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सीएसजेएमयू: 40 प्रतिशत छात्रों के 55 प्रतिशत से भी कम अंक, अधर में लटका सैकड़ों छात्रों का कॅरियर

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 24 Aug 2019 02:08 PM IST
सीएसजेएमयू (प्रतीकात्मक तस्वीर )
सीएसजेएमयू (प्रतीकात्मक तस्वीर ) - फोटो : गूगल
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कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के उलझे नियमों से सैकड़ों छात्रों का कॅरियर अधर में लटक गया है। यहां सेमेस्टर सिस्टम से चलने वाले स्नातक और परास्नातक कोर्स में करीब 40 फीसद छात्र ऐसे हैं जिनके मार्क्स 55 प्रतिशत से कम हैं। अधिकतर परीक्षाओं में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों की बाध्यता होती है, ऐसे में ये छात्र परेशान हैं। इनका कहना है कि इससे अच्छा फेल हो गए होते तो बैक पेपर भरने का मौका मिलता। इनमें से ज्यादातर छात्र एमएससी बायोटेक्नोलॉजी, एमएससी केमिस्ट्री, एमएससी बायोलॉजी, एमएससी माइक्रोबायोलॉजी जैसे परास्नातक पाठ्यक्रमों के हैं।
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विवि में संचालित सेमेस्टर पाठ्यक्रमों के कोर्सों में पढ़ने वाले छात्र अगर फेल हो जाते हैं तो उन्हें बैक पेपर भरने का मौका मिलता है। यदि छात्र पास है और उसके नंबर कम हैं तो विवि के नियमों के अनुसार वह बैक पेपर और इंप्रूवमेंट परीक्षा नहीं दे सकता है। बता दें कि सेमेस्टर पाठ्यक्रमों को छोड़कर अन्य कोर्सों में अगर छात्र के किसी विषय में कम अंक आए हैं और वह मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं है तो वह दोबारा उसी विषय की इंप्रूवमेंट परीक्षा देकर अच्छे अंक पा सकता है। ऐसे में इन सेमेस्टर छात्रों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। छात्रों का कहना है उन्हें अपने अंक प्रतिशत सुधारने के लिए इंप्रूवमेंट परीक्षा देने का मौका मिलना चाहिए।

मूल्यांकन पर छात्रों ने खड़े किए सवाल
छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन दोयम दर्जे का होता है। इन दिनों विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को कम मॉर्क्स देकर यह दिखाने की कोशिश में जुटा है कि परीक्षा में काफी सख्ती हुई है जबकि हकीकत है कि इसका केवल नुकसान पढ़ाई करने वाले छात्रों को हुआ है। ऐसे छात्रों की उत्तरपुस्तिकाएं बेहद गलत ढंग से जांची गई है। सबको एक समान अंक दे दिए गए।
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