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दोआबा से भी गायब हैं ऐतिहासिक धरोहरें

कौशाम्बी ब्यूरो Updated Sat, 20 Jan 2018 12:55 AM IST
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 गंगा-यमुना के मध्य बसे कौशाम्बी जिले सेे भी कई ऐतिहासिक धरोहरें गायब हैं। बौद्धकालीन इन धरोहरों का यहां अब कहीं कोई नामोनिशान तक नहीं है। लापता विरासतों का मामला संसद में उठने के बाद एएसआई ने देश की 24 धरोहरों को खोजना शुरू कर दिया है। अफसोस की जिले की गुम विरासतों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है।    
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कौशाम्बी जिले का इतिहास काफी स्वर्णिम रहा है। जानकारों के मुताबिक छठी शताब्दी ईशा पूर्व में बौद्ध धर्म गुरु महात्मा बुद्ध यहां आए थे। उन्होंने दोआबा में चौमासा गुजारा था। उस वक्त उनके पूजा-पाठ करने के लिए तत्कालीन राजा महाराज उदयन के मंत्री रहे घोषिताराम, बद्रिकाराम, कुक्कुटाराम और पवरिकाराम ने अपने-आने नामों से अलग-अलग चार विहार बनवाए थे। घोषिताराम विहार अभी भी मौजूद है।

पर, बाकी तीन विहारों का अता-पता नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय की शोध छात्रा नेहा सिंह का मानना है कि लापता हुए विहार भी घोषिताराम विहार के आसपास ही कहीं बनवाए गए रहे होंगे। पर, उपेक्षा और जानकारी के अभाव में यह गायब हो गए। भारतीय पुरातत्व विभाग कोशिश करे तो इनको खोजा जा सकता है।

ये विरासतें भी हैं लापता
जिले से विहारों के अलावा बौद्धकाल की कई और भी ऐतिहासिक विरासतें गायब हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की शोध छात्रा नेहा सिंह बताती हैं कि महात्मा बुद्ध जब कौशाम्बी आए थे तो अब जहां घोषिताराम विहार है, वहीं आसपास परलेयक वन था। इस वन में परलेयक नाम का हाथी रहा करता था। बुद्ध चौमासा गुजारने केे बाद जब जाने लगे थे तो उनके वियोग में परलेयक ने अपने प्राण त्याग दिए थे। उस वक्त परलेयक हाथी का स्मारक बनवाया गया था। जो अब गायब है। साथ में परलेयक वन भी नहीं मिल रहा है। इसके अलावा देव श्रव्य कुंड भी गायब है। इतिहास के पन्ने बताते हैं कि इस कुंड में महात्मा बुद्ध स्नान करते थे।

सांसद जी बेखबर 
देश की लापता ऐतिहासिक धरोहरों का मामला एक नहीं कई दफा संसद में भी उठा। इसी का नतीजा रहा कि भारतीय पुरातत्व विभाग ने गुम हो चुकी 24 विरासतों को खोजना शुरू कर दिया है। जिले से लापता हुई ऐतिहासिक धरोहरों का महत्व भी कम नहीं है। पर, इसकी सुधि किसी ने कभी नहीं ली। स्थानीय सांसद ने भी सदन में कभी यह मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने सदन में बात रखी होती तो शायद कोई अच्छा परिणाम सामने होता।

बोले सांसद
द्वाबा की ऐतिहासिक विरासतों को संवारने के लिए सरकार संजीदा है। इसी के तहत जल्द ही गुम धरोहरों का भी मुद्दा सदन में उठाया जाएगा।
विनोद सोनकर
सांसद  कौशाम्बी

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