चढ़े पारे ने निचोड़ ली शरीर की ताकत

Kaushambi Updated Thu, 05 Jul 2012 12:00 PM IST
इलाहाबाद। तेलियरगंज निवासी कपड़ा व्यापारी जयकिशन गुप्ता (44) रोज सुबह छह बजे तक नहा लेते हैं। दो महीने से गर्मी ज्यादा पड़ने लगी तो सुबह पांच बजे, नौ बजे, दोपहर में एक बजे, रात नौ बजे यानी चार दफे स्नान करने लगे। गर्मी से तो राहत मिलती लेकिन भारी गर्मी के साथ टिकी उमस के कारण पिछले चार दिनों से कंघे, सिर में दर्द था। बुधवार सुबह जैसे ही ठंडा पानी सिर पर पड़ा, गर्दन अकड़ गई। असहनीय तकलीफ के कारण दर्द की दवा ली, आराम नहीं मिला तो जांच कराई। पता चला कि कंधे की मांसपेशियों में सूजन है। कपड़ा गरम करके सिंकाई करने से भी लाभ नहीं मिला तो उन्होंने हड्डी रोग विशेषज्ञ की शरण ली। कीडगंज निवासी प्राथमिक शिक्षक श्वेता (37) छह दिन से माइग्रेन की दवा ले रही हैं। लगातार डॉक्टर की देखरेख में इलाज के बाद भी उनका सिर दर्द दूर नहीं हो रहा है। उनके पंजे, तलवे में भी दर्द बना हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के साथ नमी के कारण श्वेता के शरीर की हड्डियों में सूजन आ गई है। कंधे और तलवे के पास सूजन है। साथ काम करने वाले नया पुरा करेली के मो.अफरोज, अल्लापुर निवासी प्रीति वर्मा का भी यही हाल है। मई से लगातार भारी गर्मी और उमस ने शरीर को हर तरफ से झटका दिया है। पूरे आषाढ़ पारा 42 डिग्री से ऊपर रहा और उमस तेज रही। धूप और नमी के मेल का नतीजा है कि मांसपेशियों में सूजन की शिकायत बढ़ गई है। कंधे की मांसपेशियों में जकड़न के कारण माइग्रेन रोगी तेजी से बढ़े हैं। 20 जून से बुधवार के बीच 15 दिनों में बेली, काल्विन और स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में लगभग दो सौ से अधिक मरीज पंजीकृत किए गए जिन्हें गर्मी और नमी के कारण हड्डियों में सूजन की शिकायत है। कई चलने फिरने में असमर्थ हो गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लगातार तेज गर्मी और भारी नमी के कारण हड्डियों के बीच तरलता कम होने लगी है जिसके कारण कंधे, कमर के अलावा सिर और पीठ का दर्द बढ़ गया है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी और फिजिशियन डॉ.जितेंद्र नाथ पाठक, डॉ.वीके नारायण का कहना है कि शरीर का तापमान वातावरण के अनुसार घटता बढ़ता है लेकिन गर्मी अधिक समय तक टिकने के कारण परेशानी ज्यादा बढ़ी है। वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.जीके त्रिपाठी इन दिनों 15 रोगियों का इलाज कर रहे हैं जबकि डॉ.केशव सिंह के पास नौ बुजुर्ग और 12 महिला रोगी हैं। ज्यादातर को सुबह स्नान करते, टहलते, कसरत करते या सोकर उठने पर दर्द उठा जो बाद में माइग्रेन, स्पांडिलाइटिस या सियाटिका में तब्दील हो गया। अस्थि रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में दवा से ज्यादा कारगर फिजियोथेरेपी है। डॉ.केशव सिंह ने माना कि उन्होंने आठ मरीजों को फिजियोथेरेपी के लिए भेजा है। वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ.राकेश चंद्रा ने बताया कि मांसपेशियों की सूजन, हड्डियों की जकड़न के लिए सॉफ्ट लेजर तकनीक उपयोग की जा रही है। बुजुर्गों के शरीर में ऊर्जा जगाने के लिए यह सबसे बेहतर है।

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