शहर में हाहाकार, सो रही सरकार

Kanpur Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। शहर बीमारियों की चपेट में है। चारों तरफ कूड़ा-गंदगी के ढेर सजे हैं। सीवर-नालियां जाम हैं। आवारा जानवर धमा-चौकड़ी मचा रहे हैं। दूषित पानी से संक्रामक रोग फैलने की आशंका है। लेकिन शहर की सरकार सो रही है। डेढ़ महीने बीत गये लेकिन स्थानीय सरकार के नुमाइंदों को जनता की सुध नहीं है। न महापौर और न पार्षदों की टीम शहर के हालात देखने निकल रही है।
कूड़ा-गंदगी
शहर से रोजाना 1200 टन से अधिक कूड़ा निकलता है लेकिन उठान 800 टन से भी कम है। इससे कूड़े का बैकलॉग बढ़ता जा रहा है। यही कूड़ा शहर के नाले-नालियों में भरा है। कहीं-कहीं तो कूड़ा एटूजेड के प्लांट ले जाने के बजाये मैदान में डंप किया जा रहा है। इस कूड़े ने शहर की तस्वीर बिगाड़ दी है।
आवारा जानवर
शहर में छह लाख छुट्टा व आवारा जानवरों का आतंक है और नगर निगम का कैटल कैचिंग दस्ता जानवर पकड़ने के नाम पर खानापूरी कर रहा है। डेढ़ लाख से अधिक सुअर, दो लाख कुत्ते और लगभग ढाई लाख गाय-भैंस व सांड दिनभर धमा-चौकड़ी मचाते हैं। इनसे ट्रैफिक जाम और हादसे हो रहे हैं। जानवर रोजाना राहगीरों पर हमला कर उन्हें लहूलुहान कर रहे हैं। पर नगर निगम का कैटल कैचिंग दस्ता इन पर काबू करने में नाकाम है।
दूषित पानी
शहर में पानी की कमी तो है ही, दूषित पानी की समस्या से भी हर नागरिक जूझ रहा है। रोज 520 एमएलडी पानी की जरूरत है लेकिन सप्लाई 360 एमएलडी है। भैरोघाट पंपिंग स्टेशन से 20 करोड़ लीटर पानी रोज लिया जा रहा है। पानी के अन्य स्त्रोत गंगा बैराज के पंपिंग स्टेशन, गुजैनी वाटर वर्क्स व लोअर गंगा कैनाल हैं लेकिन इनसे भी जरूरत पूरी नहीं हो रही है। लीकेज से पानी की बर्बादी हो रही है सो अलग। न नये हैंडपंप लग रहे हैं न ही रिबोर हो रहे हैं। दूषित पानी की समस्या को लेकर पार्षदों ने सदन में जोरदार हंगामा किया, इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
चोक सीवर
छोटे-बड़े करीब 450 नालों की हालत भी दयनीय है। नालों में कूड़ा भरा है। कहीं सिल्ट निकाली गयी तो किनारे डालकर छोड़ दी गयी। बारिश में यह सिल्ट बहकर फिर नालों में चली गयी। ऐसा तब है जब नालों की सफाई के लिये अफसरों ने सख्ती की थी। वीडियोग्राफी कराई और निरीक्षण में नाले गंदे पाये जाने पर ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। हालांकि, सफाई के बाद से नयी सरकार ने एक बार भी किसी नाले का निरीक्षण नहीं किया।
मार्ग प्रकाश
वीआईपी रोड और मालरोड को छोड़ दें तो 110 वार्ड में शायद ही कोई ऐसी गली, सड़क या मोहल्ला हो जहां मार्ग प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त हो। प्रमुख सड़कों पर लगे खंबों में हर तीसरी लाइट खराब पड़ी है। कई जगह से लाइटें चोरी हो चुकी हैं। पार्षदों की मांग के बावजूद न लाइटें मिलती हैं न मरम्मत होती है।
सड़कें
शहर में 4500 किलोमीटर से अधिक सड़कें हैं जिसमें 3440 किलोमीटर नगर निगम की हैं। इन सड़कों में 90 प्रतिशत की हालत खराब है। सड़कों की मरम्मत के लिये बारिश खत्म होने का इंतजार किया जा रहा है।

दो टूक
महापौर
कैप्टन जगतवीर सिंह द्रोण
-शहर बीमारियों, संक्रामक रोगों और समस्याओं से घिरा है लेकिन आप और पार्षद सक्रिय नहीं दिख रहे।
-समस्या पूरे शहर में नहीं बल्कि उन क्षेत्रों में हैं जो अल्प विकसित हैं। इसमें कई इलाके ऐसे हैं जो केडीए ने विकसित किये हैं लेकिन अभी नगर निगम को स्थानांतरित नहीं हुए हैं। यही वजह है यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके लिये केडीए से बातचीत हुई है। मैं और मेरे सभी पार्षद सक्रिय हैं। मैंने प्रभावित इलाकों का दौरा कर लोगों की समस्याएं सुनी हैं। हमारे डॉक्टरों की टीम बस्तियों में जाकर दवायें बांट रही है।
नगर निगम सफाई-फॉगिंग करने में फेल रहा है। यह इंतजाम पहले हो जाते तो क्या शहर के लोगों को ऐसे हालात का सामना करना पड़ता?
-फॉगिंग के लिये इंतजार नहीं करना चाहिये था। लेकिन उसकी भी अपनी वजह है। हमारे पास संसाधन कम हैं। किसी तरह मैनेज करके काम चल रहे हैं।
जबसे शहर की सरकार गठित हुई है, कोई ऐसा काम हुआ जो जनता के हित में है?
-अभी शहर की सरकार बने मात्र पचास दिन हुए हैं लेकिन इतने कम वक्त में भी बहुत काम हुए हैं। नगर निगम की कार्य संस्कृति सुधरी है। गृहकर की वसूली बढ़ी है। मोहल्लों में कैंप लगाकर जनता की समस्याओं का निस्तारण कराया जा रहा है। कूड़ा उठाया जा रहा है। अवैध कब्जेदारों के खिलाफ अभियान चल रहा है। सबसे खास बात यह है कि सीमित संसाधन में यह काम हो रहे हैं। अभी तो पूरे पांच साल काम करना है। एक साल का वक्त दीजिये। शहर सुधरेगा।

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