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पारा 45 के पार, बदन झुलसाती रही तीखी धूप

Allahabad Bureau Updated Sat, 03 Jun 2017 08:59 PM IST
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पारा 45 के पार, बदन झुलसाती रही तीखी धूप
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जनमानस के साथ पशु पक्षी व्याकुल, नहीं मिली राहत
अस्पतालों में पेट दर्द व डायरिया के मरीजों में इजाफा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर (कौशाम्बी)। दो दिन से सामान्य रहे तापमान में शनिवार सुबह अचानक बदलाव आया। सुबह आठ बजते ही चिलचिलाती धूप ने बदन झुलसाना शुरू कर दिया। दोपहर को पारा 45 के पार पहुंचा तो लोगों का सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया। उधर सामान्य मौसम के बाद एकाएक बढ़ी गर्मी से अस्पतालों में पेट दर्द व डायरिया के मरीजों में इजाफा होने लगा। शनिवार को अचानक बढ़े तापमान ने जनमानस से लेकर पशु-पक्षियों को व्याकुल कर दिया।
जून माह की पहली तारीख से मौसम सामान्य हो गया था। दो दिन तक पारा 35 व 40 के इर्द-गिर्द रहा। इससे लोगों को गर्मी और उमस से थोड़ी राहत मिली थी लेकिन शनिवार सुबह तापमान में एकाएक उछाल आ गया। सुबह आठ बजते ही तापमान 38 पहुंच गया। इसके बाद तो धूप में खड़े होना मुश्किल होने लगा। बदन झुलसा रही धूप को देख अधिकतर लोग दिन भर अपने घरों में कैद रहे। जिन लोगों की बाहर निकलना मजबूरी थी वह पूरे बदन को गमछे से ढक कर निकले। दोपहर में तो हालात ऐसे हो गए कि मुख्यालय व कचहरी की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। चार बजे तक तापमान कम होने का नाम नहीं ले रहा था। इस दौरान लोग तपिश व उमस से दिन भर हलाकान रहे। चार बजे के बाद धीरे-धीरे तापमान नीचे खिसकना शुरू हुआ तो लोगों के घरों में लगे कूलर, पंखे से कुछ राहत मिली। उधर सुबह से ही गर्मी में एकाएक बढ़ोत्तरी होने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त व डायरिया के मरीजों की अस्पतालों में कतार लग गई। अकेले जिला अस्पताल के आंकड़ों पर जाएं तो शनिवार को आए एक हजार मरीजों में छह सौ मौसम जनित बीमारियों से ग्रसित रहे। बहरहाल तापमान दो-चार दिन ऐसे ही रहा तो हीटस्ट्रोक से लोगों की जान को खतरा पहुंचना शुरू हो जाएगा। जरा सी लापरवाही लोगों की जान पर बन सकती है।



तालाबों में नहीं है पानी, पशु-पक्षी बेहाल
शनिवार को तापमान का पारा चढ़ा तो जनमानस के साथ पशु-पक्षी भी बेहाल हो गए। गर्मी से सूख रहे हलक को तर करने व बदन की जलन मिटाने के लिए जंगली पशु-पक्षी पानी की तलाश में दिन भर इधर से उधर हांफते नजर आए। सबसे बुरा हाल तो पालतू पशुओं का रहा। पशुपालक हैंडपंप के सहारे किसी तरह पानी पिलाकर प्यास तो बुझा देते हैं पर बदन की गर्मी शांत करने में उन्हें भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बानगी के तौर पर विकास खंड नेवादा के खिजिरपुर कैलई, बिगहरा, उमरवल आदि गांवों को लिया जा सकता है। यहां के एक भी तालाब में पानी नहीं है। इससे इन गांवों के पशुपालकों का बुरा हाल है।


क्या कहते हैं अधिकारी
पारा अभी और बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। घर से जब भी बाहर निकलें तो पूरा बदन ढंककर ही निकलें। थोड़ी-थोड़ी देर में नीबू पानी का सेवन करते रहें। सिर ढंके बगैर धूप में निकलने से हीटस्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है।
एसके उपाध्याय, सीएमओ

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