घर के बाहर अभी भी पहन सकते हैं ‘इंश्योर्ड ज्वैलरी’

Kanpur Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
कानपुर। घर और बाहर ज्वैलरी का इंश्योरेंस कराया जा सकता है। बीमा कंपनियां हाउस होल्डर पैकेज पालिसी के तहत यह सुविधा दे रही हैं, लेकिन सिर्फ ज्वैलरी के इंश्योरेंस की कोई स्कीम नहीं है। हालांकि, बीमा कंपनियों का कहना है कि अगर ज्वैलर्स संगठन की ओर से इस संबंध में कोई प्रस्ताव आता है तो उस पर विचार किया जाएगा।
शहर में चेन स्नेचिंग की बढ़ती घटनाओं से सराफा कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। इससे चिंतित सराफा कारोबारी ग्राहकों को इंश्योयर्ड ज्वैलरी जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। अमर उजाला ने जब इस संबंध में बीमा कंपनियों की राय जानी तो उनकी ओर से भी सकारात्मक प्रक्रिया मिली।
नेशनल इंश्योरेंस के डीजीएम दिलबाग सिंह के अनुसार पब्लिक सेक्टर कंपनियों के लिए ज्वैलरी का इंश्योरेंस कोई नई चीज नहीं है। हाउस होल्डर पैकेज पॉलिसी में पहले से ही ज्वैलरी की इंश्योरेंस का प्रावधान है। घर में इंश्योर होने वाली वस्तुओं के कुल 12 सेक्शन हैं। इनमें एक ज्वैलरी भी है। पालिसी के तहत इंश्योर्ड ज्वैलरी घर से या बाहर पहनने पर अगर चोरी या लूट ली जाती है तो उसका क्लेम संभव है।
जनरल इंश्योरेंस डेवलपमेंट ऑफिसर्स फेडरेशन के महामंत्री मनोज कुमार विश्नोई का भी यही तर्क है। बोले, वैल्यूएबल्स और ज्वैलरी का एक सेक्शन अलग से है। केवल ज्वैलरी के इंश्योरेंस का चलन नहीं है। अगर इस तरह के प्रस्ताव आते हैं तो मुख्यालय से सहमति लेकर इंश्योरेंस संभव है। ज्वैलर्स संगठन सीधे मुख्यालय प्रस्ताव भेज कर सैद्धांतिक रूप से नियम बनाने की बात रख सकते हैं। चेन लूट की बढ़ती घटनाओं के बीच शहर में महिलाओं ने सोने की चेन व अन्य आभूषण पहनना कम कर दिए हैं। इसका असर बिक्री पर भी पड़ा है।

एक लाख की ज्वैलरी पर पर एक हजार रुपये होगा प्रीमियम
अगर हाउस होल्डर पॉलिसी के तहत आप कुल पांच लाख की संपत्ति का इंश्योरेंस कराते हैं। इसमें अगर एक लाख रुपये की ज्वैलरी है तो आपको उसके लिए बतौर प्रीमियम एक हजार रुपये देना होगा। न्यू इंडिया एश्योरेंस प्रति एक हजार रुपये 10 रुपये प्रीमियम वसूलती है। इंश्योरेंस एक वर्ष के लिए सोने या चांदी के निर्धारित औसत मूल्य के आधार पर होता है। हर वर्ष पॉलिसी का नवीनीकरण जरूरी है। इसमें सोने, चांदी के नए रेट पर पॉलिसी होती है। इंश्योर्ड ज्वैलरी के देश के किसी भी कोने में चोरी होने या लूट होने पर क्लेम संभव है। क्लेम के लिए एफआईआर और पुलिस की फाइनल रिपोर्ट (माल और मुजरिम बरामद नहीं हुआ) जरूरी है। इसके बाद ही दावा किया जा सकता है।

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