एमए के 20,000 स्टूडेंट का रिजल्ट फंसा

Kanpur Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। कापी जांचने का कोटा निर्धारित होने से व्यक्तिगत परीक्षा 2011-12 की एमए समाजशास्त्र के 20,000 से ज्यादा स्टूडेंट का रिजल्ट फंस गया है। इनकी कापियां नहीं जांची जा सकी हैं। इसे लेकर स्टूडेंट परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि एक पेपर का रिजल्ट अनकंप्लीट रहता है तो बैक पेपर फार्म नहीं भर सकेंगे। इसकी आखिरी तारीख 30 सितंबर है। 10, 11 अक्टूबर को बैक पेपर होने हैं। इससे वंचित होने का खतरा बना हुआ है।
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय की व्यक्तिगत परीक्षा की कापी जांचने वाले टीचर्स का कोटा निर्धारित कर दिया गया है। वह 40 हजार रुपये से ज्यादा की कापियां नहीं जांच सकते हैं। इसके बावजूद कुछ टीचर्स ने 1.50 लाख रुपये की कापी जांच डाली है। अब उनका भुगतान लटक गया है। इससे नाराज होकर ही डिग्री टीचर्स ने कापी जांचने से इंकार कर दिया। कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) के अध्यक्ष डा. आरके सिंह और डा. देवेंद्र अवस्थी ने बताया कि पहले कापी जंचवाई गई। अब पारिश्रमिक देने से इंकार किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में एमए समाजशास्त्र की कापियां नहीं जांची जा सकती हैं। वहीं, कुल सचिव सैय्यद वकार हुसैन का कहना है कि समाजशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी की कापी जांचने का कोटा बढ़ाने का पत्र शासन को भेजा जा चुका है। अनुमति मिलते ही अतिरिक्त धनराशि का भुगतान किया जाएगा। साथ ही कापी जंचवाकर परीक्षा परिणाम जारी किए जाएंगे।

Spotlight

Most Read

Nainital

नैनीताल के किसी भी वार्ड में अब नहीं रहेगा अधियारा

नैनीताल के किसी भी वार्ड में अब नहीं रहेगा अधियारा

19 जनवरी 2018

Related Videos

जिन्होंने मथुरा और गोरखपुर में काम रोक दिए वो हज सब्सिडी क्या देंगे: अखिलेश यादव

गुरुवार को औरैया पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर जमकर बरसे। पूर्व सीएम पार्टी कार्यकर्ता की मृत्यु पर शोक संवेदना व्यक्त करने आये थे।

19 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper