उन्नाव: छुट्टा मवेशियों ने बर्बाद की फसल, किसान ने दी जान, पत्नी ने बताई ये बात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 25 Aug 2020 10:42 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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उन्नाव जिले में औरास थाना क्षेत्र के पुरथ्यावां गांव में छुट्टा मवेशियों द्वारा धान की फसल नष्ट करने से आहत किसान ने फंदे से लटककर जान दे दी। पत्नी के अनुसार आर्थिक संकट के बीच बीमारी से जूझ रहे पति फसल नष्ट होने से बेहद परेशान थे। जिस पर उन्होंने आत्महत्या की है। पुलिस घटना की तफ्तीश कर रही है।
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औरास थाना क्षेत्र के पुरथ्यांवा गांव निवासी किसान रामचंद्र (42) 10 बिस्वा खेती के अलावा मजदूरी कर परिवार का गुजारा चलाता था। लॉकडाउन में काम न मिलने से वह आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। पत्नी सुंदरी के अनुसार 10 बिस्वा खेत में उन्होंने धान की फसल बोई थी। जिसे एक सप्ताह के अंतराल में छुट्टा मवेशियों ने नष्ट कर दिया।


15 दिन पहले से बुखार आने से परेशान पति फसल नष्ट होना बर्दाश्त नहीं कर पाए और सोमवार शाम परिजनों की गैरमौजूदगी में घर के अंदर छप्पर में फंदा लगाकर जान दे दी। पत्नी ने बताया कि घटना के वक्त वह बच्चों के साथ खेत में मवेशियों को चारा लेने गई थी। बड़ी बेटी नेहा किसी काम से पड़ोसी के घर गई थी। घर लौटी तो पिता का शव लटका देखा।

बेटी के जानकारी देने पर वह भी खेत से घर पहुंची। सूचना पर पहुंचे एसओ राजबहादुर ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसओ ने बताया कि मृतक के चचेरे भाई ने बीमारी से ऊबकर रामचंद्र के आत्महत्या करने की तहरीर दी है। पत्नी सुंदरी ने छुट्टा मवेशियों द्वारा फसल नष्ट करने से रामचंद्र के परेशान होने की भी जानकारी दी है। घटना की जांच की जा रही है।

रामचंद्र की मौत से गहराया जीविका का संकट
रामचंद्र की मौत से पत्नी सुंदरी बेटे धीरज (17) नीरज (13) सूरज (8) सोनू (5) और बेटियों में नेहा (18) व पूनम (16) का रो-रोकर बुरा हाल है। बिलख रही पत्नी ने बताया कि पति पर ही परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी। उसकी मौत के बाद रोजी-रोजी का संकट गहरा गया है।  

नहीं मिल पाया सरकारी योजनाओं का लाभ
मृतक रामचंद्र की पत्नी सुंदरी के अनुसार कोटेदार से राशन मिलने के अलावा किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला। आर्थिक तंगी और बीमारी से जूझ रहे रामचंद्र को न तो शौचालय का लाभ मिला और न ही प्रधानमंत्री आवास योजना का। यहां तक कि पति का मनरेगा जॉब कार्ड भी नहीं बना था। पति ने इसके लिए कई बार आवेदन भी किया था।

ग्राम पंचायत सचिव का दावा, पात्रता सूची में था नाम
ग्राम पंचायत सचिव शुभम वर्मा ने बताया प्रधानमंत्री आवास के लिए रामचंद्र का नाम पात्रता सूची में भेजा गया था। इस बार शौचालय आने पर उसको शौचालय भी दिया जाता। बताया कि परिवार को आर्थिक मदद का सहयोग कराया जाएगा।

बोले एसडीएम
एसडीएम हसनगंज प्रदीप वर्मा ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। प्रधानमंत्री आवास के लिए मृतक रामचंद्र का नाम पात्रता सूची में था या नहीं इसकी जांच करा परिवार के लिए जो भी आर्थिक मदद व सरकारी योजना का लाभ संभावित होगा उसका लाभ दिलाया जाएगा। मवेशियों द्वारा फसल नष्ट करने की भी जांच कराई जाएगी।
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