पुरोहितों की पत्रावलि में दर्ज हैं तुलसी जन्म के प्रमाण

Kasganj Updated Fri, 21 Dec 2012 05:30 AM IST
कासगंज। नगर के संभ्रांत और प्रबुद्ध नागरिकाें की बैठक नलवाली गली में आयोजित की गई। बैठक में तुलसी जन्म भूमि को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री की घोषणा पर रोष प्रकट किया गया। लोगों ने सोरों को तुलसीजन्म स्थली घोषित करने की मांग रखी। वहीं, एक अधिवक्ता ने डीएम को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है।
बैठक में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग के पूर्व सदस्य डा. ज्ञान प्रकाश गुप्ता ने कहा कि सोरों के पुरोहितों की पत्रावलियां, जो सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं, उनके अनुसार संत तुलसीदास जी का जन्म शूकर क्षेत्र सोरों में ही हुआ है। राजकीय अभिलेख, गजेटियर भी इसके प्रमाण हैं। तुलसीदास के वंशज आज भी सोरों में निवास करते हैं। जिस विद्यालय में पढ़ते थे, वह आज विकास को तरस रहा है। पूर्व प्रधानाचार्य दामोदर दास गुप्ता ने कहा कि तुलसीदास के पिता आत्माराम शुक्ला से लेकर अब तक तुलसीदास जी के वंशजों का लेखाजोखा पुरोहितों के पास मौजूद है। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गोंडा के सूकरखेत राजापुर को बताकर इस संपूर्ण क्षेत्र का अपमान किया है। यदि अपनी घोषणा को मुख्यमंत्री ने वापस नहीं लिया तो जनता संघर्ष के लिए बाध्य होगी। इस दौरान डा. अशोक अग्रवाल, संतोष माहेश्वरी, अशोक बंसल, डा. योगेंद्र सिंह, नरेश चंद्र अग्रवाल, डा. सुरेंद्र गुप्ता, मुकेश चंद्र साहू आदि मौजूद रहे।
अधिवक्ता राजेंद्र नारायण गौतम ने भी डीएम को ज्ञापन सौंपकर साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए तुलसीदास की जन्मस्थली शूकर क्षेत्र सोरों को घोषित किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस ही अपने आप में तुलसी के जन्म का सोरों में प्रमाण देता है। तो अब इसमें नई बहस की आवश्यकता क्यों है। तुलसीदास सोरों के थे और सोरों के ही रहेंगे।

सोरों ही है तुलसीदास की जन्मस्थली
अमांपुर । सर्वहितकारी इंटर कालेज जसूपुरा अमांपुर में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों द्वारा मुख्यमंत्री द्वारा तुलसीदास का जन्मस्थान राजापुर को घोषित करने पर कड़ा रोष व्यक्त किया गया। उन्होंने सोरों को तुलसीदास की जन्मस्थली घोषित करने की मांग की है।
संस्था के प्रधानाचार्य आर्येन्द्र सिंह सोलंकी ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस की एक चौपाई, मैं पुनि निज गुरुसन सुनी, कथा सो शूकरखेत, समझ्यो नहिं तस बालपन तब अति रह्यो अचेत, से ही पूर्ण स्पष्ट है कि सोरों ही तुलसीदास की जन्मस्थली है। शिक्षक अनिल शर्मा ने कहा कि वाराह पुराण के श्लोक यत्र भागीरथी गंगा मम सौकरवे स्थिता, से भी स्पष्ट होता है कि जहां भागीरथी गंगा स्थित है, वहां मेरा शूकर क्षेत्र है। रोष व्यक्त करने वालों में प्रबंधक छोटे सिंह सोलंकी, शिक्षक ओमप्रकाश, ब्रजभान, संदीप, प्रमोद, नरेश आदि थे।

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