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बाढ़ से हालात हुए बेकाबू, टापू बने गांव और सड़कें बनीं ताल-तलैया प

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Wed, 18 Sep 2019 01:33 AM IST
Kaushambi Flood
Kaushambi Flood - फोटो : KAUSHAMBI
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यमुना और किलनहाई नदीं के लगातार बढ़ रहे जल स्तर से तराई के गांवों में चलने लगी नाव
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महज दो मीटर पानी और बढ़ा तो सांसत में पड़ेगी ग्रामीणों की जान
मंझनपुर/चायल/पश्चिमशरीरा। राजस्थान के कोटा और धौलपुर बैराज से छोड़े गए 25 लाख क्यूसेक पानी ने दोआबा से गुजरी नदियों को उफान पर ला दिया। सबसे ज्यादा असर यमुना और उससे जुड़ी किलनहाई नदीं पर पड़ा। दोनों नदियों का पानी अब तराई के गांवों को टापू बना चुका है। हालात यह है कि आम रास्ते पर पानी भर जाने से गांव टापू में तब्दील हो गए और सड़के ताल-तलैया बन गई। जिन रास्तों पर कभी वाहन फर्राटा भरते थे, आज वहां नाव के सहारे लोगों को आवागमन करना पड़ रहा है। पुलिस और प्रशासन के अफसर मेडिकल टीम के साथ हालात पर बराबर नजर बनाए हुए हैं। अगर दो मीटर पानी और बढ़ा तो ग्रामीणों की जान सांसत में पड़ सकती है।
यमुना नदीं में लगातार बढ़ रहे जल स्तर से सदर और चायल तहसील इलाके के तराई में बसे गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हो चुके हैं। सदर तहसील के पभोषा गांव में यमुना का पानी गांव तक पहुंच चुका है। सड़क पर पानी भरा है। बस थोड़ा और पानी बढ़ा तो गांव के लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। गांव के लोग अपनी जान हथेली पर रखकर बाढ़ के पानी के बढ़ते स्तर की निगरानी कर रहे हैं। इसी तरह चायल तहसील का मल्हीपुर गांव टापू बन चुका है। किलनहाई और यमुना नदीं के बीच बसे इस गांव में दोनों नदियों का पानी चारों तरफ से घेरे हुए है। गांव टापू बन चुका है और यहां के लोगों को बाहर आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। चक पिनहा, केवट का पुरवा, कटैया, बेनपुर, डिहवा, सेवढ़ा, पठन का पुरवा, नंदा का पूरा, उमरवल आदि गांवों के भी यहीं हालात हैं।
तराई की फसलें जलमग्न, किसान परेशान
मंझनपुर। यमुना की बाढ़ ने तराई के गांव के वाशिंदों को तो अभी तक किसी तरह का खतरा नहीं पहुंचाया लेकिन किसानों की फसलें जरूर तबाह हो गई। बाढ़ के पानी से फसलें जलमग्न हो गई। धान की फसल को तो फिलहाल ज्यादा नुकसान नहीं हुआ लेकिन सब्जी, तिल, बाजरा आदि की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। अगर जल स्तर बढने का सिलसिला यहीं रहा तो किसानों की गाढ़ी कमाई पानी में मिल जाएगी।
मवेशियों के लिए खड़ा हुआ चारे का संकट
चायल। बाढ़ के कारण तराई में मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया। लोग नाव के सहारे दूर-दराज के स्थानों पर जाकर चारे का इंतजाम कर रहे हैं। इसे लेकर ग्रामीण खासे परेशान है।
अफसर पिला रहे आश्वासन की घुट्टी
मंझनपुर। बाढ़ से निपटने के लिए अफसरों ने तमाम दावे किए थे। बाढ़ चौकी, मोमबत्ती,मवेशियों के लिए चारा आदि के इंतजाम का दावा किया गया। लेकिन हकीकत में ग्रामीणों के लिए सारे दावे कोरा आश्वासन ही साबित हुए। अब अफसर गांव में कैंप कर रहे हैं। इलाके के पंचायत भवन व स्कूलों की साफ-सफाई कराई जाने लगी है। एसडीएम सुल्तान अशरफ सिद्दीकी का कहना है कि एक दो दिन के अंदर ग्रामीणों के लिए खाने का पैकेट बंटवाने की व्यवस्था भी करा दी जाएगी।
