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यूपी चुनाव: संभावित प्रत्याशियों की सूची पर भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष, पार्टी में आंतरिक कलह तेज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 22 Jan 2022 12:16 AM IST

सार

यूपी विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के लिए भाजपा के संभावित प्रत्याशियों की सूची सामने आते ही कई क्षेत्रों से विरोध भरी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। इनमें वे सीटें शामिल हैं, जहां पर पार्टी ने विधायकों के टिकट काटकर दूसरों को प्रत्याशी बनाया है। जिसके कारण कार्यकर्ताओं में पैदा हो रहा असंतोष पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है। 
 संभावित प्रत्याशियों की सूची पर भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष
 संभावित प्रत्याशियों की सूची पर भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भाजपा ने विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के लिए प्रत्याशियों की अधिकृत सूची भले ही जारी न की हो, लेकिन संभावित नाम सामने आते ही कई क्षेत्रों से विरोध भरी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। इनमें वे सीटें शामिल हैं, जहां पर पार्टी ने विधायकों के टिकट काटकर दूसरों को प्रत्याशी बनाया है।
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बिल्हौर सीट से विधायक भगवती प्रसाद सागर के सपा में जाने के बाद भाजपा ने यहां से अनुसूचित मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष राहुल बच्चा सोनकर को संभावित प्रत्याशियों की सूची में शामिल किया है।

 

इस पर कहा जा रहा है कि हमेशा की तरह इस बार भी बिल्हौर को स्थानीय प्रत्याशी नहीं दिया गया है। जातिगत आधार पर भी पार्टी के अंदर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कहा जा रहा है कि बिल्हौर में सोनकर बिरादरी के मतदाताओं की संख्या कम है।

 

यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी ने पहले तय किया था कि जिस बिरादरी के विधायक का टिकट कटेगा, वहां उसी बिरादरी के किसी कार्यकर्ता को चुनाव लड़ाया जाएगा। भगवती प्रसाद सागर धोबी समाज से आते हैं, जबकि संभावित प्रत्याशी सोनकर बिरादरी का है।

 

इसी तरह रसूलाबाद सीट पर भी भाजपा ने वर्तमान विधायक निर्मला संखवार का टिकट काट दिया है। यहां पर उनकी जगह पूनम संखवार को पार्टी ने संभावित प्रत्याशी बनाया है। पार्टी के अंदर इस बात की चर्चा है कि जिसे संभावित प्रत्याशी तय किया गया है, वह पिछले दिनों हुए जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पराजित हुई है।

 

कहा जा रहा है कि जो जिला पंचायत सदस्य का चुनाव नहीं जीत सका, पार्टी ने उसे विधानसभा चुनाव लड़ाने का कैसे मन बना लिया। कई अन्य सीटों पर विधायकों के रहते हुए पार्टी ने कार्यकर्ताओं को अपनी दावेदारी करने के संकेत दिए थे। इसकी वजह से कई कार्यकर्ताओं ने अपनी दावेदारी पेश की थी।

 

अब पार्टी ने फैसला लिया है कि विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ाया जाएगा। ऐसे में दावेदारी करने वाले पार्टी कार्यकर्ता कह रहे हैं कि जब विधायकों को ही टिकट देना था तो उन्हें ऐसे संकेत क्यों दिए गए।

 

चर्चा है कि पार्टी जैसे ही प्रत्याशियों की अधिकृत सूची जारी करेगी, कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं का विरोध भी सामने आ सकता है। ऐसे में पार्टी के सामने एक नई मुश्किल खड़ी हो सकती है।

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