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‘बुढ़ापे की लाठी’ पिता पर ही बरस रही

Kanpur Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। ‘जिसे बड़े नाजों से पाल-पोसकर बड़ा किया, वहीं अब आंखें दिखाता है’। ये बातें कहते हुए गोविंदनगर लेबर कालोनी के वृद्ध पीएल सहगल (82) फफक पड़े। उम्र के इस पड़ाव में शरीर साथ देता नहीं है। कहते हैं, जिंदगी के कुछ पल बचे हैं लेकिन बड़ा बेटा चैन से जीने नहीं दे रहा है। कालोनी के कमरे में बेटे का कब्जा है। छत टपकने लगी है। कभी भी गिर सकती है। कमरा खाली करने के बदले पांच लाख रुपये मांग रहा है।
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1990 में एयरफोर्स से रिटायर हुए श्री सहगल का कहना है पत्नी शीला देवी की 1991 में मौत के बाद उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दोनों बेटे सुनील कुमार और हरीश उनके साथ रहते थे। बड़ा बेटा सुनील रतनलाल बैंक आफ इंडिया में अच्छे पद पर है। अच्छा वेतन है और अपना मकान भी है। उसके बाद भी उनकी कालोनी के कमरे में कब्जा जमाए बैठा है। छोटा बेटा गुमटी में प्राइवेट नौकरी करता है। उसकी माली हालत भी ठीक नहीं है। बड़े बेटे के कब्जे वाले कमरे की छत टपकने लगी है। मरम्मत कराना चाहते हैं लेकिन बेटा कमरा खाली करने के एवज में पांच लाख रुपये मांग रहा है। पहले भी काफी पैसा ले चुका है। अभद्रता, गाली-गलौज करता है। इसकी शिकायत 15 जुलाई 2009 को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कर चुके हैं। घर से बाहर जाने पर निगरानी रखता है, इसलिए पुलिस के पास नहीं जा पाते हैं। कई साल पहले एसपी को चिट्ठी भेजी थी, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।



बुढ़ापे की लाठी है यह कानून

कानपुर। उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 28 अगस्त को फैसला लिया था कि मां-बाप को असहाय छोड़ा या उन्हें प्रताड़ित किया तो संतान को जेल की हवा खानी पड़ेगी। माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियन 2007 कड़ाई से लागू होगा। यह कानून इस मामले में भी लागू होता है।

-माता-पिता को घर से निकालने पर तीन माह की कैद और पांच हजार रुपए तक जुर्माना।
-संपत्ति का बंटवारा होने के बाद भी यदि संतान माता-पिता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाते तो ट्रिब्यूनल में शिकायत हो सकती है।
-संपत्ति हस्तांतरण रद करवाया जा सकता है। हर जिले में एक वृद्धाश्रम भी बनवाया जाएगा।
-देखभाल नहीं करने पर माता-पिता से मिली संपत्ति की रजिस्ट्री होगी रद।
-कानूनी बारिश यदि भरण-पोषण सही तरीके से नहीं करते तो मां-बाप को दस हजार तक भत्ता दिलवाया जा सकता है।
-ट्रिब्यूनल में वकीलों को पैरवी का अधिकार नहीं होगा।
-वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए पुलिस और न्यायिक सेवा के अधिकारियों को खास प्रशिक्षण।

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