बटाई पर खेत लेने वाले किसानों का हुआ बंटाधार
चायल। तहसील इलाके में ज्यादातर बढ़े काश्तकार हैं। गरीब परिवार के लोग 12 हजार रुपये प्रति बीघे बड़े किसानों का खेत लेकर खेती करते हैं। इस बार क्षेत्र में करीब दो हजार बीघे फसल जलमग्न हो गई है। इससे दूसरे का खेत लेकर खेती करने वाले किसान बेहद परेशान हैं।
मल्हीपुर गांव के महेश, रामभवन, राम सरन, राम बहादुर, अशोक, गंगादीन आदि का कहना है कि उनके जैसे 250 के करीब किसान दूसरों का खेत 12 हजार रुपया प्रति बीघा लेकर किसानी करते हैं। फसल खराब होने पर उसका मुआवजा खेत मालिक के खाते में आता है। उन्हें फूटी कौड़ी नहीं मिलती। इस बार भी उनकी खेती पूरी तरह से चौपट हो गई। खेत मालिक ने पहले ही 12 हजार रुपया ले लिया है। हलका लेखपाल अतीक अहमद ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि करीब 90 फीसद फसल खराब हो चुकी है। हालात एक-दो दिन ऐसे ही बने रहें तो सारी फसल खराब हो जाएगी। किसानों का कहना है कि उनके लिए भी कुछ मुआवजे की व्यवस्था किया जाए। इस बाबत किसानों ने एसडीएम चायल से लिखित प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की है।
किलनहाई का रौद्ररूप देख सहमें किसान
चायल। इलाके के किसानों का कहना है कि किलनहाई में इतना पानी कभी नहीं आता था। बुजुर्ग गंगादीन का कहना है कि वर्ष 1978 में एक बार नदीं का रौद्ररूप दिखा था। इलाके के सारे गांव पानी से लबालब हो गए थे। कई मवेशियों की मौैत भी हुई थी। इसके बाद 2013 में किलनहाई में बाढ़ आई। इसके बाद से यह नदीं कभी खतरे के निशान तक नहीं पहुंची। इसे लेकर नदी के किनारे खेती करने वाले बेफिक्र हो गए थे। इस साल इस नदीं ने भी अपना रौद्र रूप दिखाया। जिसके कारण सैकड़ों बीघे फसल बर्बाद हो चुकी है।
चायल तहसील में यह है बाढ़ राहत केेंद्र
इस बाढ राहत चौकी में मखऊपुर, लोही, सुकवारी, गौहानी कला, मलाका, घूरी, बेरआमद करारी, बरियावां, बरौलहा, रामपुर बसुहार आदि गांवों के लोगों को रखने की व्यवस्था किया गया है। यहां की जिम्मेदारी लेखपाल शिवसागर पांडेय (मोबाइल नंबर- 7309954451), लेखपाल सुरेखा पांडेय (मोबाइल नंबर 8115553893) और ग्राम विकास अधिकारी को दी गई है।
सामुदायिक भवन पुरखास
इस राहत शिविर में कटैया, मल्हीपुर, मोहम्मदाबाद, युसुफपुर, अकबराबाद, बंथरी, चक पिनहा, सिहोरवा, बेनपुर, हाजीपुर और पुरखास के लोगों को रखने की व्यवस्था किया गया है। यहां की जिम्मेदारी राजस्व निरीक्षक कपिल देव मिश्र (मोबाइल नंबर- 9919953308), अतीक अहमद (मोबाइल नंबर- 9450591499), प्रशांत कुमार (मोबाइल नंबर- 9473844064), काशी प्रसाद (मोबाइल नंबर- 9118187387) आदि को लगाया गया है।
प्राथमिक स्कूल जवई
जवई राहत शिविर मं उमरवल, पिरहटा, बिगहरा, जवई और तिल्हापुर के लोगों को रखने की व्यवस्था किया गया है। यहां लेखपाल कुलदीप कुमार (मोबाइल नंबर-9919323242), ओम नरायण दुबे (मोबाइल नंबर- 9450726060), हर्षनाथ दुबे (मोबाइल नंबर- 9450728236) को लगाया गया है।
प्राथमिक स्कूल भोपतपुर
