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बांदा जेल में लाल दाने व खुजली से बेचैन बाहुबली गैंगस्टर मुख्तार अंसारी, बीमारी का हवाला दे मांगा कूलर

बांदा जेल के बैरक नंबर 16 में बंद बाहुबली विधायक और गैंगस्टर मुख्तार अंसारी अपने जिस्म में निकल रहे लाल दानों व खुजली से बेचैन है। कमर दर्द में भी राहत नहीं है। शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीज मुख्तार अंसारी ने अधिवक्ता के जरिए मऊ जिले के सीजेएम अदालत में अर्जी देकर बीमारी और डॉक्टरों की सलाह का हवाला देते हुए बैरक में एयर कूलर व मच्छरदानी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। अदालत ने कारागार अधीक्षक बांदा को पत्र भेजकर पूछा है कि क्या मुख्तार को जेल मैन्युअल के अनुसार यह सुविधाएं दी जा सकती हैं? अधिवक्ता ने अदालत में दी अर्जी में कहा कि मुख्तार अंसारी मऊ सदर विधानसभा से पांचवीं बार विधायक है। ... और पढ़ें

जालौन: जेल में आजीवन कारावास के बंदी की संदिग्ध हालात में मौत, मचा हड़कंप

जालौन जिला कारागार में सोमवार को बंदी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पुलिस ने शव को शव गृह में रखवा दिया है। पुलिस का कहना है कि बंदी उड़ीसा का रहने वाला है। वह कुछ दिनों से बीमार भी चल रहा था।

फिलहाल परिजनों को सूचना कर दी गई है। उड़ीसा के जिला गंजम के सोरडा निवासी राजू नायक को वर्ष 2019 में कालपी कोतवाली पुलिस ने हत्या के मामले मेें उरई जेल भेजा था। इस मामले में न्यायालय से उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

वह दो साल से जेल में सजा काट रहा था। रविवार की देर रात उसकी हालत बिगड़ी तो आननफानन में जेल प्रशासन की ओर से उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक के परिजनों को सूचना कर दी गई है। उसकी मौत की सही वजह पता नहीं चल पा रही है। वहीं, जेल प्रशासन बंदी की मौत को हार्ट अटैक बता रही है। कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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गांव की ओर रुख: कोरोना के खौफ के चलते शुद्ध ऑक्सीजन की तलाश में कानपुर के उद्यमी पहुंचे गांव और अपने फार्म हाउस

कानपुर में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण और ऑक्सीजन के संकट के बाद लोगों को फिर से गांव ही सुरक्षित ठिकाना लग रहा है। प्रवासी कामगारों से लेकर शहरों में रह रहे अन्य लोग अपने गांव का रुख कर रहे हैं। जिन व्यवसायियों, ठेकेदारों आदि ने फार्म हाउस बना रखा है, वे परिवार के साथ वहीं चले गए हैं।

कोई खुले स्थानों में शुद्ध हवा की तलाश कर रहा तो कोई शहरी भीड़भाड़ के खतरे से बचने को गांव को तरजीह दे रहा है। गूबा गार्डन में रहने वाले कमल शर्मा ठेकेदारी करते हैं। अपने पूरे परिवार के साथ पिछले एक सप्ताह से बिल्हौर स्थित अपने गांव औतोंहारपुर चले गए हैं।

उनका कहना है शुद्ध वातावरण की तलाश में गांव आए हैं। शहर की स्थिति काफी डरावनी है। वहीं विनायकपुर के रहने वाले इंजीनियर रामकिशोर अपनी पत्नी के साथ हरियाणा स्थित फार्म हाउस में चले गए हैं। ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने गांव पहुंचकर खुली हवा को अपना ठिकाना बना लिया है।
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शर्मनाक: नाबालिग से अप्राकृतिक सामूहिक दुष्कर्म, न्याय के लिए थाने के चक्कर लगा रहा पिता

