‘दारोगा ने नहीं लिया था बयान’

Kanpur Updated Sun, 07 Oct 2012 12:00 PM IST
कानपुर। बेहमई कांड की सुनवाई में शनिवार को अदालत में गवाह से जिरह हुई। इस दौरान गवाह ने कहा कि दारोगा ने उनके बयान नहीं लिए थे और वह अपने बयान पहली बार अदालत में दे रहे हैं। गवाह ने कहा कि फूलन देवी और मुस्तकीम को घटना से पहले वह नहीं जानते थे। दारोगा को उन्होंने यह बयान नहीं दिया था कि गोलियां चलने से पहले ही वह लेट गए थे। अब मामले की सुनवाई 16 अक्तूबर को होगी।
14 फरवरी 1981 को बेहमई में सामूहिक रूप से 22 लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश दस्यु उन्मूलन क्षेत्र/एडीजे 7 रमाबाई नगर महमूद अहमद खान की कोर्ट में चल रही है। शनिवार को बेहमई गांव के वकील सिंह के बयान पर जिरह हुई। अभियुक्तों के अधिवक्ता के सवालों पर वकील सिंह ने कहा कि दारोगा ने उनका बयान नहीं लिया था। घटना के 2 घंटे बाद हम लोग अस्पताल चले गए थे। घायलों को बैलगाड़ियों से ले जाया गया था। मुझे नहीं मालूम कि 20 साल से मुकदमे की पैरवी राजाराम कर रहे हैं। घटना से पहले मैं शिवनाथ के यहां हंसिया नहीं बल्कि बैलगाड़ी बनवाने गया था। अगर दारोगा ने मेरे बयान में यह लिखा है तो मुझे नहीं मालूम। डकैतों के जाने के बाद मैं उठा और वहां से चला गया और उनवा में जाकर रुका, यह गलत है। दारोगा ने अगर मेरे बयान में यह बात लिखी है तो वजह नहीं बता सकता। बाबूराम, बालादीन और रामकेश को घटना से पहले नहीं देखा था। राम सिंह किस गांव का रहने वाला है, पता नहीं। मैंने दारोगा जी को यह नहीं बताया था कि घटना से पहले ही जमीन पर लेट गया था। वकील सिंह की तरफ से अधिवक्ता विजय नारायण सिंह सेंगर, रजनीश कुमार, महेंद्र सिंह परमार ने और अभियुक्तों की तरफ से अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे ने पैरवी की।

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