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आयुष्मान भारत: गरीबों का भरोसा नहीं जीत पा रहे सरकारी अस्पताल

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Sun, 22 Sep 2019 12:48 AM IST
patient first choice to private hopital
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मंझनपुर। तमाम कवायद के बावजूद सरकारी जिले के अस्पताल लोगों का भरोसा नहीं जीत पा रहे हैं। इसकी बानगी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत के तहत इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या मेें साफ देखी जा रही है। विशेष डॉक्टरों की फौज के बावजूद सरकारी चिकित्सालयों के बजाय निजी अस्पतालों में ज्यादा पहुंच रहे हैं। जानकार इसके पीछे सेटिंग का खेल बता रहे हैं।
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गरीबी रेखा से नीचे की जिंदगी गुजरने वाले चिंहित जिले के 116151 परिवारों को पांच लाख तक का मुफ्त इलाज मुहैया कराने के इरादे से मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना संचालित किया है। जिले में यह योजना 23 सितंबर 2018 को लांच हुई। योजना के तहत संयुक्त जिला अस्पताल और सीएचसी कनैली, सरायअकिल तथा सिराथू समेत चार सरकारी एवं आठ निजी हॉस्पिटल समेत 12 अस्पतालों को संबद्ध किया गया है। इन अस्पतालों में गोल्डन कार्ड धारकों को मुफ्त चिकित्सा सेवा मुहैया कराने का प्राविधान है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि साल भर के भीतर योजना के तहत जिले के 1462 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इनके इलाज में सरकारी खजाने का 1,46,42,935 रुपये खर्च हुआ है।
इन आंकड़ों के बीच एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि सरकारी के मुकाबले निजी अस्पतालों में दो गुना ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ। जबकि संयुक्त जिला चिकित्सालय में तमाम आधुनिक मशीन और विशेष डॉक्टर हैं। इसके बावजूद यहां सिर्फ 180 मरीज का इलाज हुआ। इसके विपरीत लवकुश और न्यू तेजमती अस्पतालों में यहां से ज्यादा क्रमश: 224 व 211 मरीज भर्ती हुए। यही हाल तीनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का है। जानकार इसके पीछे सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की उदासीनता को जिम्मेदार मान रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सरकारी अस्पताल में आधे से अधिक डॉक्टर ड्यूटी ही नहीं आते हैं। मुकम्मल सुविधाएं नहीं मिलने के कारण सरकारी के बजाय निजी अस्पतालों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
गंभीर रोगियों के इलाज की व्यवस्था नहीं, रेफर किए गए 464 मरीज
मंझनपुर। जनपद के सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत के मरीजों को भर्ती कर इलाज करने का भले ही स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है। पर, हीककत में विभाग के पास विशेषज्ञ डॉक्टर, दवा और आधुनिक उपकरणों का टोटा है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। साल भर के भीतर गंभीर पीड़ित जिले के 464 मरीजों को योजना के तहत जनपद से बाहर इलाज कराना पड़ा।
अस्पतालों को साफ निर्देश है कि मरीजों के आने पर उनसे गोल्डन कार्ड की जानकारी लें। पात्रता सूची में नाम होने पर कार्ड बनाकर भर्ती करें। गंभीर रोगियों को ही रेफर करें। इसके बाद भी कोई शिकायत मिली तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ हिंदप्रकाश-डिप्टी सीएमओ/नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना
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