‘प्रेम दिल में रखें, शब्दों में नहीं’

Kanpur Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। ‘ज्ञान को समझना ही सबसे बड़ी ताकत है। ज्ञान को आदत में डालने से ही मस्तिष्क का संतुलन बनता है और जब संतुलन बनता है तब मनुष्य भगवान से भावना पूर्वक रिश्ता जोड़ पाता है। बुद्धि लगाने पर भगवान नहीं मिलते। जब मनुष्य की भावना इतनी बढ़ जाए कि उसे पत्थर की जगह भगवान दिखाई देने लगे तो समझो उसका कल्याण हो गया’। यह दिव्य विचार परमपूज्य सुधांशु जी महाराज ने अपने प्रवचन में व्यक्त किए।
विश्व जागृति मिशन के तत्वावधान में गुरुवार को फूलबाग मैदान में हुए प्रवचन कार्यक्रम के पहले दिन उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपना चेहरा मुस्कराहट और उत्साह से भरा रखना चाहिए। प्रेम दिल में रखना चाहिए, लफ्जों में नहीं और कड़ुवाहट शब्दों में रखनी चाहिए दिल में नहीं। अगर दिल में लोगों के लिए अनंत प्रेम रखें तो आपके शब्दों में कभी कड़ुवाहट नहीं होगी। कभी किसी से रूठे नहीं बल्कि उससे प्रेम करें। इन बातों को अमल करेंगे तो आपको ईश्वर के समीप जाने का रास्ता मिलेगा। जिस तरह स्वदिष्ट खाना बनाने की रिसेपी की किताब होती है, ठीक उसी तरह इन बातों को अमल करने पर भगवान से जुड़ने का रास्ता मिलता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य भगवान का जप 20 गुरियों (माला) तक तो करता है लेकिन इसके बाद दुनियादारी में उलझ जाता है। इतनी देर में उसकी माला पूरी हो जाती है। अब भला आप ही बताइये ऐसे में वह कितनी देर भगवान से जुड़ा। जबकि उसे नहीं पता कि माला ही भगवान तक पहुंचने की सीढ़ी है, इसलिए सीढ़ी संभलकर चढ़ें।


30 तक बहेगी प्रवचन की गंगा
सुबह 8.30 से 11 बजे तक
शाम 5 से 7 बजे तक होगा

जीवन के सूत्र
समय का सदुपयोग करें, यह जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होता है
प्रार्थना करने बैठें तो भगवान से यही कहेें कि सब तेरी कृपा से हो रहा है
कर्मयोगी बनकर जियें, हमेशा कर्म को प्रधानता दें
भावना पूर्वक भगवान को एक फूल रोजाना चढ़ाएं
हमेशा आनंदित होने की आदत बनाएं, यहीं सबसे उत्तम सुख है

ऐसे करें खुद को सहज
सुबह और शाम को एक बार 10 मिनट के लिए एकांत में जरूर बैठें। उस समय सिर्फ ओंकार या बांसुरी की धुन को सुनने का प्रयास करें। उस समय आपका मन शांत और आनंदित हो जाएगा।

भक्त बोले
सुधांशु जी महाराज का प्रवचन पिछले 2 वर्ष से सुन रहा हूं। उनका प्रवचन सुनने के बाद ही शांत होने का तरीका मिला और मेरा जीवन सही मार्ग पर आया।
संजय सरावगी, व्यापारी

मुझे बहुत गुस्सा आता था लेकिन पिछले 5 वर्ष से मैं इनका प्रवचन सुन रही हूं। अब गुस्से पर नियंत्रण है। दूसरों की गलतियां ढूंढने की जगह अपनी गलतियां ढूंढती हूं।
-मेघना, स्टूडेंट

पहले अक्सर मेरे कार्यों में लापरवाही होती थी लेकिन महाराज जी के प्रवचन से सुधार हुआ। मैं 5 वर्ष से उनको सुन रही हूं। उन्हीं से समय का उपयोग जाना।
-प्रियंका पांडेय, अर्मापुर

पहले मैं सोचता था कि मेरे जीवन में सब कुछ है पर महाराज जी से जुड़ने पर पता चला कि कुछ भी नहीं है। आज मेरे भीतर आध्यात्मिकता काफी बढ़ी है।
-बैजनाथ, रिटायर्ड टीचर, गोरखपुर

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