सरकारी मकान हैं या भ्रष्टाचार की दुकान

Kanpur Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
सरकारी मकानों में धांधली से जुड़े दो मामले सामने आए हैं। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के नवनिर्मित आवासों में घटिया सामान लगा लाखों रुपये अंदर कर लिए गए। नतीजा- ये फ्लैट पहली ही बारिश नहीं झेल पाए और टपकने लगे। डॉक्टरों को एक माह में ही अपना सामान समेट यहां से हटना पड़ा। उधर, रेलवे की सिटी साइड कॉलोनी के जर्जर मकान महकमे के कुछ लोगों की कमाई का जरिया बन गए हैं। कागजों पर खाली इन मकानों में अवैध वेंडरों व अपराधियों ने कब्जा जमा लिया है। इन लोगों का दावा है कि वे यह रहने के ऐवज में विभाग के कुछ लोगों को हर महीने किराया देते हैं।


बनते ही टपकने लगे डॉक्टरों के फ्लैट

मेडिकल कालेज में सीएंडडीएस ने कराया घटिया निर्माण
सीसी सड़कें धंसीं, चालू होते ही चोक हो गईं सीवर लाइनें
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने टेकओवर करने से मना किया

कानपुर। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के नवनिर्मित आवास अभी से टपकने लगे हैं। यही नहीं, किसी के फ्लैट में करंट आ रहा है तो किसी के फ्लैट में पाइप लाइन लीक होने से पानी बह रहा है। सीवर लाइनें भी चोक हो गई हैं। परेशान होकर कई डाक्टरों ने पहली और दूसरी मंजिल के फ्लैट छोड़ दिए हैं तो कई रहने ही नहीं जा रहे हैं। डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से घटिया निर्माण की शिकायत की है। कॉलेज प्रशासन ने भी ऐसी हालत में इन आवासों को टेकओवर करने से मना कर दिया है।
मेेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संक्रामक रोग चिकित्सालय के पीछे डॉक्टरों के 34 आवास, गैराज, सड़कें, रोड लाइट आदि बनवाने के लिए शासन को 2 साल पहले प्रस्ताव भेजा था। शासन ने पिछले साल इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाने के साथ ही जल निगम की निर्माण इकाई सी एंड डीएस को इन कार्यों का जिम्मा सौंपा। सी एंड डीएस ने इसी साल मई में आवासों का निर्माण पूरा कराया। ये आवास डॉक्टरों को एलाट होते ही घटिया निर्माण की पोल खुल गई।
यहां रह रहे डॉ.अशरफ ने बताया कि निर्माण बहुत घटिया है। सीसी रोड कम चौड़ी होने के साथ ही जगह-जगह धंसने गई है। एक ही बारिश में पुताई बदरंग हो गई है। सभी फ्लैट्स में सीलन है। फ्लैट नंबर - 16, 17 समेत कई फ्लैटों में लीकेज हैं। सीवर लाइनें चोक हैं। एक अन्य डॉक्टर विशाल ने बताया कि उन्हें ऊपरी मंजिल का फ्लैट नंबर - 15 एलाट हुआ, पर वहां छत से पानी टपकने से सभी कमरों में सीलन आ गई थी। एक दिन तो वाशरूम में करंट आ गया था। इसी वजह से उन्होंने यह फ्लैट छोड़ दिया और अब ग्राउंड फ्लोर के फ्लैट नंबर-18 में रह रहे हैं। डॉ.अतहत को भी इन्हीं परेशानियों के कारण तीसरी मंजिल का फ्लैट छोड़ना पड़ा।

बोले जिम्मेदार
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‘घटिया निर्माण जैसी कोई बात नहीं है। ट्रक आने से सड़क धंस गई है जबकि सीवर लाइन जहां से जोड़ी गई है, वह पुरानी लाइन चोक होने के कारण गंदा पानी बैकफ्लो हो रहा है। बाउंड्री और इंटरलाकिंग पैसा मिलने पर कराई जाएग्री।
एके पाण्डेय, सहायक अभियंता, सी एंड डीएस

