच पड़ताल में तेजी ला दी गई है। उन्होंने कहा कि सेवरही में पीडीएस की व्यापक जांच कराई जा रही है। तीन दिन के भीतर रिपोर्ट आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द कुछ और कार्रवाइयां भी होगी। हर स्तर पर जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि आरोपी को मिलर क्यों बनाया गया, इसकी भी जांच होगी।
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कुछ सवाल
1: सरकारी बोरे किसके हैं ?
2: खिरकिया गोदाम में पुराना चावल किसका है और क्यों पड़ा है?
3: आरोपी को मिलर क्यों बनाया गया?
4: आरोपी एसएमआई को विभाग क्यों प्रश्रय दे रहा?
5: खाली बोरा कहां से आया, किसको एलाट था?
6: गोदाम पर बोरे क्यों भेजवाए गए जब वह क्रय केंद्र ही नहीं है?

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