पुलिस के लाठीचार्ज से बिगड़े हालात

Kanpur Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। पुलिस हेकड़ी की वजह से पनकी मंदिर में हालात बिगड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के समय मंदिर में हजारों भक्त जमा थे। उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को धैर्य से काम लेना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय पुलिसवालों ने लाठियां चलाना शुरू कर दिया। इसके बाद भगदड़ मच गई और हालात बिगड़ गए।
उर्सला में भर्ती इटावा निवासी सलमान ने बताया कि गांव के 70 लोग जत्था बनाकर पनकी मंदिर दर्शन के लिए आए थे। रात करीब दो बजे पनकी स्टेशन की ओर से कतार में खड़े हुए। थोड़ी देर ही हुई थी कि मंदिर से भागते हुए कुछ लोग बाहर आए। बोले, भागो पुलिस लाठी चला रही है। इसके बाद कतार में लगे लोग उल्टी तरफ भागने लगे। बाहर मौजूद पुलिसवालों ने भी भीड़ को संभालने लाठियां चलाना शुरू कर दिया। इसके बाद तो हालात बेकाबू हो गए। लोग गिरते-पड़ते भागने लगे। इस दौरान मेरे जैसे कई लोग गिर गए और लोग हमें रौंदते हुए निकल गए।
दुकानदार अजित कुमार ने बताया कि वह दुकान पर भक्तों को प्रसाद बेचने में व्यस्त थे। अचानक देखा कि पुलिस ने भीड़ पर लाठियां चलाना शुरू कर दीं। देखते ही देखते भीड़ का रैला उनकी पूरी दुकान को उजाड़ता हुआ निकल गया। मंदिर केबाहर चाऊमीन का ठेला लगाने वाली सुदामा का कहना है कि सब पुलिस वालों की वजह से हुआ। न वो लोग लाठी चलाते और न ही हादसा होता। एक अन्य दुकानदार रेखा के मुताबिक पुलिस जिस बर्बरता से पुलिस लाठियां बरसा रही थी उसे देखकर नहीं लग रहा था कि आज जीवित बचूंगी। जो जहां मिला उसकी वहीं पिटाई। पुलिस से बचने के लिए मेरा भाई श्यामू बेंच के नीचे छिपा। पर पुलिस ने उसे खींच कर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। हाथ-पैर जोड़े तब पुलिसवालों ने बख्शा।



जिम्मेदार बोले--
मै मंदिर के गर्भगृह में गया जरूर था। पर, न तो मैंने न ही मातहतों ने श्रद्धालुओं केसाथ किसी तरह की बदसलूकी नहीं की। लाठीचार्ज तो दूर की बात है। पट खुलने के बाद पहले दर्शन करने की होड़ में श्रद्धालुओं में धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद भगदड़ मच गई थी। इसमें पुलिसकर्मियों का कोई कसूर नहीं है। राजेश कुमार यादव, सीओ कल्याणपुर
----
लाठीचार्ज से भगदड़ मचने की जानकारी नहीं है। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जा रही है। एक सप्ताह में रिपोर्ट आएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एमपी अग्रवाल, डीएम
--


खामियां तो कई थीं
मंदिर में 40 सुरक्षा कर्मचारी है, लेकिन हादसे से समय सब नदारद थे। मंदिर परिसर के आसपास लगी अवैध दुकानों और पार्किगिं को नहीं हटाया गया। वीआईपी लोगों को दर्शन कराने की अलग से व्यवस्था की गई। मंदिर प्रबंधन की ओर से लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को पुलिस ने अपने कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया। पुलिस वालों को ड्यूटी कार्ड बांट दिए गए, पर अफसरों द्वारा ब्रीफिंग नहीं की गई। न ही स्थिति का जायजा लेने वाले अफसर यह तय कर सके कि व्यवहार के अनरूप पुलिसकर्मियों की ड्यूटी कहां लगाई जाए। अप्रिय घटना होने पर घायलों के इलाज के भी पुख्ता इंतजाम नहीं थे। न तो मेडिकल कैंप लगाए गए थे और न ही जीवन रक्षक दवाओं में व्यवस्था की गई थी। चिकित्सा व्यवस्था के नाम पर केवल एक एम्बुलेंस और एक डॉक्टर थे। वह भी घटना के वक्त एम्बुलेंस के भीतर सो रहे थे।
--

Spotlight

Most Read

Kushinagar

गंदगी के बीच खड़ा होकर पकड़ना पड़ता बस

पडरौना। यात्री प्रतीक्षालय ऐसा कि वहां पर बैठकर इंतजार नहीं किया जा सकता। गंदगी चारों तरफ फैली रहती है, जिससे वहां पर खड़ा होना मुश्किल रहता है। गंदगी के बीच ही खड़ा होकर लोगों को बस पकड़ना पड़ता है।

20 जनवरी 2018

Related Videos

कानपुर में बड़ा हादसा, मिट्टी में दबने से दो मजदूरों की मौत

शनिवार का दिन कानपुर के इन मजदूरों के लिए काल बनकर आया। दो मजदूरों की मौत तब हो गई जब वे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट की खुदाई कर रहे थे। वहीं तीन मजदूर बुरी तरह घायल हैं।

20 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper