53 फीसदी फसल बर्बाद

Kasganj Updated Fri, 12 Sep 2014 05:30 AM IST
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कासगंज। जनपद को अभी शासन ने भले ही सूखाग्रस्त घोषित न किया हो, लेकिन इस बार यहां का अन्नदाता बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। सूखे से सबसे अधिक नुकसान पटियाली क्षेत्र में हुआ है। जिला प्रशासन ने क्षति का आंकलन करने के बाद धन की डिमांड शासन को भेज दी है। तीनों तहसीलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर 53 फीसदी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।
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खरीफ की फसल के तहत जिले में मक्का, बाजरा, मूंग, उर्द, अरहर, तिल आदि फसलों की बुवाई की जाती है। सिंचाई के साधन अभी भी जनपद के सभी क्षेत्रों तक नहीं पहुंच सके हैं, जिससे तमाम किसान फसल के लिए मौसम पर ही निर्भर रहते हैं। सूखे ने ऐसे क्षेत्रों में फसलों को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया। शासन से मुआवजे के लिए 50 प्रतिशत से अधिक की क्षति का मानक निर्धारित है। प्रशासन ने इस मानक को ध्यान में रखकर जो सर्वे कराया उसमें 25,969 हेक्टेयर फसल के बर्बाद होना दर्शाया गया है। जबकि 50 प्रतिशत से कम मानक में भी काफी फसल बर्बाद हुई है। पटियाली तहसील क्षेत्र में 12,000 हेक्टेयर, सहावर तहसील में 11,969 हेक्टेयर और कासगंज तहसील में 2,000 हेक्टेयर फसल सूखे से प्रभावित हुई है। जिलाधिकारी कार्यालय से किसानों को फसल की क्षति का मुआवजा देने के लिए भेजी गई रिपोर्ट में 1433.11 लाख रुपये की डिमांड की गई है।
छोट किसानों पर पड़ी अधिक मार
कासगंज। सूखे से साधन संपन्न किसानोें ने तो अपनी फसल को प्रभावित होने से बचा लिया, लेकिन लघु एवं सीमांत किसानों पर अधिक मार पड़ी। असिंचित क्षेत्र की 18,677 तथा सिंचित क्षेत्र की 6585 हेक्टेअर फसल लघु एवं सीमांत किसान की बर्बाद हुई है।
मुआवजे से भी नहीं पुछेंगे आंसू
कासगंज। फसल के बर्बाद होने पर शासन से मुआवजे का जो प्रावधान है उससे बर्बाद हुए किसान के आंसू नहीं पुछेंगे। शासन सिंचित क्षेत्र में 9,000 रुपये तथा असिंचित क्षेत्र में 4,500 रुपये प्रति हेक्टेअर के हिसाब से ही मुआवजा देता है। जबकि फसल पर लागत कहीं अधिक आती है।
जनपद में सूखे से बर्बाद हुई फसल की भरपाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजकर धन की डिमांड की गई है। धन मिलते ही प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरित किया जाएगा।
-बीएम मिश्र, अपर जिलाधिकारी।
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