औरैया के अजीतमल क्षेत्र के गांव मलगंवा चौकी अंतर्गत एक गांव निवासी पीड़ित अपने 10 वर्षीय मासूम के साथ हुए अप्राकृतिक सामूहिक दुष्कर्म का प्रार्थना पत्र लेकर मामला दर्ज कराने को कोतवाली के चक्कर लगा रहा है। थाना पुलिस से न्याय मिलता न देख पीड़ित पिता ने एसपी से नाबालिक पुत्र की डॉक्टरी जांच कराने के साथ ही कार्रवाई करने की मांग की है

अजीतमल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़ित पिता ने बताया कि 24 अप्रैल को उसके 10 वर्षीय पुत्र को गांव निवासी तीन लोग बेटे को अपने साथ नहर किनारे ले गए। आरोप है कि तीनों ने बारी-बारी से उसके पुत्र के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किया। जब उसके पुत्र ने घर पर इसकी शिकायत करने की बात कही तो आरोपियों ने पुत्र को हाथ-पैर बांधकर नहर में फेंकने की धमकी दी।

पुत्र को शारीरिक परेशानी होने पर उसने घटना की जानकारी दी। पुलिस से शिकायत करने पर आरोपी जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। कार्रवाई करना तो दूर पुलिस से शिकायत करने के कई दिन बाद भी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई है। लगातार वह थाने से लेकर सीओ दफ्तर के चक्कर लगा रहा है।

आज तक पीड़ित पुत्र का न तो डाक्टरी परीक्षण कराया गया और नहीं आरोपियों के खिलाफ मुकदमा लिखा गया।  पीड़ित पिता ने एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। एसपी अपर्णा गौतम ने बताया कि इस मामले की जांच करा कर कार्रवाई की जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

कानपुर: शराब की दुकानें खुलते ही लगी लोगों की कतार, कोविड नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां

कानपुर में भले ही अभी 17 मई तक कोरोन कर्फ्यू के आदेश को पुलिस सख्ती से पालन कराने का प्रयास कर रही है लेकिन मंगलवार दोपहर शराब की दुकानों पर सभी नियम-कानून टूटते नजर आए। शासन से सोमवार रात में जारी आदेश पर शराब की दुकानें खुलते ही भीड़ लग गई।

मनमानी का आलम तब नजर आया जब शराब की दुकानों में भीड़ इस कदर बढ़ी कि कोविड नियमों का भी ध्यान नहीं रहा। कानपुर में संक्रमित मरीजों के मिलने और कोरोना से मौतों का सिलसिला अभी रुका नहीं है, शासन के निर्देश के बाद शराब की दुकानें खुल गईं हैं। मंगलवार सुबह से ही घरों से निकलकर लोग शराब दुकानों में लाइन लगाने लगे। इस दौरान लोगों को दो गज दूरी का ध्यान भी नहीं रहा।
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कोरोना का खौफ: भोर में ही दर्शन कर लगाई कामदगिरी की परिक्रमा, वैशाख मास की अमावस्या मेला में पसरा सन्नाटा

कोरोना काल के चलते वैशाख माह की अमावस्या पर मंगलवार को कामदगिरी की परिक्रमा पर रोक का असर देखने को मिला। अपने-अपने साधन से पहुंचे कुछ ही श्रद्धालुओं ने भोर में ही भगवान कामता नाथ के दर्शन कर कामदगिरी की परिक्रमा लगाई। वहीं मेला क्षेत्र में यूपी व एपमी के प्रशासनिक अधिकारी दिनभर डटे रहे।

उधर, धर्मनगरी क्षेत्र के तीर्थ स्थल जानकीकुंड, सतीअनुसइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, भरतकूप तीर्थ स्थालों पर भी सन्नाटा दिखा। कोरोना काल को देखते हुए यूपी व एपमी के प्रशासन ने अमावस्या मेले में श्रद्धालुओं के आने पर रोक लगा रखी थी। ऐसे में श्रद्धालुओं का उमड़े वाला रेला अबकी नजर नहीं आया।

