दोआबा में डंप है अवैध बालू, गायब करने की तैयारी

अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Sun, 31 Jul 2016 12:31 AM IST
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दोआबा में सिंडीकेट की शह पर जगह-जगह डंप अवैध खनन की बालू को गायब करने की तैयारी की जा रही है। मामले में हाईकोर्ट द्वारा जांच सीबीआई को सौंपे जाने की भनक लगते ही सिंडीकेट के गुर्गों ने निजी वाहनों में तिरपाल लगाकर डंप बालू को जनपद से बाहर ले जाने का काम शुरू कर दिया है। महकमे के जिम्मेदार हैं कि उन्हें गायब हो रही डंप बालू की ओर झांकने तक की फुरसत नहीं है।
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दोआबा के यमुना बालू घाटों पर अक्टूबर 2015 में सिंडीकेट ने अपना पैर जमाया। सिंडीकेट के गुर्गों ने बाद सबसे पहले जिले के अफसरों पर अपना दबाव बनाया। इसके बाद घाटों पर अवैध खनन का कारोबार शुरू हुआ। दस माह तक जिले के एक-एक बालू घाट पर सिंडीकेट ने अवैध खनन कराते हुए करोड़ाें रुपये की बालू का कारोबार किया। बारिश में कारोबार ठप न रहे इसे देखते हुए सिंडीकेट के इशारे पर दोआबा के यमुना की तराई में बसे एक-एक गांव में बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण कराया गया।


बालू बेचने के लिए इंतजार की घड़ियां भी खत्म हो चुकी थी। मुख्यालय में पैर जमाकर रह रहे सिंडीकेट के गुर्गे डंप बालू की बिक्री शुरू कर पाते कि 28 जुलाई को उच्च न्यायालय ने अवैध खनन की जांच सीबीआई के हवाले कर दी। न्यायालय का आदेश होते ही सिंडीकेट के गुर्गों को सांप सूंघ गया। अब वह किसी तरह डंप बालू को बेंचने में जुट गए हैं। बानगी के तौर पर शुक्रवार की रात जमुनापुर में डंप सिंडीकेट के बालू को लिया जा सकता है।

यहां से रात में सिंडीकेट ने अपने निजी वाहनों में तिरपाल लगाकर आठ ट्रक बालू जनपद से बाहर भेज दिया। खास बात तो यह है कि महेवाघाट थानाक्षेत्र से ट्रक में लादकर ओसा चौराहा होते हुए बालू गैर जनपद को रात भर भेजी जाती रही और किसी ने ट्रकों को रोकना मुनासिब नहीं समझा। इससे स्थानीय पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध जान पड़ती है।  

जिले में मौजूद हैं सिंडीकेट के आठ निजी वाहन
 दोआबा में अवैध खनन कर डंप की गई बालू को बेंचने के लिए सिंडीकेट के गुर्गों ने आठ निजी ट्रकों को मंगवा रखा है। इन ट्रकों के सहारे सिंडीकेट डंप बालू को गैर जनपद में लेकर जाकर बेंच रहे हैं। खास बात यह है कि इन ट्रकों के साथ जनपद की सीमाओं को क्रास कराने के लिए एक सफारी और स्कार्पियो भी ट्रकों के आगे-पीछे लगी रहती है। ट्रकों के आगे-पीछे सिंडीकेट के गुर्गोँ के लगे होने के कारण बालू लदे वाहनों को पकड़ना तो दूर स्थानीय पुलिस रोकने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाती।

मैं जरूरी काम से लखनऊ आया था। यहां से निकल रहा हूं। डंप बालू ढोए जाने की जानकारी नहीं है। लौटकर मामले में जानकारी की जाएगी।
अरविंद कुमार, खनन अधिकारी, कौशाम्बी

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