पुस्तक मेले में ‘मैला ढोने’ के खिलाफ उठी आवाज

Kanpur Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
कानपुर। पुस्तक मेले में मैला ढोने वाली महिलाओं का दर्द उठा। पत्रकार भाषा सिंह की किताब अदृश्य भारत पर चर्चा हुई। हैदराबाद से आए समाजसेवी बैजवाड़ा विल्सन ने मैला ढोने वाली महिलाओं के हित में संसद में पेश किए गए बिल की जानकारी दी। साथ ही सरयू नारायण विद्यालय के 125 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
सरयू नारायण इंटर कॉलेज में चल रहे आठवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में सीएसजेएम विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक कुमार ने विद्यालय के सभी 125 शिक्षकों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में शिक्षक मनोज त्रिवेदी, राजेंद्र तिवारी, जगदेव सिंह यादव, राजेश प्रणामी, संजय गुप्ता आदि मौजूद थे। शाम को दूसरे सत्र में सामाजिक बुराई मैला ढोने पर खुली चर्चा हुई। पत्रकार भाषा सिंह की किताब पर चर्चा हुई।
लेखक ने किताब के पीछे अपना उद्देश्य बयां किया। कहा, देश कितना भी आधुनिक क्यूं न हो गया हो लेकिन मैला ढोने जैसी सामाजिक बुराई आज भी बरकरार है। इसके खात्मे के लिए सामाजिक जागरूकता और बदलाव की जरूरत है। हैदराबाद से आए समाजसेवी बैजवाड़ा विल्सन ने मैला ढोने वालों पर अपने शोध और अनुभव साझा किए। बोले, 17 वर्षों से इस कुप्रथा को करीब से देखा है। सामाजिक जागरूकता के साथ ही सरकार के स्तर पर ठोस निर्णय लिए जाने की जरूरत है।
विल्सन ने कहा इस बुराई को फिल्म स्टार आमिर खान ने महत्व दिया। प्रधानमंत्री से भी इस संबंध में मुलाकात हुई। केंद्र सरकार ने पीडि़तों की मदद के लिए 100 करोड़ के पैकेज की घोषणा की थी। अभी तक नहीं मिला। उन्होंने संसद में मैला ढोने की प्रथा के विरुद्ध संसद में सरकार द्वारा बिल पेश करने पर संतोष जताया। आयोजन समिति के अरुण प्रकाश अग्निहोत्री, प्रदीप दीक्षित, अनिल खेतान ने अतिथियों का आभार जताया। पुस्तक प्रेमियों ने पुस्तकों का चयन किया।

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