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झोलाछाप: दवा की चलती फिरती दुकान

Kaushambi Updated Tue, 04 Nov 2014 05:30 AM IST
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मंझनपुर। कौशाम्बी में बीमारों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले तमाम ऐसे ही झोलाछाप हैं, जिनका पूरा क्लीनिक बस ऐसे थैले में सिमटा हुआ है। बगैर डॉक्टरी की डिग्री वाले ये तथाकथित डॉक्टर गांव-गांव फेरी लगाकर बीमारों का इलाज करके कमाई कर रहे हैं। इनकी सबसे ज्यादा दुकानदारी गर्मी के मौसम में तब जोरों पर होती है, जब गांव-गांव लोग उल्टी-दस्त जैसी संक्रामक बीमारियों की चपेट में आते हैं।
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कौशाम्बी में देखें तो जहां करीब 50 सरकारी अस्पताल हैैं। वहीं 121 निजी हॉस्पिटल भी पंजीकृत हैं। इनके अलावा 200 से भी ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर जिले में सक्रिय हैं। इनमें सौ से भी ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर ऐसे हैं। जिन्होंने गांव में एक छोटे से कमरे में अपना ठिकाना बना रखा है। एक कुर्सी, मेज रखकर वे कहने के लिए तो अपनी डॉक्टरी की दुकान खोले हैं। पर, उनकी दुकान (डॉक्टरी) का सारा सामान सिर्फ एक थैले में सिमटा रहता है। यही झोला लेकर वे सुबह से देर शाम तक वे गांव-गांव मरीजों की तलाश में फेरी लगाते हैं। सोमवार को करारी क्षेत्र के घमसिरा गांव में ऐसे ही एक झोलाछाप डॉक्टर फेरी लगाते दिखे। गांववालों ने बताया कि आसपास के करीब दर्जनभर गांव में वे घूमकर लोगों का इलाज करते हैं। साथ ही लोगों ने बताया कि गांव के एक कमरे में उन्होंने अपना दवाखाना भी खोल रखा है। समय मिलने पर वहां भी बैठकर लोगों को दवा देते हैं। गांव में घूमकर इलाज करनेवाले ऐसे ही डॉक्टर मूरतगंज, बसेढ़ी, हर्रायपुर, चरवा, बड़ागांव, इमामगंज, देवीगंज, कड़ा, शमसाबाद, कुम्हियावां, बैरमपुर, बिजिया, अषाढ़ा, नारा, टेन शाहआलमाबाद, उदहिन, पइंसा आदि गांवों और अन्य छोटी-छोटी बाजारों में भी सक्रिय हैं।
कौशाम्बी में झोलाछाप डॉक्टर अपनी अज्ञानता के कारण अक्सर मरीजों की जान जोखिम में डालते हैं। सबसे ज्यादा मनमानी तो गर्मी के दिनों में डायरिया, उल्टी-दस्त जैसी संक्रामक बीमारियां फैलने पर देखने को मिलती हैं। गांववाले बताते हैं कि तब ये झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को पेड़ अथवा छप्पर के नीचे ही खाट या फिर बेंच पर लिटाकर ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ा देते हैं। वहीं कई बार तो मरीजों के घर पर ही फोड़ा-फुंसी आदि के छोटे-मोटे आपरेशन भी कर दिए जाते हैं। जबकि ऐसा करना मरीजों की जान से खेलना ही है।
गांव-गांव फेरी लगाकर डॉक्टरी करने वाले झोलाछाप रोजाना अच्छी खासी कमाई भी करते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बुखार, सर्दी-जुकाम हो या फिर कान अथवा घुटनों के जोड़ का दर्द। इन झोलाछाप डॉक्टरों के पास सभी तरह की बीमारियों का इलाज उपलब्ध होता है। वे किसी भी रोग की दवा देने से कभी इंकार नहीं करते हैं। इतना ही नहीं सभी मर्ज की एक जैसी हरी, पीली टैबलेट अथवा लाल कैप्सूल देने के साथ बाजारों में 4 से 5 रुपये में मिलने वाले मल्टी विटामिंस के इंजेक्शन जरूर लगाते हैं। इंजेक्शन लगाते ही उनका सौ का पत्ता तैयार हो जाता है।
जिले में झोलाछाप डॉक्टरों को चिह्नित करने के लिए आशा स्वास्थ्य कार्यकत्रियों की मदद ली जाएगी। झोले में दवा की दुकान लेकर फेरी करके इलाज करने वालों को भी चिह्नित करके एफआईआर कराई जाएगी। इलाज के नाम पर जिंदगी से खेलने वालों को जेल भेजवाया जाएगा।
डॉ. घनश्याम द्विवेदी, डिप्टी सीएमओ कौशाम्बी
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