महज खानापूर्ति को लाखों का खर्च

Kasganj Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
कासगंज। जनपद में वन विभाग के पास कोई संरक्षित वन क्षेत्र नहीं है। हर साल जो पौधरोपण का लक्ष्य मिलता है, उसे नहरों, सड़कों आदि के किनारे ही पौधरोपण कर पूरा दर्शा दिया जाता है। जबकि यह लक्ष्य वन क्षेत्र विकसित करने को दिया जाता है। ऐसे में शासन से पौधरोपण के नाम पर आने वाली लाखों की राशि महज खाना पूर्ति करने की भेट चढ़ जाती है।
वन विभाग आज तक जनपद में सुरक्षित वन क्षेत्र तैयार नहीं कर सका है। जबकि हर साल वन विभाग के माध्यम से पौधरोपण कार्यक्रम चलाया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वर्ष शासन से वन क्षेत्र विकसित करने के लिए लक्ष्य मिलता है। इस लक्ष्य की पूर्ति के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर ही यदि गौर किया जाए तो विभाग की हकीकत सामने आ जाएगी। वर्ष 2010-11 में 108 हेक्टेयर क्षेत्रफल में, वर्ष 2011-12 में 215 हेक्टेयर क्षेत्र में और वर्ष 2012-13 में 183 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधे रोपित करने का दावा वन विभाग के द्वारा किया जा रहा है। इस क्षेत्रफल में प्रत्येक हेक्टेयर के हिसाब से 1100 पौधे रोपे जाते हैं।
तीन साल में पांच लाख छप्पन हजार छह सौ पौधे विभाग के द्वारा रोपे गए हैं, लेकिन यह पौधे कहां रोपे गए हैं, इसका कोई हिसाब किताब नहीं है। जनपद में नहर की पटरियां, रेल पटरियां और सड़क के किनारे सीमित मात्रा में ही हैं, हर वर्ष इन्हीं क्षेत्रों में पौधरोपण कार्यक्रम दर्शाया जाता है। जिस पर लाखों रुपये खर्च होते हैं। जो थोड़े बहुत पौधे वन विभाग रोपित कर भी देता है, जिनकी उचित देखभाल नहीं होती। जिससे वे दम तोड़ जाते हैं। इस संबंध में कासगंज के रेंजर सुभाष चौधरी ने बताया कि जो लक्ष्य मिला था, उसकी पूर्ति कर ली गई है। नहरों, सड़क और रेल पटरियों के किनारों पर पौधे लगाए गए हैं। इनकी सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड भी लगाए गए हैं।

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