सूअर और गंदगी फैला न दे महामारी

Kanpur Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। पूर्वांचल में जापानी इंसेफ्लाइटिस रोग के फैलने के एक दशक से भी ज्यादा समय बाद इस रोग ने शहर में भी हमला बोल दिया है। बुधवार को पहली बार कानपुर में जापानी इंसेफ्लाइटिस की रोगी लक्ष्मी का पता चलने पर स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम में भी हड़कंप मच गया है। शहर के ज्यादातर मोहल्लों में सूअरों और फैली गंदगी के कारण इस रोग के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। लक्ष्मी के परिजनों ने भी कभी उसके पूर्वांचल के किसी जिले में कभी जाने की पुष्टि नहीं की है। गौर रहे कि 5 साल पहले बर्रा में जापानी इंसेफ्लाइटिक के 2 मरीज मिले थे लेकिन वे उन्नाव के रहने वाले थे। उस समय इन मरीजों के पूर्वांचल से इस वायरस से ग्रसित होकर आने की बात कही गई थी।

जापानी इंसेफ्लाइटिस गंदगी, मच्छरों और सूअरों के बाड़े वाले इलाकों में फैलता है। यह रोग सबसे पहले जापान में हुआ था, तभी इसका नाम जापानी इंसेफ्लाइटिस पड़ गया। शहर से सूअर बाड़े हटवाए जाएंगे और जलभराव न करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
-डॉ आरपी यादव, सीएमओ

जागरूकता और वैक्सीन के जरिये जापानी इंसेफ्लाइटिस से बचा जा सकता है। साथ ही मच्छरों से बचाव भी बहुत जरूरी है।
डॉ एमएम मैथानी, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ


क्या है जापानी इंसेफ्लाइटिस
जापानी इंसेफ्लाइटिस का मुख्य वाहक फ्लैवीवीरीडे वायरस है। यह ज्यादातर सूअर के बाड़े या तालाब के आसपास रहने वाले पक्षियों में पाया जाता है। इसमें क्यूलेक्स ट्राईटेनियोराइनकस और क्यूलेक्स विश्नुई वायरस की सक्रियता होती है। ज्यादातर यह रोग चीन, कोरिया, जापान, थाईलैंड, मलयेशिया में होता है। यह संक्रामक रोग नहीं है।

ऐसे होता है ये रोग
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ फिजीशियन डा. संतोष कुमार ने बताया कि सूअर में जापानी इंसेफलाइटिस का वायरस पाया जाता है। जब क्यूलेक्स मच्छर सूअर को काटता है तो इसका वायरस मच्छर में पहुंच जाता है और फिर ऐसा संक्रमित मच्छर जब किसी व्यक्ति को काटता है तो उसे यह जानलेवा रोग हो जाता है।

ये हैं लक्षण
बुखार, सिर में दर्द, चक्कर आना, उल्टी, बड़बड़ाना, अर्द्ध मूर्छा फिर कोमा में जाना। पैरालिसिस के बाद मृत्यु भी हो सकती है। समय से इलाज होना जरूरी है क्योंकि इस रोग में मृत्युदर अन्य रोगों की तुलना में ज्यादा है।

ऐसे करें बचाव
- मच्छरदानी का उपयोग करें
- जहां सूअर गंदगी फैला रहे हों, वहां कीटनाशक का छिड़काव करें
- मच्छरों से बचने के लिए क्वाइल, क्रीम समेत अन्य साधनों का प्रयोग करें
- जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसे लक्षण लगें तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें

डेंगू के लक्षण
- पहले अटैक में तेज बुखार के साथ ही शरीर में अकड़न, तेज दर्द, सिर दर्द
- 7 से 10 दिन बाद आने वाले दूसरे अटैक में तीनों तरह के डेंगू (हेंब्रेजिक डेंगू, शॉक डेंगू और रेस्पेरेटरी डेंगू) में कुछ लक्षण कॉमन तो कुछ भिन्न होते हैं
- हेंब्रेजिक डेंगू : शरीर के विभिन्न अंगों से खून निकलना, प्लेटलेट्स घटना
- शॉक डेंगू : ब्लड प्रेशर घट जाता है। लंग्स में इंफेक्शन, शरीर में पानी भरने लगना, सांस की तकलीफ, बेहोश होना, शरीर नीला पड़ने लगना
- रेस्पेरेटरी डेंगू : इसमें शुरुआत में खांसी, जुकाम जैसे दिखते हैं। इसे ह्यूमन एनफ्लूएंजा भी कहते हैं। यह संक्रामक रोग है

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