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मामा से सीखी थी क्राइम की एबीसीडी

Kanpur Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। 10 साल की उम्र से मोनू तिवारी ने अपराध की एबीसीडी अपने परिवार से ही सीखनी शुरू की थी। पिता शिवदत्त तिवारी तो शरीफ इंसान हैं लेकिन घर में रहने वाले उनके साले यानी मोनू के मामा राजू कालिया की दबंगई ने परिवार को बदनाम कर दिया। 1990 में राजू कालिया ने तत्कालीन रतनलाल नगर चौकी इंचार्ज यदुवीर सिंह को नाली में पटक दिया था। इसके बाद से मोनू की मां कृष्णा ने भाई के कारनामों से छाती ठोंकनी शुरू कर दी। यहीं से मोनू और उसके बड़े भाई सोनू के कदम अपराध की दुनिया की ओर बढ़ गए। 2001-2 में राजू कालिया ने दबौली के व्यापारी नेता अशोक कुमार उर्फ बाबा की हत्या कर दी और उसके जेल जाने के बाद सोनू-मोनू उसके नाम से व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गए। सरेआम बाजार में तमंचे लेकर टहलना, जिससे मन चाहा पैसे छीन लेना, दुकानों से सामान उठा लेना रोज का काम हो गया। दुर्गा मंदिर पार्क में दोनों बम बनाकर आवारा जानवरों पर उनकी टेस्टिंग भी करते थे। कोई उनसे बोलने की हिम्मत नहीं करता था। जेल से छूटने के कुछ साल बाद बाद पुलिस ने राजू कालिया का इनकाउंटर किया तो प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि उस वक्त मोनू की मां ने छाती ठोंककर कहा था कि एक शेर मारा है, अभी मेरे दो शेर जिंदा हैं।
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क्रिकेट खेलते वक्त की थी पहली हत्या
दबौली के लोगों ने बताया कि जिस वक्त मोनू 14 और सोनू 16 साल का था। तभी दुर्गा मंदिर पार्क में क्रिकेट खेलते वक्त दोनों भाईयों का लकी नाम के लड़के से झगड़ा हो गया था। सोनू ने लकी को बैट से इतना पीटा था कि अस्पताल में कुछ दिन बाद लकी की मौत हो गई थी। सोनू को उस समय पुलिस ने बच्चा जेल भेजा था। सोनू और मोनू का बढ़ता आतंक देख 2004 में गोविंदनगर पुलिस ने नौरय्याखेड़ा के पास सोनू और उसके साथी लाला को इनकाउंटर में ढेर कर दिया था। इसके बाद भी मोनू के कदम नहीं थमे। मोनू ने मोहल्ले के ही कुछ लड़कों को साथ लेकर अपना गैंग बनाया और व्यापारियों को धमकाकर वसूली शुरू कर दी।


आशिकी में मोल ली थी दुश्मनी
कानपुर। पुलिस सूत्रों की माने तो बर्रा में रहने वाले बाल्मीकि समाज के एक अपराधी की बहन से मोनू का प्रेम संबंध था। दोनों बगैर शादी के एक साथ रहने लगे थे। इस चक्कर में वह अपराधी मोनू का दुश्मन बन गया था और मुखबिरी करने लगा। मोनू के डर के मारे वह खुलकर विरोध नहीं कर पाता था।


उवैश को पकड़ने गए थे, मिल गया मोनू
कुछ दिन पहले जूही डिपो के पास पर्स लूटते वक्त पकड़े गए विशाल ने अपने साथियों के नाम फैजल और उवैश निवासी जाजमऊ बताए थे। फैजल ने कोर्ट में सरेण्डर कर दिया और उवैश की तलाश में रविवार रात बाबूपुरवा एसएसआई वीके मिश्रा चकेरी में दबिश देने के लिए टीम के साथ गए थे। वहीं से लौटते वक्त उन्हें लूट की सूचना मिली और फिर मोनू से मुठभेड़ हो गई।


मोबाइल नहीं सिम रखता था मोनू
पुलिस के मुताबिक मोनू पुलिस से बचने के लिए अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखता था। उसके पास कई सिम जरूर थे। वह हमेशा साथियों के मोबाइल में अपना सिम डालकर बात करता था। इनकाउंटर के बाद पुलिस को मोनू की तलाशी में जय प्रकाश का लूटा गया सामान के अलावा 975 रुपए जेब से मिले। मोनू के पास कोई मोबाइल नहीं मिला।



(इलाके के व्यापारियों से बातचीत)


‘क्या बताएं, मामा कहकर लूट लेता था’

-दबौली, गुजैनी, रतनलालनगर के व्यापारियों ने बताया दर्द
-बहुत से लोग डर के मारे कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए

कानपुर। मोनू के इनकाउंटर पर दबौली, गुजैनी, रतनलालनगर के व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। मोनू के आतंक का पता इसी बात से चल जाता है कि उसकी मौत पर बहुत से लोग कुछ कहने से बचते रहे। दबी जुबान से कुछ व्यापारियों ने कहा कि ‘क्या बताएं, भाई अपने साथियों के साथ आता था और मामा कहकर कभी गोलक में तो कभी जेब में हाथ डालकर रुपए निकाल लेता था। कुछ कहो तो तमंचा निकाल लेता था। कई बार दुकानों से सामान भी उठा ले जाता था। जब मन चाहा, पर्ची भेजकर पैसे मंगा लेता था’।


बाजार में शायद ही ऐसा कोई व्यापारी हो, जिसे मोनू ने अपना शिकार न बनाया हो। सभी के पास उसकी वसूली की पर्ची आती थी।
रोहित


पुलिस ने जो किया ठीक ही किया। व्यापारी मोनू से काफी परेशान हो चुके थे। पैसा लेने के बाद भी धमकी देता था।
जीतू मोरवानी

मोनू का क्षेत्र में इस कदर दबदबा था कि किसी की हिम्मत नही होती थी उसका विरोध करने की। कुछ बोलो तो तमंचा तान देता था।
हरीश

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