नाममात्र के श्रद्धालु परिक्रमा को पहुंचे। हमीरपुर के राजेश चंदेल, बांदा के किरन गुप्ता, कौशाबी जिले के रेवतीरण त्रिपाठी ने बताया कि कई साल से उनका परिवार अमावस्या मेला में जरूर आता है। इस बार उन्होंने दूर से भगवान के दर्शन किया। उधर, जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ला व पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल ने धर्मनगरी क्षेत्र का भ्रमण किया।

मेला क्षेत्र में लगाये गये सेक्टर अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी श्रद्धालु तीर्थ क्षेत्र में न आने पाए। वहीं एमपी क्षेत्र के नया गांव थाना प्रभारी संतोष तिवारी अपनी टीम के क्षेत्र का भ्रमण कर श्रद्धालुओं से घर वापस लौट जाने के लिए कहा। इसके अलावा रामघाट से लेकर बेडीपुलिया तक सीतापुर चौकी प्रभारी रामवीर सिंह अपनी टीम के साथ भ्रमण पर रहे और आने वाले श्रद्धालुओं को अपने घर जाकर पूजन करने को कहा।
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कानपुर आईआईटी के सहायक कुलसचिव ने फांसी लगा जान दी, परिजनों का दावा, डिप्रेशन की वजह से की आत्महत्या

अमावस्या मेला में पसरा सन्नाटा
आईआईटी कानपुर के सहायक कुलसचिव सुरजीत दास (40) ने सोमवार रात परिसर में ही स्थित अपने आवास पर फांसी लगाकर जान दे दी। मंगलवार सुबह उनकी पत्नी ने शव फंदे से लटकता देखा। पोस्टमार्टम में हैंगिंग से मौत की पुष्टि हुई है। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

हालांकि परिजनों ने डिप्रेशन की वजह से खुदकुशी करने की बात कही है। मूलरूप से असम के रहने वाले सुरजीत दास 2015 से आईआईटी में सहायक कुलसचिव थे। परिवार में उनकी पत्नी बुलबुल और दो बेटे सौम्यजीत व शोभित हैं। आईआईटी परिसर स्थित टाइप-3 में परिवार समेत रहते थे।

बुलबुल के मुताबिक सोमवार रात को खाना खाने के बाद सुरजीत अपने कमरे में चले गए थे। सुबह काफी देर तक जब बाहर नहीं आए तो करीब नौ बजे वह खुद कमरे में गई। देखा कि चादर के फंदे से सुरजीत का शव लटक रहा था। उन्होंने तुरंत पुलिस और आईआईटी प्रशासन को जानकारी दी।

एसीपी कल्याणपुर दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि छानबीन जारी है। अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। फोन की जांच की जा रही है। परिजनों ने बताया कि सुरजीत कई वर्षों से डिप्रेशन में थे। जांच में कोई अहम तथ्य मिलता है तो उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। 
 
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उन्नाव: जमीन के विवाद में बड़े भाई ने छोटे भाई के शरीर पर कुल्हाड़ी से किए कई वार, तड़पकर हुई मौत

उन्नाव के चकलवंशी में जमीन के विवाद में बड़े भाई ने छोटे भाई की कुल्हाड़ी से वारकर हत्या कर दी। देवर की मौत और पति की गिरफ्तारी से आहत हत्यारोपी की पत्नी ने जहर खा लिया। गंभीर हालत में उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने हत्यारोपी से पूछताछ के आधार पर खून से सनी कुल्हाड़ी बरामद कर उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। 

आसीवन थाना क्षेत्र के सिद्धनाथ गांव निवासी राम मोहन (40) का उसके छोटे भाई शिव मोहन (35) से जमीन को लेकर कई साल से विवाद चल रहा था। जमीन पर छोटे भाई राम मोहन ने छप्पर डालकर मवेशी बांधना शुरू कर दिया था। यह बात बड़े भाई शिवमोहन को नागवार गुजरी। सोमवार रात शिव मोहन ने अपनी गाय छोटे भाई के छप्पर के नीचे बांध दी।

