तीन साल में 3.7 के औसत से मिला महिलाओं को काम

Kasganj Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
कासगंज। मनरेगा योजना के तहत महिलाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर प्रदान करने के प्रावधान शासन ने भले ही दिए हों, लेकिन जनपद में महिलाओं को मनरेगा में रोजगार मिल पाना आसान नहीं है। ग्राम प्रधान जॉबकार्डधारी महिला मजदूरों को रोजगार देने से कतराते हैं। ऐसे में रोजगार न मिल पाने से महिलाएं काफी परेशान रहती हैं।
मनरेगा योजना के तहत सृजित हेने वाले मानव दिवस में महिलाओं को 33 प्रतिशत भागीदारी के प्रावधान शासन से किए गए हैं। ताकि महिलाएं भी रोजगार पाकर अपने परिवार के भरण पोषण में सहायक बन सकें। लेकिन उनके हक पर ग्राम प्रधान डाका डालते हैं। मनरेगा में दिए जाने वाले कार्यों को लेकर प्रधानों की मनमानी रहती है। वे अपने चहेतों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं। जबकि जरुरतमंद लोग रोजगार पाने से वंचित रह जाते हैं। विभागीय अधिकारी भी महिलाओं को उनका हक दिलाने को गंभीर नजर नहीं आते। मानक के अनुसार रोजगार न मिल पाने पर भी दोषियों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई प्रशासनिक स्तर से नहीं की गई है। जिससे महिलाओं को उनका हक नहीं मिल पाता। ढोलना निवासी महिला राजवती का कहना है कि उन्हे साल में दस बारह दिन ही रोजगार दिया जाता है। इसी गांव की निवासी महिला रामकली ने भी इसी तरह की बात बताई। पीडी डीआरडीए यूके त्यागी ने स्वीकार किया कि महिलाओं को मनरेगा में कार्य करने का प्रतिशत काफी कम है। शासन के निर्देशानुसार महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। पुरूषों की भांति ही महिलाओं को भी मनरेगा में पूरी मजदूरी का भुगतान कराया जायेगा।

वर्ष सृजित मानव दिवस महिलाओं को मिला रोजगार
2010-11 2850281 95582
2011-12 2580731 100336
2012-13 (अब तक) 657616 29721

मनरेगा में बढ़ाएं महिलाओं की भागीदारी: डीएम
कासगंज। जिलाधिकारी चैत्रा वी ने कहा कि मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये प्रभावी कार्यवाही की जाये। ग्रामीण क्षेण में इच्छुक महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिये उन्हें भी प्राथमिकता के साथ काम पर लगाया जाये। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इच्छुक महिलाओं को मनरेगा के कार्य करने के लिये प्रेरित किया जाये। गरीब परिवारों का जीवन स्तर सुधारने के लिये पति-पत्नी दोनों को काम पर लगाकर मजदूरी का भुगतान समय से किया जाये।

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