रमापति शास्त्री का बयान भ्रामक और तथ्यहीन

Kasganj Updated Mon, 24 Dec 2012 05:30 AM IST
सोरों। भाजपा के पूर्व मंत्री रमापति शास्त्री के तुलसी जन्मभूमि को गोंडा का राजापुर बताने पर तुलसी साहित्य के विशेषज्ञों ने कड़ा एतराज जताया है। संत तुलसीदास नगर विकास समिति के अध्यक्ष डा. प्रभाकर पाराशरी ने कहा कि श्री शास्त्री द्वारा तुलसी जन्मभूमि के विषय में दिया गया बयान भ्रामक और तथ्यहीन है। दिवंगत विद्वानों डा. गोवर्धननाथ शुक्ल व डा. नागेंद्र का नाम लेकर भ्रम फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कथित सूकरखेत और जन्मभूमि का दावा करने वाले पसका जिला गौंडा में सरयू घाघरा का संगम है। असली तुलसी जन्मभूमि तो वाराह पुराण के अनुसार गंगा तट पर स्थित सोरों है। भारत सरकार 1979 में सोरों रेलवे स्टेशन व सोरों डाकघर का नाम सोरों सूकरक्षेत्र घोषित कर चुकी है। अनेकों शोध ग्रंथों व विद्वानों द्वारा सोरों को तुलसी जन्मभूमि सिद्ध किया गया है। अब भी सोरों क्षेत्र के विद्वान कहीं भी शास्त्रार्थ करने को तैयार है। सोरों के सपा नगर अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने पूर्व मंत्री रमापति शास्त्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पूर्वमंत्री आधारहीन बयान देकर सोरों के नागरिकाें की भावनाओं से न खेलें।

भाजपा ने बयान से झाड़ा पल्ला
सोरों । केए कालेज के प्राध्यापक व साहित्यकार डा. राधाकृष्ण दीक्षित ने भाजपा के पूर्व मंत्री रमापति शास्त्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए भाजपा प्रदेश संगठन मंत्री राकेश जैन से दूरभाष पर बात की। श्री जैन ने इस बयान को शास्त्री का निजी बयान बताते हुए कहा कि भाजपा को इन सब से कोई लेना-देना नहीं। भाजपा की नगर इकाई की बैठक में रमापति शास्त्री के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता योगेश चौधरी व श्रीकांत तिवारी ने कहा कि रमापति गौंडा के निवासी हैं। उनको तथ्यों की जानकारी बिल्कुल नहीं है। तथ्यों से भलीभॉति परिचित होकर ही उन्हें बयान जारी करना चाहिए। बैठक में भाजपा नगर अध्यक्ष मनोज भारद्वाज, संपूर्णांनद भारद्वाज, अमित अनाड़ी, बृजेश उपाध्याय, आशुतोष त्रिवेदी आदि थे।

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