जीव में नम्रता का भाव जरूरी : अतुल कृष्ण

Kasganj Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
कासगंज। श्री रामकथा प्रवचन के दौरान कथा व्यास संत अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में नम्रता का भाव बेहद जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि एक नम्रता का जिस जीव में होता है, उन जीवात्माओं के मुख मंडल पर एक अलग ही कांति नजर आती है।
माता सीता के स्वयंवर के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि स्वयंवर के दौरान महर्षि परशुराम ने आकर अपना आक्रोश श्रीराम के समक्ष जताया, लेकिन प्रभु श्रीराम ने नम्रता का भाव नहीं खोया। वह नम्रता के भाव को धारण कर रहे और महर्षि परशुराम के समक्ष खुद को दास बताया। संत अतुल कृष्ण ने संतों की प्रकृति पर चर्चा करते हुए कहा कि संत माया मोह के बंधन से मुक्त होकर समाज के कल्याण के लिए कार्य करता है। उसकी वृत्ति केवल कल्याण की होती है। समाज को सही राह दिखाना, त्याग और तपस्या ही संत की वृत्ति और धरोहर है। राम विवाह के प्रसंग पर जनकपुरी के सुंदर वातावरण का उन्होंने मार्मिक वर्णन किया। रामकथा के दौरान प्रभु की भक्ति में श्रद्धालु डूबे नजर आए। इस दौरान विनोद हरकुट, विनीत बंसल, राकेश चोला, कैलाश अग्रवाल, रामकिशोर वार्ष्णेय, भोला चोला, विनीत अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

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