स्वजल धारा: कागज पर पानी पिला रहे अधिकारी

अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद Updated Tue, 21 Feb 2017 01:21 AM IST
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स्वजल धारा योजना में 54 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। कुछ परियोजनाएं आधे-अधूरे निर्माण के बाद ठप हो गई तो चल रही कुछ परियोजनाएं देखरेख के अभाव में नष्ट हो चुकी हैं। अफसर हैं कि योजना के बंद होने के बाद फाइलों को बंद कर दिया है। ऐसे में ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने की शासन की मंशा धरी की धरी रह गई। अब ग्रामीण परियोजना स्थलों पर कब्जा करने में जुट गए हैं।
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    स्वजलधारा योजना की शुरुआत जिले में वर्ष 2003-04 में हुई। इससे चयनित गांव में पेयजल की टंकी व पाइप लाइन के जरिए मोहल्ले में आपूर्ति कराई जानी थी। शुरुआत में शासन द्वारा इसके लिए 11 लाख चार हजार 745 रुपये की मंजूरी दी थी। इसमें दस फीसदी का अंशदान पेयजल स्वच्छता समिति का था। पेयजल योजना की शुरुआत सिराथू के सौंरई बुजुर्ग मूरतगंज के पट्टी परवेजाबाद, रामपुर धमावां ग्राम सभा से हुई। वर्ष 2009-10 के अंत तक योजना से जिले की 28 ग्राम सभाओं को लाभान्वित किया गया था। शासन से लगभग 54 करोड़ रुपये स्वजल धारा योजना के लिए भेजे गए।


इस रकम से पेयजल स्वच्छता समिति के अध्यक्ष व स्थानीय अफसरों ने जमकर खेल किया। मानक को ताक पर रखकर कराए गए आधे-अधूरे निर्माण के चलते कई परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकी। दूसरी ओर कुछ परियोजनाओं से पेयजल की आपूर्ति शुरू हुई पर देखरेख के अभाव में वह भी ठप हो गई। ऐसे में शासन का करोड़ों रुपये भले ही स्वजल धारा के अंतर्गत खर्च हो गया पर ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझ सकी। ठप हो चुकी परियोजना स्थलों पर अब ग्रामीण अपना-अपना कब्जा जमाने में जुट गए हैं।

निर्माण स्थल की क्या स्थिति है और कौन कब्जा कर रहा है इसकी कोई शिकायत नहीं मिली। शिकायत मिलने पर मामले में कार्रवाई की जाएगी।
डीके दोहरे, डीडीओ, कौशाम्बी

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