सिपाही की विधवा को कोर्ट से न्याय की आस

Kasganj Updated Tue, 22 Oct 2013 05:37 AM IST
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कासगंज। एक अक्तूबर 2012 को आगरा में श्रीधाम एक्सप्रेस में बदमाशों के हाथों मारे गए सिपाही फैज मुहम्मद के परिवारीजनों को उनकी शहादत पर फक्र है। लेकिन सरकार की उदासीनता पर अफसोस है। अब उन्हें न्यायालय से न्याय की आस है।
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फैज मुहम्मद की शहादत के बाद न तो सरकार ने कोई आर्थिक मुआवजा सिपाही के आश्रितों को दिया और न ही शहीद का दर्जा दिया गया। हत्याकांड की जांच पड़ताल भी सीबीआई से नहीं कराई गई। परिवारीजन 25 दिनों तक क्रमिक भूख हड़ताल पर रहे। अधिकारियों, नेताओं के आश्वासन मिले, सांत्वना मिली, लेकिन नतीजा नहीं निकला। विधानसभा में भी मामला गूंजा। पेंशन और विभागीय मदद का पैसा तो मिल गया, लेकिन अन्य भुगतान अभी भी लटका हुआ है। इसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में सिपाही की विधवा नूरबानों ने याचिका दायर कर दी है। जिसमें तारीखे लग रही हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय में दायर रिट में आर्थिक मुआवजा न दिए जाने, सीबीआई जांच न कराए जाने, शहीद का दर्जा न दिए जाने के मामले उठाए गए हैं। पुत्र की शिक्षा में तकनीकी कमी के कारण मृतक आश्रित को नौकरी भी नहीं मिली है। विधवा नूरबानों का कहना है कि सरकार ने उनके पति की शहादत को ठेस पहुंचाई है। सरकार को पहले ही आर्थिक मदद देनी चाहिए थे। शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए था और जांच सीबीआई से करानी चाहिए थे। ऐसा न करके सरकार ने उन्हें न्यायालय में जाने को मजबूर किया है।
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