वर्ष दर वर्ष कम हो रही बारिश

Kushinagar Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
खड्डा (कुशीनगर)। जनपद कुशीनगर यानी बरसात के दिनों में बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रहने वाला जिला। प्रकृति की गोंद में जिले के खड्डा क्षेत्र सहित तमाम हिस्से बसे हैं। नदी, पहाड़ व जंगलों से सटे इस क्षेत्र में लोग पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। प्रकृति की भृकुटि टेढ़ी होने का ही परिणाम है कि वर्ष दर वर्ष बरसात की रफ्तार कम हो रही है। पिछले दस वर्षों में सबसे कम बारिश वाला साल 2011 रहा, तो इस वर्ष जून माह में अब तक महज 2.8 मिमी ही बारिश रिकार्ड हुई है।
बरसात के लिए यह क्षेत्र हमेशा अनुकूल माना जाता रहा है। खड्डा क्षेत्र से सटे ही नारायणी नदी है, जो कुशीनगर जिले के अधिकांश उत्तरी हिस्से को प्रभावित करती है। यह नदी धवलागिरी पर्वत के मुक्तिनाथ धाम से निकली है, जबकि तिब्बत सहित नेपाल के कई हिस्सों को छूते हुए नेपाल के त्रिवेणी में भैंसालोटन के पास आकर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है। इसके किनारे पर वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के लगभग नौ सौ वर्ग किमी का जंगल है, जो खड्डा क्षेत्र से 10-15 किमी के अंतर पर है। 20 किमी दूरी पर नेपाल के पहाड़ों की श्रृंखला मौजूद है। साथ ही सोहगीबरवा वन्य अभ्यारण भी पास में है। फिर भी कम बरसात बेहद चिंता का विषय बनता जा रहा है। खड्डा के पास बारिश मापक यंत्र 15 किमी परिधि की बारिश रिकार्ड करता है। इसके आंकड़े लगातार घट रही बारिश की गवाही दे रहे हैं।
जून माह में कम बारिश, माथे पर चिंता की लकीरें
जून माह की 15 तारीख से बरसात का सीजन शुरू होता है। लेकिन जून की भी तस्वीर अच्छी नहीं है। 2003 के जून माह में 348 मिमी, 2004 में 223.4 मिमी, 2005 में 106.4 मिमी, 2006 में 514.4 मिमी, 2007 में 189.6 मिमी, 2008 में 367 मिमी, 2009 में 16 मिमी, 2010 में 65.8 मिमी, 2011 में 117.6 मिमी बारिश हुई तो इस वर्ष आधा जून बीतने के बाद महज दो जून को 2.8 मिमी बारिश रिकार्ड हुई है।

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