विज्ञापन

जेल में चरस बिक्री, बंदी गुट भिड़े

Kanpur Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
ख़बर सुनें
कानपुर। जिला जेल प्रशासन भले ‘रामराज’के दावे कर रहा हो लेकिन जेल में चरस का काला कारोबार खुलेआम चल रहा है। सोमवार और मंगलवार को जेल में चरस बिक्री को लेकर बंदियों के 2 गुट आपस में भिड़ गए। बाद में वहां पहुंचे जेल अधिकारियों ने बंदियों के डपटकर मामला शांत कराया। मौके से चरस भी बरामद हुई है लेकिन जेल प्रशासन इसे मामूली झगड़ा बताकर पल्ला झाड़ रहा है। खास बात यह है कि जेलर एके सिंह तो चरस बरामदगी की बात स्वीकार रहे हैं लेकिन जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया इससे इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जेल में सब कुछ सही है। उधर, घटना के बाद बंदियों के बीच तनाव बना हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला जेल में सोमवार को चरस बिक्री को लेकर बंदी गुटों में शुरू हुई तकरार मंगलवार को बवाल में बदल गई। सोमवार को नमाज के बाद बैरक नंबर 11, 13 और 14 में चरस बिक्री को लेकर पहले तो कैदियों में कहासुनी हुई। बाद में शाम करीब 7 बजे बैरक बंद होते ही कैदियों में इसी बात पर हाथापाई हो गई। हालांकि, बैरक बंद होने के बाद मामला शांत हो गया लेकिन मंगलवार सुबह जैसे ही बैरक खुली तो बंदी फिर भिड़ गए। उनके बीच थालियां और लोटे चलने लगे। बवाल की सूचना पर जेल अधिकारी मौके पर पहुंचे और बंदियों को शांत कराया। बाद में बैरक की तलाशी हुई, जिसमें करीब 250 ग्राम चरस मिलने की बात कही जा रही है। मारपीट और चरस बरामदगी के संबंध में जेलर एके सिंह से पूछने पर उन्होंने बताया कि रूटीन चेकिंग में 10-20 ग्राम चरस मिली है। वहीं, जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया ने तो सिरे से ही घटना और चरस बरामदगी को खारिज कर दिया। उधर, एलआईयू ने भी जेल के बाहर बवाल की टोह ली।

अमर उजाला लाइव
मिलाई में पग-पग पर उगाही
जेल में हर काम के रेट तय
राम महेश मिश्र
कानपुर। जिला जेल में सिर्फ चरस ही नहीं बल्कि हर सामान आसानी से पहुंचाया जा सकता है और इसके लिए ‘रेट’ भी तय है। ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की तो वहां पर मिलाई से लेकर घर बैठे नंबर लगाने और फोन पर जेल के भीतर परिजन से बात कराने के रेट पता चले। जेल में कुछ बंदियों से मिलने आए उनके परिजनों ने बताया कि जेल के अंदर सुरक्षित सामान पहुंचाने के लिए 270 रुपये देने पड़ते हैं। इतने रुपये न देने पर गेट पर सामान भी छिन जाता है और बंदी की पिटाई भी होती है। ये रुपये अलग-अलग गेटों के अलावा मुख्य द्वार पर भी चेकिंग के नाम पर देने होते हैं।

सीन-1 : समय : 11.40
जेल के मेन गेट पर दो ठेलियां लगी थीं। जिन लोगों का नंबर नहीं लगा था वे ठेलियावाले से मिलाई की तरकीब पूछ रहे थे। ठेलियावाला भी मौका देखकर अंदर सिपाही के पास भेज देता था। ठेलिया के पास 3 घंटे से अपने बेटे के दोस्त से मिलाई को खड़ीं गुजैनी निवासी सावित्री ने बताया कि उन्होंने एक युवक को फोन करके अपना नंबर लगाया था। यहां आने पर उसे 10 रुपये देने पड़े। अंदर कितने रुपये देने होंगे पूछने पर वह बोलीं कि 250 से 300 रुपये तो देने ही पड़ेंगे।

