एक हजार श्रमिकों के घर लौटेंगी खुशियां -

Kanpur Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। लगभग डेढ़ महीने पहले श्रमिकों को जबरन रिटायर करने के मुद्दे पर हड़ताल के कारण बंद की गई जे.के जूट मिल का ताला आज फिर खुल जाएगा। प्रबंधन ने दावा किया है कि श्रमिकों के साथ सीधी बातचीत हुई और इसके बाद मिल चालू करने पर सहमति बन गई। कोई एक हजार श्रमिकों को दोबारा रोजगार मिलेगा। दूसरी तरफ, मजदूर मोर्चा ने कहा है कि जब तक देनदारियों की बात तय नहीं होती, मिल नहीं चलने देंगे।
16 जुलाई को मिल प्रबंधन की ओर से सौ से ज्यादा श्रमिकों को जबरन रिटायर कर दिया गया था। इस मुद्दे पर भड़के श्रमिक हड़ताल पर चले गए थे। इसे बाद वार्ता के कई दौर चले पर बात नहीं बन पा रही थी। मिल से संबद्ध लगभग सभी श्रमिक यूनियनें इस लड़ाई में कूद पड़ी थीं। इसी के साथ सेवानिवृत्त मजदूरों की ग्रेच्युटी, बकाएदारी, दस फीसदी कटौती के पैसे की वापसी, आज की महंगाई पर वेतन अदायगी आदि मुद्दे भी गरमा गए। इधर, प्रबंधन पर मिल फिर चालू करने का चौतरफा दबाव था। प्रबंधन लगातार श्रमिकों के संपर्क में था। सोमवार को इसी संबंध में बैठक हुई। इसमें कुछ मजदूर नेताओं के साथ आम श्रमिक भी मौजूद थे। तय हुआ कि मिल तत्काल चालू की जाए। कुछ मांगों पर भी सहमति बन गई। यह भी तय हुआ कि मिल चालू होने के बाद हर मुद्दे को वार्ता के जरिए सुलझाया जाएगा। प्रबंधन पक्ष की ओर से दामोदर भट्टर ने बताया कि कि मिल का मेंटिनेंस और साफ सफाई का कार्य मंगलवार से शुरू होगा। एक हफ्ते के भीतर उत्पादन होने लगेगा। उन्होंने दावा किया कि श्रमिकों से बातचीत के बाद कई मुद्दों पर पूरी तरह सहमति बन गई है। पर यह बताने कतरा गए कि सहमति किन मुद्दों पर बनी है।
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यूनियन के बयान :-
मिल में आठ करोड़ का माल तैयार पड़ा है। इसे निकालने के लिए ही यह सब कवायद की गई है। किसी भी यूनियन को वार्ता में शामिल नहीं किया गया। कुछ दलालों को बीच में डालकर सीधे श्रमिकों से बातचीत कर ली गई। जब तक देनदारियों के संबंध में कोई ठोस जवाब नहीं दिया जाएगा, मिल चलने नहीं दी जाएगी। हम हाईकोर्ट जा रहे हैं।
राजू प्रसाद, जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा

मैनेजमेंट श्रमिकों की बकाएदारियों को हथियार बनाए हुए है। उन्हें अच्छी तरह पता है कि अपनी देनदारियों के चक्कर में श्रमिक मजबूरी में काम पर आएगा। आज की महंगाई पर वेतन, रिटायर लोगों की ग्रेच्युटी का भुगतान, दस फीसदी का भुगतान, बोनस व अन्य बकाए पर श्रमिकों को कोई आश्वासन नहीं दिया गया है।
राम प्रकाश राय, जेके जूट मिल मजदूर पंचायत
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चार साल में चार बार बंद हुई
जेके समूह से वर्ष 2008 में मिल हस्तांतरित होने के बाद कोलकाता का सारडा परिवार कभी भी मिल को लगातार कार्यरत नहीं रख पाया। जून 2009, अप्रैल 2010, मार्च 2011 के बाद 16 जुलाई को मिल पर ताला डाला गया। श्रमिक नेता दौलतराम के मुताबिक यहां 100 टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता है। जूट के बोरों की भारी मांग भी है। बावजूद इसके मिल का संचालन सही से नहीं किया जाता। यदि सही नीयत से मिल चलाई जाए तो सभी का भला संभव है।

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