सीएए विरोध: तकरीरों में वीडियो दिखा तैयार कर रहे थे नफरत की जमीन, बड़ा खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 01 Feb 2020 08:58 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में 20-21 दिसंबर को हुई हिंसा से पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सदस्यों ने दर्जनों बैठकें की थीं। पकड़े गए पीएफआई के पांचों सदस्यों के मोबाइल फोन में सौ से ज्यादा वीडियो मिले हैं, जिसमें मुस्लिमों पर अत्याचार के बारे में दिखाया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी तकरीरों में यही वीडियो दिखाकर लोगों को विरोध प्रदर्शन और हिंसा के लिए तैयार रहे थे।
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कानपुर के बाबूपुरवा और यतीमखाना हिंसा की जांच कर रही एसआईटी के अफसरों के मुताबिक आरोपियों में लेबर कॉलोनी फहीमाबाद निवासी सैयद अब्दुल हई हाशमी, बजरिया के रामबाग कॉलोनी निवासी मोहम्मद उमर और बड़ा कुरियाना अनवरगंज निवासी मोहम्मद वासिफ की हिंसा भड़काने में अहम भूमिका थी। एक मदरसे से रिटायर्ड हाशमी और उमर खुद को मौलाना बताकर तकरीर के नाम पर भीड़ जुटाते थे।

इस दौरान लोगों को मुस्लिमों पर अत्याचार का वीडियो दिखाकर भड़काते थे। मोहम्मद वासिफ खुद को बड़ा पत्रकार बताकर भीड़ को उकसाता था। पूछताछ में सामने आया कि 20-21 दिसंबर को हुई हिंसा से पहले आरोपियों ने शहर भर में घूमकर दस से ज्यादा बैठकें  की थीं।

इनमें पीएफआई और इससे समर्थित संगठनों के दिल्ली, राजस्थान और मुंबई में बैठे बड़े नेताओं से लोगों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए रूबरू करवाया था। अफसरों का कहना है कि ट्रेस होने के डर से आरोपी व्हाट्सएप और वीडियो कॉलिंग से बातचीत कर रहे थे। इनके फोन में दर्जनों चैट मिले जो प्रतिबंधित संगठनों और देश विरोधी गतिविधियों को हवा देने वाले नेताओं से किए गए हैं।

एटीएस के इनपुट पर लखनऊ से शुरू हुई धरपकड़
हिंसा के बाद से एटीएस पीएफआई की गतिविधियों पर नजर बनाए थीं। लखनऊ पुलिस ने 20 दिसंबर को पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद को गिरफ्तार किया। इसके बाद प्रदेश भर में चल रही संगठन की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिली।

24 दिसंबर को लखनऊ में ही पीएफआई के कोषाध्यक्ष बाराबंकी निवासी नदीम और डिवीजन अफसर अशफाक की गिरफ्तारी से कई और अहम जानकारियां मिलीं। एटीएस के इनपुट पर गुरुवार रात लखनऊ पुलिस ने पीएफआई के सक्रिय सदस्य शकीलुर्रहमान, शबी खान और अरशद को गिरफ्तार किया। इस पर कानपुर में चल रही बैठक की जानकारी मिली।

लखनऊ में हुई बैठक में बनी थी रणनीति
सीएए के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों का असर न पड़ता देख गंगा यात्रा में सीएम के कार्यक्रम के दौरान हिंसा करवाने की योजना पीएफआई काफी दिनों से बना रहा था।

इसके  लिए करीब सात दिन पहले लखनऊ में बैठक हुई। इसमें मोहम्मद उमर और सयैद अब्दुल हई हाशमी भी शामिल हुए थे। बैठक में बनी रणनीति के मुताबिक गुरुवार रात बेगमपुरवा में बैठक बुलाई गई थी।
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