कुपोषण से फिर बच्चे की मौत, कई जूझ रहे

Kaushambi Updated Wed, 29 Aug 2012 12:00 PM IST
मंझनपुर। जिले में कुपोषित बच्चों की सेहत सुधारने को कोई ठोस पहल नहीं कर रहा है। इससे इनकी जान चली जा रही है। मंगलवार को कौशाम्बी ब्लाक के बकेलीपर गांव के कुपोषण के शिकार अरुण कुमार (14 माह) की मौत हो गई। वहीं जिले के करीब 219 कुपोषित बच्चे जीवन के लिए जंग लड़ रहे हैं। एक स्वयंसेवी संस्था के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। दोआबा में पांच दिन के भीतर दो बच्चों की सांस थम चुकी हैं। संस्था के सदस्यों का दावा है कि बच्चों की मौत कुपोषण से हुई है। वहीं चिकित्सक मौत का कारण अन्य बीमारियां बता कर अपना पल्ला झाड़ रहे है।
कौशाम्बी विकास क्षेत्र की ग्राम पंचायत विदांव का मजरा बकेलीपर निवासी के बिहारी लाल का बेटा अरुण कुमार (14 माह) की मंगलवार को कुपोषण से सांस थम गई। अमर उजाला ने सप्ताहभर पहले ग्राम पंचायत पारा हसनपुर का मजरा लेहदरा निवासी अर्चना देवी की कुपोषण से मौत के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। दोआबा विकास एवं उत्थान समिति के सर्वे के मुताबिक मंझनपुर, सरसवां और कौशाम्बी ब्लाक क्षेत्र की 35 ग्राम पंचायतों में करीब 219 बच्चे गंभीररूप से कुपोषित पाए गए हैं। वहीं ताजा सर्वे के मुताबिक मंझनपुर की 26 ग्राम पंचायतों में 157 बच्चे अति कुपोषित चिन्ह्ति किए गए हैं। फिर भी बाल विकास एवं पुष्टाहार के साथ स्वास्थ्य विभाग मामले को नजरअंदाज कर रहा है। मंगलवार को दोआबा विकास एवं उत्थान समिति के कार्यकर्ताओं ने रेहान अहमद के नेतृत्व में डीएम और सीडीओ को ज्ञापन सौंप कर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। जिले के मासूम लगातार कुपोषण और संक्रामक बीमारी का शिकार हो रहे है। वहीं जिला जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा तमाशबीन बना हुआ है। सीडीओ का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट में बच्चों की मौत का कारण अन्य बीमारियां बताई जा रही हैं। फिर भी प्रभारी डीपीओ पुष्पा देवी को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही गर्भवतियों को पुष्टाहार देने का निर्देश विभाग को दिया गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश कुशवाहा का कहना है कि कुपोषण के शिकार बच्चों की मौत की जानकारी मिली है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई किए जाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।

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