नवनिर्मित आवासों में रहने वाले डॉक्टरों की शिकायत पर मैने वहां निरीक्षण किया। जगह - जगह सड़क टूटी हैं। पीछे की तरफ इंटरलाकिंग नहीं हुई। रोडलाइट भी नहीं है। शासन से घटिया निर्माण की शिकायत की जाएगी। जब तक काम ठीक नहीं होगा, इन्हें टेकओवर नहीं किया जाएगा।
डॉ.नवनीत कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज




दूसरी खबर------------------

फोटो- संजीव


असुरक्षित रेल क्वार्टरों से कर रहे कमाई

कागजों पर खाली इन मकानों में वेंडरों व अपराधियों ने कब्जा जमाया

स्टाफ रिपोर्टर

क ानपुर। रेलवे की नजर में असुरक्षित 35 क्वार्टर भले ही कागजों पर खाली हो गए हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जीआरपी, आरपीएफ और इंजीनियरिंग अमले की मिलीभगत से इन क्वार्टरों में अपराधी और वेंडर पनाह ले रहे हैं। ये लोग बाकायदा हर माह तय राशि जिम्मेदारों को देते हैं। इस वजह से रेल प्रशासन ने असुरक्षित घोषित खाली क्वार्टरों की न तो बिजली सप्लाई बंद की और न ही पानी की। ये क्वार्टर रेलव के कुछ लोगों की आमदनी का जरिया बन गए हैं।
रेलवे ने पिछले साल सिटी साइड कॉलोनी के 35 मकानों को असुरक्षित घोषित कर खाली करा लिया था। करीब 70 साल पुराने ये मकान काफी जर्जर हो गए हैं। लेकिन ये क्वार्टर सिर्फ कागजों पर ही खाली हुए। 12 रेल कर्मियों ने क्वार्टर खाली नहीं किए। लेकिन कागज पर क्वार्टर खाली होने से उनकी पगार से मासिक हाउस रेंट की कटौती भी बंद हो गई। इसके अलावा बाकी क्वार्टरों में अपराधियों और वेंडरों ने कब्जा जमा लिया है। खीरा और पूड़ी बेचने वाले अवैध वेंडर राजू ने बताया कि एक हजार रुपए महीने देकर सारा कारोबार यहीं से करते हैं। बिजली, पानी की सप्लाई सुचारू रूप से है। कहीं बाहर रहे तो इससे अधिक बिजली, पानी का पैसा देना पड़े। आसपास रहने वाले लोगों ने यह भी बताया कि रात के समय यहां अपराधी किस्म के लोग भी सक्रिय हो जाते हैं।

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शहर में रेलवे क्वार्टर
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- जमुनिया बाग कालोनी, जूही खलवा कालोनी, साकेतनगर, निरालानगर रेलवे कालोनी, अनवरगंज रेलवे कालोनी, कैंट साइड रेलवे कालोनी, बाबूपुरवा रेलवे कालोनी।

शहर में कुल कर्मचारी - 13125
कुल क्वार्टर - 8425
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दो टूक
बालकृष्ण, मुख्य सेक्शन इंजीनियर

क्या आपको पता है कि रेलवे के असुरक्षित क्वार्टरों में कब्जे हो गए हैं
हां, कुछ लोग वहां जबरिया रह रहे हैं

इन्हें खाली क्यों नहीं कराते
जल्दी ही तोड़े जाएंगे। यहां नई इमारत बननी है।

कमाई का जरिया होने की वजह से खाली कराने में ढिलाई तो नहीं हो रही।
(कुछ सकुचाते हुए) नहीं ऐसा नहीं है।



रेलवे पत्र दे, 24 घंटे में करा देंगे खाली
रेल संपत्ति पर जबरिया कब्जे करने वालों को हटाने के लिए इंजीनियरिंग अमला पत्र दे तो 24 घंटे के भीतर ये क्वार्टर खाली करा देंगे। ये तो सरासर गलत है। इससे राजस्व को तो क्षति होती ही है और जुड़े लोगों को आमदनी। साथ ही सुरक्षा पर सवालिया निशान हैं।
संजय पांडे
कंपनी कमांडर, आरपीएफ

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