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बुंदेलखंड पैकेज के कामों में डाकुओं की नजर टेढ़ी

Updated Sun, 04 Jun 2017 10:23 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जिले में सरकारी निर्माण काम में डकैतों के हस्तक्षेप से कई योजनाएं अधर में पड़ी हैं। जिसमें बुंदेलखंड पैकेज से खुदने वाले कूप एक उदाहरण हैं। पांच साल पहले केंद्र सरकार की योजना में लघु सिंचाई विभाग कुल 1770 कूपों में अभी इनकी पूरी खुदाई नहीं करा पाया है। आज भी 600 कूप अधूरे पड़े हैं। विभागीय अधिकारी इसके लिए शासन से बजट न मिलने के साथ ही डकैतों का अडंगा भी मानते हैं।
बारिश के पानी का संचयन करने और इसका लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं चलाई। सूखे से कराह रहे बुंदेलखंड के लिए वर्ष 2012-13 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज से कुल 1770 कूप खुदाई की स्वीकृति दी थी। इसका काम जिले में लघु सिंचाई विभाग को सौंपा गया है। आज हालत यह है कि पांच साल बाद भी योजना पूरी नहीं हुई और लगभग 600 कूप खुदना बाकी हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं लेकिन देरी होने का सबसे प्रमुख कारण डकैतों का हस्तक्षेप ही माना जाता है। शनिवार को मानिकपुर के सकरौंहा गांव में इसी योजना के तहत बन रहे कूप खुदाई के दौरान पहुंचा कुख्यात इनामी डाकू बबुली कोल गैंग ने रंगदारी मांगी। मेठ को पीटकर रंगदारी पहुंचाने को कहा जिससे वहां मौजूद मजदूर भी काम छोड़ भाग निकले।

इसके बाद से लघु सिंचाई विभाग के अधिकारी व निर्माण काम में लगे मेठ ने बताया कि डकैतों के हस्तक्षेप से ही कई बार पाठा क्षेत्र में कूप खुदाई का काम शुरु होने के बाद बंद हो चुका है। किसी तरह सकरौंहा का काम शुरु हुआ था लेकिन अब डकैतों द्वारा पिटाई करने के बाद माहौल फिर बिगड़ा है। अब यह काम कब शुरू होगा किसी को नहीं पता।

बजट की कमी व डकैतों का भय
चित्रकूट। लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अवनीश कुमार ने बताया कि एक कूप के लिए शासन तीन लाख 15 हजार का स्टीमेट पास करती है। ऐसे में जिले को मिले लक्ष्य में लगभग 65 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। 600 कूप खुदाई शेष है। कई बार काम बंद होने के सवाल पर कहा कि शासन इसका पूरा बजट नहीं दे रहा है। जिससे कुछ काम शुरू होने के बाद बंद करना पड़ता है। पाठा क्षेत्र में तो काम डाकुओं के भय से शुरू होते ही बंद हो जाता है। मेठ या अन्य लोग काम कराने के पहले डकैतों के भय की बात करते हैं। यह सही है कि कई बार कूप खुदाई के दौरान डकैतों ने धावा बोलकर मजदूरों को पीटा और रंगदारी मांगी है। जिसकी समय-समय पर पुलिस से शिकायत कर पुलिस सुरक्षा में भी काम कराया गया है।

क्या है योजना
चित्रकूट। इस योजना में सरकार की मंशा है कि जिन खेतों में कूप होगा तो उसमें एकत्र बारिश का प्रयोग खेती में कर सकेंगे। इसीलिए बारिश के पूर्व इन कूपों की खुदाई कराई जाती है ताकि बारिश के पानी का संचय हो सके। इसके लिए सरकार जो किसान अपने खेत में कूप खुदवाने की सहमति देता है उसमें सरकारी बजट से खुदाई कराती है। इस कूप के पानी के प्रयोग का अधिकार सबसे पहले उसी खेत मालिक को ही रहता है। निर्माण के बाद यह कूप का स्वामी खेत स्वामी ही हो जाता है।
:- डाकुओं के भय के कारण ही पांच साल से नहीं खुदे 600 कूप
:- बजट मिलने पर काम शुरु किया तो डकैत मांगते रंगदारी

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