यहां बसंतपुर उपरहार और कछार, भोपतपुर उपरहार व कछार, जलालपुर भर्ती, पंसारा आदि गांव के लोगों को रखा जाएगा। राहत केंद्र में सहायक विकास अधिकारी नेवादा व लेखपाल नीरज कुमार (मोबाइल नंबर- 8896067265) को नियुक्त किया गया है।
प्राथमिक स्कूल सेवढा
यहां सेवढ़ा, शेरगढ़ और औधन के ग्रामीणों के रखने की व्यवस्था की गई है। यहां लेखपाल सुनीता देवी (मोबाइल नंबर-7880880771), पंकज कुमार, विश्वनाथ सिंह को नियुक्त किया गया है।
नदीं के साथ नाले भी उफान पर, प्रशासन ने घर खाली कराने का दिया निर्देश
बारा। सदर तहसील के गढ़वा, पाली उपरहार गांव में यमुना के बाद अब नाले भी उफान पर आ चुके हैं। दोनों गांवों में नाले का पानी पहुंच चुका है। जल स्तर बढ़ता ही जा रहा है। इसे लेकर मंगलवार को तहसीलदार रामजी और कौशाम्बी कोतवाली के गुरौली चौकी प्रभारी मनोज यादव प्रभावित गांव पहुंचे। गढ़वा के नत्थू प्रसाद, दुर्गा और कल्लू को घर से जरूरी समान निकाल कर जैन मंदिर में बने राहत शिविर में पहुंचने का निर्देश दिया। इन लोगों का घर एकदम तराई में है। बाढ़ से यहां सिर्फ फसले डूबी हैं और पानी बस्ती तक पहुंच चुका है। पानी बढने की रफ्तार यही रही तो एक-दो दिन में लोगों के घरों तक पानी पहुंच जाएगा।
नाव से लोगों के घर पहुंचे अफसर, मकान खाली करने की अपील
चायल। एसडीएम चायल सुल्तान अशरफ सिद्दीकी और सीओ राजकुमार त्रिपाठी मंगलवार को टापू में तब्दील हो चुके मल्हीपुर गांव पहुंचे। यहां चारों तरफ पानी भरा होने के कारण अफसरों को गांव तक नाव से जाना पड़ा। एसडीएम ने कहा कि जिन लोगों के घर नीचे हैं, वह लोग अपना जरूरी समान लेकर राहत शिविर में पहुंचे। इसके अलावा लोगों को कंट्रोलरूम व खुद का मोबाइल नंबर भी लिखाया। कहा कि किसी तरह की दिक्कत होने पर तत्काल फोन पर सूचित किया जाए। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौजूद रहे। जिन लोगों की तबीयत खराब थी, उन्हें दवा दिया गया। दोपहर बाद जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और एसपी प्रदीप गुप्ता ने भी बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों को हर संभव मदद का आश्वान दिया।
नदी के कटान से जिन लोगों के घर गिर रहे हैं उनकी सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल प्रभावित लोगों को घर खाली कर सुरक्षित स्थान पर भेजे जाने की व्यवस्था की जा रही है। कटान के कारण किसी का घर गिरा है तो उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाएगा।
मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी कौशाम्बी
कटान बरकार रही तो पलायन को मजबूर होंगे ग्रामीण
चायल। मंगलवार को यमुना में जल स्तर बढ़ने की रफ्तार जारी रही। इसके कारण नदीं के किनारे घर बनाकर रहने वाले परिवारों के साथ बेघर होने का खतर मंडरा रहा है। कटान के कारण मिट्टी के बड़े-बड़े टीले गिर रहे हैं। इसे लेकर ग्रामीण भयभीत हैं।
जिस गति से यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। यही हाल रहा तो अगले दो दिनों में खाने पीने का गहरा संकट पैदा हो जाएगा। हालात धीरे धीरे बेकाबू हो रहे हैं। सबसे ज्यादा बंटाई पर किसानी करने वाले किसानों की स्थिति खराब है। उन्हें न तो अन्न मिलेगा, न ही मुआवजा। - शांति देवी, ग्राम प्रधान, श्यामपुर उर्फ मल्हीपुर
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