एक भी विकलांग के लिए नहीं मिला ऋण का लक्ष्य

Kasganj Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
कासगंज। ईश्वर ने उनके साथ इंसाफ नहीं किया। शासन भी विकलांगों को लेकर गंभीर नजर नहीं आता। आधे अधूरे मन से ही विकलांगों के कल्याण के कार्यक्रम संचालित होते हैं। इससे विकलांगों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
शासन विकलांगों के लिए दुकान खोलने को ऋण देने की योजना चलाती है। लेकिन वर्तमान वर्ष में शासन ने रोजगार अपनाने के इच्छुक विकलांगों को ठेंगा दिखा दिया है। पिछले साल चार विकलांगों को ऋण देने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन इस साल यह लक्ष्य भी जनपद को नहीं मिला है। शादी प्रोत्साहन योजना भी विकलांगों के लिए कारगर नहीं हो पा रही। शासन ने 18 विकलांगों को ही वैवाहिक जीवन अपनाने के लिए धनराशि प्रदान की है। पेंशन योजना भी विकलांगों का भला नहीं कर पा रही। उनको जीवन निर्वहन के नाम पर तीन सौ रुपये पेंशन मिलती है। हालांकि यह पेंशन 5372 विकलांगों को दी जा रही है। बावजूद इसके तमाम विकलांग ऐसे हैं जो पेंशन के लिए भी चक्कर काट रहे हैं। उपकरण वितरण योजना दिखावा साबित हो रही है। योजना के तहत अभी तक एक भी उपकरण नहीं बांटा गया है। इस योजना से 19 ट्राई साईकिल, 1 व्हीलचेयर, 5 श्रवण यंत्र और 40 बैसाखी का लक्ष्य है। इस संबंध में जिला विकलांग कल्याण अधिकारी वीके शर्मा का कहना है कि शासन से जिन योजनाओं का बजट मिल जाता है, उसका लाभ पात्रों को प्रदान कर दिया जाता है।

आसान नहीं विकलांग प्रमाणपत्र पाना
कासगंज । विकलांगों को शासन की योजनाओं का लाभ पाने के लिए विकलांग प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। लेकिन यह प्रमाणपत्र प्राप्त कर पाना विकलांगों के लिए आसान नहीं है। स्वास्थ्य विभाग संयुक्त चिकित्सालय पर प्रत्येक गुरुवार को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए शिविर का तो आयोजन करता है, लेकिन विकलांगों को प्रमाणपत्र देते समय तमाम अड़चनें पैदा की जाती है, जिससे वे परेशान होते हैं।

बसों में नहीं मिल पाता लाभ
कासगंज । विकलांगों के लिए परिवहन विभाग की बसों में यात्रा करने पर छूट का प्रावधान है। यह छूट भी विकलांगों को आसानी से नहीं मिल पाती। अक्सर विकलांगों के साथ रोडवेज बसों में नोंकझोंक के मामले आम हैं। जिससे विकलांग परेशान होते हैं। उन्हें मजबूरन पूरा किराया भी अदा करना पड़ जाता है।

प्रीइंटेरिगेशन स्कूल भी नहीं बन पा रहे मददगार
कासगंज । विकलांग बच्चों की शिक्षा को शासन के द्वारा प्रीइंटेरिगेशन स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। यह स्कूल भी विकलांगों के लिए मददगार नहीं हो पा रहे। पर्याप्त व्यवस्थाएं न हो पाने से विकलांगों को यहां पर संचालित स्कूल में शिक्षा का लाभ सही ढंग से नहीं मिल पाता। वहीं, विकलांगों को घरों पर जाकर पढ़ाने की योजना भी खटाई में पड़ गई है।

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