मोहल्ला योगमार्ग की मस्जिद पर सोते थे तुलसी बाबा

Kasganj Updated Mon, 24 Dec 2012 05:30 AM IST
कासगंज/सोरों। संत तुलसीदास की जन्मस्थली के विवाद में सोरों क्षेत्र के मुस्लिम वर्ग के लोगों ने भी संत तुलसीदास का जन्मस्थान सोरों सूकरक्षेत्र को ही माना है।
बार ऐसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मुस्तफा कामिल के आवास परमुस्लिम धर्म गुरुओं, मौलवियों और प्रबुद्ध नागरिकों की बैठक हुई। इसमें अधिवक्ता कामिल ने प्रमाणों के साथ यह बात कही कि उनके पूर्वजों से तुलसीदास के परिवार के संबंध रहे। संत तुलसीदास की रचित कवितावलि के पेज संख्या 117 पर लिखे छंद का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तुलसीदास सोरों के ही रहने वाले थे। तुलसी सरनाम गुलामु है रामको, जाको रूचै सो कहै कछु ओऊ। मांग कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबो को एकु न दैबे को दोऊ। इस छंद के माध्यम से उन्होंने बताया कि संत तुलसीदास जो अपने आपको भगवान राम का गुलाम बताते हैं, वह कहते हैं कि मुझे तो मांगकर खाना है और मस्जिद पर सोना है और किसी से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस मस्जिद पर तुलसीदास सोते थे, वह प्राचीन जामा मस्जिद आज भी संत तुलसीदास के योगमार्ग स्थित मकान के पास ही है। उन्होंने बताया कि यह अकबर के शासनकाल से भी पूर्व की मस्जिद है। अकबर की पत्नी जोधाबाई सोरों गंगा स्नान को आतीं थीं। उनके अंगरक्षक भी योगमार्ग मुहल्ले में आकर रुकते थे। बाद में तुलसीदास ने भी इसी मोहल्ले में ही अपना निवास बना लिया था। आज भी उनके परिवारीजन यहां रहते हैं। नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष मुन्ने खान ने बताया कि पंडित बशीरूद्दीन अंसारी संस्कृत के विद्वान थे। 70 साल पहले उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने भी अपने शोध कार्य में सोरों को ही संत तुलसीदास की जन्मभूमि बताया। सराय मस्जिद के इमाम हाफिज मुहम्मद शरीफ ने बताया कि तुलसी के गर्भगृह का आज भी इतना प्रभाव है कि उनके खंडहर की मिट्टी से चर्म रोगी पूर्ण स्वस्थ हो जाता है। बैठक में कमाल हसन रहमानी, मुहम्मद सोहराब इमाम जामा मस्जिद, अंजुम राहत, हैदर अली, अब्दुल माजिद खान, असद मुस्तफा, मुशर्रत हुसैन, निशात कामिल, अब्दुल राहत, शाहब हसन आदि थे।

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