आखिर कब तक होता रहेगा ऐसे ही जोखिम भरा सफर

Kasganj Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
कासगंज। तीर्थनगरी सोरों, कछला गंगा घाट पर हर स्नान पर्व पर स्नानार्थियों का सैलाब उमड़ता हैं। दूसरे राज्यों तक से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। जान जोखिम में डालकर लोग यहां तक पहुंचते है और फिर वापस लौटते है।हालात यह है कि वाहनों की भीतर पैर रखने के लिए जगह नहीं रहती, छतों पर भी लोग सवार हो जाते हैं। सोमवार को भी ऐसा ही नजारा रहा और ट्रेन की छत महिलाएं तक सफर करती हुई नजर आई।
सोमवार को गंगा स्नान के लिए अन्य स्नान पर्व के मुकाबले दो गुनी भीड़ आई। पितृ अमावस्या पर पितरों के तर्पण के लिए श्रद्धालु पहुंचे।वहीं आज सोमवती अमावस्या होने के कारण श्रद्धालुओं भारी संख्या में पहुंचे। बसों और डग्गामार वाहनों पर जितने यात्री वाहनेां के अंदर थे, उससे ज्यादा वाहनों की छतों व इधर उधर लटके नजर आ रहे थे। वहीं बरेली मथुरा की ओर आने जाने वाली ट्रेनों में भी श्रद्धालु खचाखच भरे हुए थे। मथुरा जाने वाली ट्रेन में सवारों की संख्या का आलम यह था कि ट्रेन की छतों पर बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं हर कोई चढ़ते नजर आ रहे थे। जान जोखिम में डालकर ट्रेन की छत पर बैठकर लोगों का सफर पूरा हुआ। क्यों नहीं होती व्यवस्था।हर स्नान पर्व पर यही हाल होता है फिर भी स्थाई हल कोई नहीं निकाला जाता। पहले स्नान पर्व तय रहते है, प्रशासन को इसकी जानकारी रहते है, फिर भी तैयारी नहीं की जाती है।परिवहन निगम केवल दर्जन भर बसों को स्नान पर्व पर लगाता है लेकिन वह पर्याप्त साबित नहीं होती। ट्रेनों में भी न तो अतिरिक्त कोच लगाए जाते है और न ही अलग से ट्रेन चलाने की व्यवस्था की जाती।

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