संडे: डॉक्टरों का मजा मरीजों की सजा

Kanpur Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। शहर में वायरल फीवर, डेंगू और अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के बावजूद स्वास्थ्य महकमे ने संडे को छुट्टी का आनंद उठाया। हैलट और उर्सला की ओपीडी बंद रहीं। परेशान मरीज इमरजेंसी पहुंचे तो वहां से भी उन्हें टरका दिया गया। वार्डों में भर्ती मरीज भी इलाज के अभाव में परेशान रहे।
गंदगी और जलभराव की वजह से शहर में पिछले एक हफ्ते के दौरान मच्छरों से होने वाली बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। हालत यह है कि 3 से 7 सितंबर के बीच हैलट और उर्सला की ओपीडी में क्रमश: 12 हजार और नौ हजार से अधिक मरीज दिखाने पहुंचे। इन दोनों ही अस्पतालों में सभी बेड फुल हो चुके हैं। एक-एक बेड पर दो-दो, तीन-तीन मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। यहां भर्ती 50-60 फीसदी मरीज तेज बुखार से पीडि़त हैं। हालात इतने गंभीर होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने संडे को न तो ओपीडी खोलने की जहमत उठाई न ही मरीजों को देखने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की।
परमियापुरवा झोपड़पट्टी निवासी सुमन (25) का इलाज करा रहीं मौसी हीरादेवी और मामी आशा ने बताया कि रविवार को वार्ड में कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। हैलट इमरजेंसी में दोपहर पौने एक बजे स्वरूप नगर घंटाघर निवासी शिवप्रसाद (70) को गंभीर हालत में लाया गया, पर डाक्टरों ने उसे जवाब दे दिया। इस पर बेटा अविनाश कुमार उन्हें दूसरे अस्पताल ले गया। कल्याणपुर खुर्द निवासी रामकुमार (45) को दोपहर में उसके परिजन तेज बुखार के इलाज के लिए लाए, लेकिन डॉॅक्टरों ने टरका दिया। उसकी पत्नी सियादुलारी ने बताया कि नर्सिगिंहोम में इलाज कराने के लिए पैसे नहीं हैं। इस आस में हैलट लाए थे कि यहां चंद रुपयों में इलाज हो जाएगा। पर यहां मना कर दिया गया। यदि ओपीडी खुली होती तो कम से कम इलाज तो शुरू हो जाता। उर्सला इमरजेंसी के एनबी-1 वार्ड के बेड नंबर 19 में भर्ती मूसानगर के राजकुमार (45) और बेड नंबर - 20 पर भर्ती पूरा (बिल्हौर) के साबिर ने बताया कि जलने के कारण उन्हें 7 सितंबर को इमरजेंसी में लाया गया था, तब डाक्टर सुरेंद्र बहादुर ने शुरुआती उपचार के बाद वार्ड में शिफ्ट कर दिया था। लेकिन वार्ड में एक बार भी डाक्टर उन्हें देखने तक नहीं आए। परिवार के लोग ही मरहम लगा रहे हैं। नर्सों से कई बार डाक्टर को बुलाने के लिए आग्रह किया गया, पर सुनवाई नहीं हुई। बेड - 30 पर भर्ती सुतरखाना के शब्बीर (38) ने भी यही शिकायत की। उधर, उर्सला के निदेशक डा.यूसी सिन्हा ने बताया कि तीन दिन से रोगियों का न देखने के मामले में संबंधित डाक्टर से स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। समुचित वजह न हुई तो कार्रवाई की जाएगी।


इतने मरीज पहुंचे
तारीख हैलट उर्सला
3 सितंबर 2513 1873
4 सितंबर 2407 1810
5 सितंबर 2143 1542
6 सितंबर 1810 1393
7 सितंबर 1774 1249
8 सितंबर 1748 1107
नोट - इन दोनों अस्पतालों की ओपीडी में जितने पर्चे बनते हैं, उससे लगभग ढाई गुना मरीज दिखाने पहुंचते हैं। करीब डेढ़ गुने मरीज पुराने पर्चे लेकर इलाज कराने पहुंचते हैं।

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