इसको लेकर दोनाें में विवाद हुआ। ग्रामीणों ने किसी तरह दोनों को अलग कर मामला शांत करा दिया। मंगलवार सुबह फिर से विवाद हो गया। राम मोहन घर से खेत की ओर चला गया। गुस्से में बड़ा भाई शिव मोहन हाथ में कुल्हाड़ी लेकर छोटे भाई के पीछे पहुंचा और उस पर कई वार कर दिए। इससे वह लहूलुहान हो गिर गया। खेतों पर काम कर रहे किसानाें ने पुलिस को घटना की जानकारी दी।
 
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#LadengeCoronaSe: कोरोना से ठीक होते ही बदलें टूथब्रश और टंग क्लीनर, भूलकर भी नजरअंदाज न करें ये खबर

अगर कोई कोरोना संक्रमित रोगी ठीक हो गया है और उसकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आ गई है तो वे अपना कुछ पुराना सामान बदल दें। दरअसल, पुराने टूथ ब्रश, टंग क्लीनर आदि के इस्तेमाल से संक्रमण दोबारा होने का खतरा रहता है।

इसके अलावा पुरानी तौलिया, रुमाल आदि के इस्तेमाल में परहेज बरते। घर के किसी शख्स को अपना तौलिया वगैरह इस्तेमाल न कर दें। कोरोना से ठीक हो चुके कुछ रोगियों की तबीयत फिर बिगड़ रही है। कानपुर में जाजमऊ के रहने वाले 52 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने घर में पुराना टूथ ब्रश साफ करके इस्तेमाल किया।

छह दिन के बाद फिर तबीयत बिगड़ गई। इसी तरह के कुछ रोगियों ने हैलट के विशेषज्ञों से अपनी दिक्कत बताई। इन रोगियों ने डॉक्टरों को बताया कि अस्पताल से घर जाने के बाद उन्होंने पुराना टूथ ब्रश, टंग क्लीनर आदि पानी से धोकर फिर इस्तेमाल किया।

इन रोगियों की अस्पताल में एक्सरे रिपोर्ट ठीक आई थी और आरटीपीसीआर रिपोर्ट भी निगेटिव थी। घर जाने के बाद फिर खांसी और सांस फूलने की दिक्कत बढ़ी तो एक्सरे कराया। एक्सरे रिपोर्ट फिर खराब आई है। इसमें निमोनिया के सफेद धब्बे नजर आए।

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि टूथ ब्रश सरीखा सामान बदल देना चाहिए। तौलिया और दूसरे कपड़े इस्तेमाल करने के पहले खौलते पानी में कुछ देर डाले रहे। इसके बाद उनका इस्तेमाल करें।
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कानपुर: हैलट में घिसट रहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट, अजीब है वार्ड-50 की कहानी

कोरोना की दूसरी लहर में हायतौबा मची है। तीसरी लहर और खतरनाक बताई जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सुविधाएं बढ़ाने के लिए जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का ड्रीम प्रोजेक्ट हैलट का वार्ड-50 तीन साल बाद भी चालू नहीं कराया जा सका है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री बनते ही इसे शुरू कराने की पहल की थी।

उसके बाद प्रस्ताव दर प्रस्ताव भेजे जाते रहे, पिछले साल 17 करोड़ रुपये भी मिले, लेकिन वार्ड का ताला नहीं खुल सका। 50 कमरों वाला यह वार्ड शुरू हो जाता तो कोरोना काल में कम से कम 100 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था रहती। हैलट परिसर स्थित वार्ड-50 की कहानी बड़ी अजीब है।

अच्छे-खासे वार्ड को 20 साल पहले बंद कर दिया गया था। प्राइवेट अस्पतालों से भी अच्छे किसी होटल के सुईट की तरह इसके कमरे थे। चार्ज भी बहुत कम लिया जाता था। सेवानिवृत्त डॉक्टर नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि नर्सिंगहोमों के चक्कर में यह वार्ड बंद हुआ था।

कम पैसों में ज्यादा सुविधाओं की वजह से लोग इसे ही पसंद करते थे। इसके कमरे इतने बड़े हैं कि एक साथ दो मरीजों को भर्ती किया जा सकता है। लेकिन, जब भी इसे शुरू कराने की कोशिश हुई तो अड़ंगा लगा दिया गया। डॉ. हर्षवर्धन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पुरातन छात्र हैं।
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कानपुर: संक्रमित घटने के साथ ही ऑक्सीजन की मांग 50 प्रतिशत घटी

