बीमार लोग सरकारी अस्पतालों के भरोसे न रहें

Kanshiram Nagar Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
कासगंज। शासन की स्थानातंरण नीति जनपद के स्वास्थ्य महकमे पर भारी साबित हो रही है। जनपद से लगातार चिकित्सकों के स्थानातंरण हो रहे हैं लेकिन बदले में अन्य चिकित्सकों को यहां नहीं भेजा जा रहा। मात्र आठ चिकित्सक ही जनपद में शेष रह गए है। जबकि यह मौसम बीमारियों का मौसम है। ऐसे में कैसे लोगों का इलाज होगा।
जनपद में स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही काफी बदहाल स्थिति में चल रही थी। स्वास्थ्य विभाग पर चिकित्सकों का पहले से ही टोटा था। 92 पदों के मुकाबले मात्र 32 चिकित्सक ही जनपद में मौजूद थे। रही सही कसर शासन की स्थानांतरण नीति ने पूरी कर दी है। जब से स्थानातंरण का दौर शुरू हुआ है यहां से लगातार चिकित्सकों के स्थानंतरण को लेकर फरमान आ रहे हैं। यहां से चिकित्सक रिलीव होकर अपने नए तैनाती स्थल को रवाना भी हो रहे हैं। इससे चिकि त्सकों की लगातार कमी होती जा रही है। अब तक 24 चिकित्सकों के स्थानंतरण आदेश आ चुके है। अब मात्र आठ चिकित्सक ही जनपद में शेष रह गए है। चिकित्सकों की कमी से संयुक्त चिकित्सालय पर भी चिकित्सकों की कमी हो गई है। जो आठ चिकित्सक शेष बचे है उनमें से दो महिला चिकित्सक हैं। जनपद के सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्राें पर हाल बेहाल हो चुका है। जबकि इस समय काफी संख्या में संक्रामक बीमारियों से पीड़ित स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंच रहे हैं। एक दिन में सैकड़ों मरीज विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होकर चिकित्सालयों पर पहुंचते है। चिकित्सकों के अभाव में इन्हे समुचित चिकित्सा सेवा नहीं मिल पा रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सेवा देने के लिए खोले गए नवीन प्राथमिक स्वास्थ केंद्र अब पूरी तरह से चिकित्सक विहीन हो गए है। इन स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों के न रहने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतें हो रही है। वे अपना इलाज कराने को परेशान है।
जनपद में निजी चिकित्सक ों का भी टोटा है मात्र 22 निजी चिकित्सक ही जनपद में रजिस्टर्ड है। ऐसी स्थिति में मरीजों को न तो इस समय सरकारी स्वास्थ्य सेवा ही ढंग से मिल पा रही है और न ही निजी चिकित्सकों के द्वारा दी जाने वाली सेवाएं ही। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जनपद के वाशिंदों को इस समय काफी दिक्कतें हो रही है।

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