सीन-2 : समय : 11.50
जेल गेट में घुसने के बाद बायीं ओर चौकी बनी थी। चौकी का दरवाजा खुला था और सिपाही जमीन पर चादर बिछाकर लेटा था। कई फरियादी नंबर के बारे में पूछ रहे थे। जवाब मिला कि समय खत्म हो गया है। कुछ लोग गिड़गिड़ाए तो सिपाही ने कहा कि बाहर देखो नीली शर्ट पहने लड़का घूम रहा होगा। बाहर बाइक पर नीली शर्ट पहने युवक के पास लोग पहुंचे तो उसने कहा कि प्रार्थनापत्र लिखकर लाओ। 100 का नोट साथ में देना, स्पेशल मिलाई हो जाएगी। संवाददाता ने फोन करके मिलाई का नंबर लगवाने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि इसके लिए 10 रुपये देने होंगे। जेल के अंदर रिश्तेदार से बात कराने के बारे में पूछने पर बताया कि सुबह 7 बजे और दिन में 3 से 5 बजे के बीच बात हो जाएगी। 5 मिनट बात कराने के 60 रुपये और फिर हर मिनट के 5 रुपयेे देने होंगे।

सीन-3 : समय : 12.00
जेल गेट पर मिलाई करने वालों की लाइन लगी थी। हर एक के हाथ में झोला था। गेट पर खड़ा सिपाही झोला देखते ही अंदर जाने को कह देता और 50 रुपये ले लेता। कैमरामैन को देख सिपाहियों के इशारे पर दरवाजा तुरंत बंद करा दिया गया।


परिजन बोले
‘पैसा हो तो घर जैसी सुविधा’
मिलाई को आईं रतनपुर कालोनी निवासी बबिता ने बताया कि अगर पैसा हो तो बंदी को दिक्कत तो दूर घर जैसी सुविधा मिलेगी। इससे भी अधिक आराम करवाना है तो 3 हजार रुपये महीने में अस्पताल पहुंचाकर नाश्ते में अंडा और दूध भी दिया जाता है।

‘फुटकर कराके लाना पड़ा’
अपने भाई आशू त्रिपाठी से मिलाई को आए हरिओम त्रिपाठी ने बताया कि बंदी से हर गेट पर पैसे लिए जाते हैं। गेट से घुसते ही 50 रुपये हमको देने पड़ेंगे। इस कारण पहले से ही फुटकर कराके लाया हूं। जेल गेटों पर भाई पैसा नहीं देगा तो पीटा जाएगा।

ये रहा रेट
फोन पर नंबर लगाने के 10 रुपये जबकि रेट 2 रुपये है
जेल में घुसते ही हाल में 50 रुपये (सामान ले जाने का)
बंदी को 3 गेटों पर देने पड़ते हैं 50, 40 और 30 रुपये
मिलाई को लाने वाले नंबरदार को 30 रुपये
बैरक पहुंचने पर 4 लोगों को 20, 20, 10 और 10 रुपये
नोट - जैसा कि मिलाई को आए परिजनों ने बताया
रोजाना औसतन 150 बंदियों से मुलाकात होती है। लगभग 500 परिजन मिलते हैं।

टो टूक : आरपी सिंह, आईजी जेल
- जेल में पैसा देकर चरस और स्मैक पहुंचायी जाती है, आपको खबर है?
ऐसी जानकारी तो नहीं है। बताते हैं तो सच होगा, जांच कराएंगे।
- मोबाइल पर नंबर लगाने की सुविधा पर वसूली होती है?
ऐसा हो रहा है कानपुर जेल में। गंभीर बात है। दिखवाएंगे।
- जेल में बवाल हुआ और चरस मिली। जेलर ने माना लेकिन अधीक्षक ने नकारा दिया?
थोड़ी देर सोचकर कहा जांच कराएंगे। गोरखधंधे का तो पता नहीं लेकिन 4 दिन के भीतर व्यवस्था में सुधार दिखेगा।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Kanpur

यूपी-100 के 2 सिपाही होटल में लड्डू खाने से बेहोश, मालिक को हिरासत में लेकर हो रही पूछताछ

यूपी के हमीरपुर में हाईवे पर एक होटल में लड्डू खाने व चाय पीने के बाद यूपी-100 पुलिस के दो सिपाही बेहोश हो गए। एक सिपाही को अभी तक होश नहीं आया है। 

19 दिसंबर 2018

विज्ञापन

आगरा के भव्य राधास्वामी मंदिर की इन विशेष बातों को नहीं जानते होंगे आप

आगरा यूं तो ताजमहल के लिए विश्व प्रसिद्ध है पर अब इसकी एक और पहचान विश्व पटल पर उभर रही है और वो है राधास्वामी मंदिर। दयालबाग में बने इस भव्य राधास्वामी मंदिर के इतिहास और विशेषताओं के बारे में आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं।

19 दिसंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree