मालिकाना हक चाहिए, कालोनी चकाचक चाहिए

Kanpur Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
कानपुर। आजादी के 65 साल बाद भी गोविंद नगर रिफ्यूजी कालोनी के मालिकाना हक का मामला अटका है। यह हक न मिलने से करीब एक हजार परिवार न तो अपनी सुविधा के अनुसार सपनों का आशियाना बनवा पा रहे हैं और न ही सुकून से रह पा रहे हैं। लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सिंधी काउंसिल आफ इंडिया और समाजवादी सिंधी सभा ने सिंधी, पंजाबी परिवारों को मालिकाना हक दिलाने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू किए हैं।
देश की आजादी के दौरान पाकिस्तान से आए सिंधी और पंजाबी समाज के लोगों को गोविंद नगर स्थित रिफ्यूजी कालोनी में बसाया गया था। ब्लाक नंबर-1 से ब्लाक नंबर-10 तक बसी इस कालोनी में करीब 3000 क्वार्टर हैं। नटराज के पास डब्लूएस कालोनी में भी 850 क्वार्टर हैं। हर ब्लाक में सामुदायिक शौचालय थे। पानी के लिए कुएं थे। यहां रहते हुए लोगों ने शुरूआत में पापड़, दाल की बड़ी का काम शुरू किया। कुछ लोगों ने दुकानें खोल लीं। धीरे-धीरे नटराज चौराहे से लेकर चावला मार्केट होते हुए सी-ब्लाक के पास तक ब्लाक नंबर -10 तक मार्केट बन गई। उस समय गोविंदपुरी पुल नहीं था। लोग रेलवे ट्रैक पार कर शहर जाते-आते थे। लोगों ने कालोनी में कमरे, बरामदे आदि और बना लिए। फिर अतिक्रमण की समस्या बढ़ती गई। पार्क भी इससे नहीं बचे। बाद में बहुत से लोग औने-पौने में क्वार्टर बेचकर दूसरे मोहल्लों में चले गए। केडीए और नगर निगम इन अवैध कब्जों को ध्वस्त कर पा रहा है और न ही कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाया।


सीवर लाइनें जाम होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। कई बार शिकायत की, लेकिन हालत बद से बदतर होती जा रही है।
सुखदेव राज भगत, निवासी सात - ब्लाक

ए2जेड वाले हर महीने पैसे ले जाते हैं। पर गंदगी से छुटकारा नहीं मिलता। सफाई कर्मियों को अलग से पैसे दो तो ठीक से सफाई होती है। पैसे न देने पर वे सीवर लाइन में बोरे ठूंस देते हैं।
गुरुचरन सिंह, चार - ब्लाक

जगह-जगह अवैध कब्जे और गंदगी है। नालियों की सफाई ठीक से नहीं होती। हर दूसरे पार्क में चट्टे की वजह से सीवर लाइनें जाम रहती हैं। नगर निगम के अफसर कमाई के चक्कर में इन्हें नहीं हटवाते। अजीत, सात - ब्लाक

डेढ़ साल पहले केडीए ने क्वार्टरों का किराया अनाप-शनाप बढ़ा दिया। कुछ क्वार्टरों का किराया 375 रुपए तो कुछ का 400 रुपए प्रति माह। केडीए ने कालोनी नगर निगम को हैंडओवर कर दी, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ीं।
अश्वनी चड्ढा, पूर्व पार्षद, गोविंद नगर

2004 में मुलायम सिंह यादव से कह कर रिफ्यूजी कालोनी के करीब 2000 लोगों को मालिकाना हक दिलाया था। कई परिवार बाकी रह गए हैं। उन्हें मालिकाना हक दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
अशोक अंशवानी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी सिंधी सभा


कालोनी की दिक्कतें
- सीवर लाइनें चोक, कई ब्लाकों में सड़कों पर बह रहा है गंदा पानी।
- नालियां चोक, जगह-जगह कूड़े के ढेर।
- ब्लाक नंबर - 2, 8, 9 और 10 की हालत ज्यादा खराब।
- ब्लाक नंबर 1 में विपिन पाटनी के मकान का छज्जा गिरा, अन्य सैकड़ों क्वार्टर जर्जर।
- पानी की किल्लत, कभी-कभी गंदा पानी आता है
- अवैध कब्जे, पार्कों में कब्जों से बच्चों के लिए प्ले ग्राउंड का अभाव।


पहले हैलट नगर था गोविंद नगर का नाम
1945 में गोविंद नगर में फौज के लिए एक-एक कमरे के क्वार्टर बनवाए गए थे। दो साल तक वहां फिरंगियों की फौज रुकती रही। उस समय इस मोहल्ले का नाम एक अंग्रेज अफसर के नाम पर ‘हैलट नगर’ था। आजादी के बाद फौज हटाकर रिफ्यूजियों को बसा दिया गया और नाम बदलकर गोविंद नगर कर दिया गया।


शहर में रिफ्यूजी कालोनियां - 3 गोविंद नगर, कौशलपुरी, दर्शनपुरवा

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