बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

सावधान! हाईब्रिड व सुपर फाइन धान की नहीं होती खरीदारी

Updated Mon, 05 Jun 2017 08:47 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
मंझनपुर।
विज्ञापन

किसान हाइब्रिड और सुपर फाइन प्रजाति के धान की नर्सरी को लेकर सतर्क कर रहें। इस प्रजाति के धानों की खरीद क्रय केंद्रों पर नहीं होती। मिलर्स इसको लेने से साफ मना कर देते हैं। पिछले साल किसानों को इस प्रजाति के धान से भारी नुकसान हुआ था। अबकी बार भी किसानों ने नर्सरी शुरू कर दी है। जागरूकता के अभाव में किसान बढ़िया पैदावार पाने के चक्कर में इस प्रजाति के धान तैयार करने में जुटे हैं।

शासन द्वारा किसानों के धान की खरीद जिले भर में क्रय केंद्रों के सहारे कराई जाती है। किसानों को शासन द्वारा निर्धारित समर्थित मूल्य मिल सके। इसके लिए तौल कराने का अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन पिछले साल किसानों के धान खरीद में मिलरों ने पेंच फंसा दिया था। जिले के धान मिल मालिकों ने क्रय केंद्रों से हाईब्रिड व सुपर फाइन प्रजाति के धानों को लेने से साफ इंकार कर दिया था।


उनका कहना था कि इस प्रजाति के धान से शासन द्वारा निर्धारित चावल की रिकवरी का मानक पूरा नहीं किया जा सकता। मिलर्स द्वारा सिर्फ मंसूरी प्रजाति के धान की तौल कराए जाने से किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम में स्थानीय गल्ला व्यापारियों को बेचना पड़ा था। बावजूद इसके किसान खेतों में हाइब्रिड, सुपर फाइन व बासमती प्रजाति के धानों की खेती करने को बेताब हैं।

इसके लिए किसान निजी बीज की दुकानों से हाईब्रिड प्रजाति के बीज खरीदकर नर्सरी करने में जुट गया है। उधर शासन द्वारा मिलों से रिकवरी के मानक में कोई तब्दीली नहीं की गई। ऐसे में हाईब्रिड, सुपरफाइन व बासमती प्रजाति के धान किसानों के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। इस बाबत कृषि विभाग की ओर से धान बीज लेने आ रहे किसानों को जागरूक किया जा रहा है।


घाटे का सौदा बनीं अच्छी प्रजातियां
क्रय केंद्रों पर हाईब्रिड और सुपर फाइन धानों की नहीं की जा रही है खरीद
अधिक पैदावार होने पर किसानों ने डालनी शुरू कर दी हाईब्रिड की नर्सरी
मिलर्स के इंकार करने पर पिछले साल क्रय केंद्रों पर नहीं हुई थी तौल

बासमती धान भी नहीं लेते मिलर्स
जिले के किसानों द्वारा बासमती धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। सरसवां व कौशांबी ब्लॉक के नहरी क्षेत्र में इसकी खूब पैदावार होती है। शुरुआत में किसानों को इस प्रजाति के धान का अच्छा फायदा मिलता था। खेत में ही स्थानीय व्यापारी इसकी तौल सामान्य धान से अधिक कीमत देकर कराते थे।

कई बार तो बाहर से आकर व्यापारी जिले में डेरा डाले रहते थे। पिछले दो सालों से इस प्रजाति की खेती भी किसानों को धोखा दे रही है। जिले में कड़ाई न हो सकने के कारण क्रय केंद्रों में इसकी तौल नहीं होती। बाहर के व्यापारियों के नहीं आने से स्थानीय गल्ला व्यापारी मनचाहे रेट पर इसकी खरीद करते हैं। इससे किसानों का रुझान बासमती धान से दूर होने लगा है।

क्या कहते हैं अधिकारी
शासन द्वारा चावल रिकवरी का मानक 62 फीसदी निर्धारित किया गया है। जिले के मिलर्स का कहना है कि मंसूरी प्रजाति के अलावा किसी भी धान से इस मानक पर चावल की रिकवरी नहीं हो सकती। ऐसे में हाइब्रिड, सुपरफाइन प्रजाति के धान को ले पाना संभव नहीं है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे मंसूरी प्रजाति के धान को अधिक से अधिक उगाएं, जिससे उनके धान की तौल क्रय केंद्रों पर की जा सके।
विनीता मिश्रा, जिला विपणन अधिकारी

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us