जैसे-जैसे संक्रमित मरीजों की संख्या कम हो रही है, ऑक्सीजन की मांग में भी गिरावट आई है। तीन दिन में 50 प्रतिशत मांग घटी है। दादा नगर स्थित चमन गैस प्लांट के प्रबंधक संदीप अरोड़ा के अनुसार पूर्व में प्लांट से 500 से 700 सिलिंडर प्रतिदिन भरे जा रहे थे। अब 200 से 250 ही रिफिल हो रहे हैं।

फजलगंज स्थित बब्बर ऑक्सीजन प्लांट के प्रबंधक सुमित बब्बर के अनुसार तीन-चार दिन पहले तक रोज 1000 से 1200 सिलिंडर रिफिल किए जा रहे थे। सोमवार को 50 प्रतिशत कम रिफिलिंग हुई। लोहिया चौराहा स्थित हरिओम गैस प्लांट, पनकी गैस प्लांट व मुरारी ऑक्सीजन प्लांट में भी ऑक्सीजन की डिमांड आधी हो गई है।

हालांकि, सिलिंडर आसानी से अभी भी नहीं मिल रहा है। प्रबंधकों के अनुसार पूर्व में सिक्योरिटी मनी जमा कर जो सिलिंडर गए थे, उन्हें लोगों ने बुरे वक्त में जरूरत के लिए अपने पास रोक लिया है। इस वजह से समस्या हो रही है।

पोर्ट की मरम्मत हुई, पर कर्मचारी नहीं
दादानगर स्थित पनकी ऑक्सीजन प्लांट में 30 अप्रैल की सुबह  सिलिंडर फटने से एक पोर्ट क्षतिग्रस्त हो गया था। घटना में कर्मचारी मर्दनपुर निवासी मुराद अली की मौत हो गई थी। एक सप्ताह बाद पोर्ट की मरम्मत तो हो गई लेकिन कुशल कर्मचारी न मिलने से अभी भी इससे वितरण नहीं शुरू हो सका है। एक पोर्ट से ही सिलिंडर भरे जा रहे हैं।
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कानपुर: औद्योगिक इकाइयों में बनेंगे आइसोलेशन कक्ष, 100 से अधिक कर्मचारियों वाली इकाइयों में होगी व्यवस्था

उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की औद्योगिक इकाइयों में आइसोलेशन कक्ष बनेंगे। यहां काम करने वाले कर्मचारियों को प्राथमिक इलाज दिया जाएगा। तीन से चार घंटे तक ऑक्सीजन देने की भी व्यवस्था होगी। यह सुविधा 100 से अधिक कर्मचारियों वाली 16 इकाइयों में शुरू होगी। 

यूपीसीडा के उद्यमियों ने अपने कर्मचारियों, मजदूरों को सुरक्षित रखने के लिए इकाई में आइसोलेशन कक्ष बनाने का निर्णय लिया है। यहां दो से तीन ऑक्सीजन बेड, ऑक्सीमटर, थर्मल स्कैनिंग, सैनिटाइजर और कुछ प्राथमिक दवाइयां उपलब्ध होंगी। कानपुर समेत 16 औद्योगिक क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।

यहां पर एक कक्ष में 5 से 6 बेड लगाए जा रहे हैं। अगर कोई कर्मचारी संदिग्ध मिलता है तो उसे आइसोलेट किया जाएगा। स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। बाद में 50 कर्मचारी वाली इकाइयों में भी आइसोलेशन कक्षा स्थापित किए जाएंगे। यूपीसीडी के सीईओ मयूर महेश्वरी ने बताया सभी बड़ी इकाइयों को मिलाकर करीब एक हजार बेड की व्यवस्था की गई है। इसके साथ कर्मचारियों को जांच के बाद ही प्रवेश के निर्देश दिए गए हैं।
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