विज्ञापन

लेदर इंडस्ट्री में होंगे नंबर वन

Kanpur Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
ख़बर सुनें
कानपुर।यूरोप में ऊंची लेबर कॉस्ट के चलते चर्म उत्पादन से जुड़े कारखाने बंद हो रहे हैं, इससे वे चर्म उत्पादों के लिए भारत सरीखे देशों पर आश्रित होते जा रहे हैं। यह न केवल चर्म उत्पादकों बल्कि देश की तरक्की के लिए भी अच्छे संकेत हैं। जरूरत है कि सरकार चर्म उद्यमियों के लिए सुविधाजनक माहौल बनाए और उद्यमी अपने प्रतिस्पर्धियों को कम आंकने की बजाए उनसे बहुत कुछ सीखें।
विज्ञापन
विज्ञापन
देश का चर्म उद्योग लगातार बढ़ता जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह इस ट्रेड में मौजूद असीमित संभावनाएं हैं। यदि कानपुर की ही बात कर ली जाए तो वर्ष 2010-11 के 3500 करोड़ के मुकाबले वर्ष 2011-12 में 4200 करोड़ रुपए से ज्यादा का माल निर्यात हुआ। इसमें घरेलू बिक्री के आंकड़ों को भी शामिल कर लिया जाए तो कुल कारोबार 6000 करोड़ रुपये के आसपास का हुआ। यहां के चर्म उत्पाद यूरोपियन देशों में लगातार धाक जमाते जा रहे हैं। इस वक्त विश्व में यूरोप चर्म उत्पादों की सबसे बड़ी मंडी है।
निर्यात से विदेशी मुद्रा का संग्रह बढ़ता है और देशी ब्रांड की पहचान विश्व स्तर पर होती है। चर्म निर्यात में भारत भले ही हर साल नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा हो, मगर इस मामले मे प्रतिस्पर्धी देशों से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। वे हमसे कहीं तेज ग्रोथ कर रहे हैं। चीन के बाद वियतनाम, कंबोडिया और यहां तक कि बांग्लादेश जैसे देशों की सरकारें चर्म उद्योग की महत्ता और इसके फायदों को देखते हुए इस सेक्टर को आगे बढ़ाने में भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा रुचि दिखा रही हैं। वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधाएं तो हैं ही, इस ट्रेड में कारोबार करने वालों को भी विशेष रियायतें मुहैया कराई जाती हैं। उद्योग लगाने के लिए सबसे पहली जरूरत है पैसा। उसके लिए ऋण की दरकार होती है। भारत में ऋण की ब्याज दरें इन देशों की तुलना में काफी अधिक हैं। इससे उत्पादन इकाई के लिए आवश्यक भूमि, मशीनरी, बिल्डिंग आदि महंगे हो जाते हैं। इसके अलावा ट्रांजेक्शन कॉस्ट बहुत ज्यादा है। उदाहरण के तौर पर कानपुर से यदि कोई माल निर्यात किया जाता है तो देश में गिनती के बंदरगाह है, जहां से दूसरे देशों में माल भेजने की सुविधा है। इससे न केवल ट्रांजेक्शन कॉस्ट बढ़ती है बल्कि समय भी ज्यादा लगता है। इन सभी का सीधा असर उत्पाद के मूल्य, निर्यातक के मुनाफे और क्वालिटी ऑफ सर्विस पर पड़ता है, जिसकी वजह से प्रतिस्पर्धा में खड़े होने का संकट बना रहता है। यह समस्याएं चीन-वियतनाम जैसे देशों के साथ नहीं है। नौबत यह आ गई है कि भारत में बड़े पैमाने पर चर्म उत्पादों का निर्माण होने के बावजूद चीन से चप्पलें, सैंडल, जूते आदि उत्पादों का भरपूर आयात हो रहा है। सस्ते मूल्य में उत्पादों की उपलब्धता चीन का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। इन वजहों के अलावा चर्म निर्यात में डिजाइनिंग फैक्टर भी प्रमुख है। वो वक्त गया जब लोग पैरों में जूते इसलिए पहनते थे कि गर्मी-सर्दी से बचें, आज पर्सनालिटी को और इंप्रूव करने के लिए जूता पहना जाता है। इसमें सबसे बड़ा रोल निभाती है डिजाइन। देश में चर्म उत्पादों के डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट्स का अकाल है। इस ओर सरकार के प्रयासों की आवश्यकता है। उधर टेनरियों के साथ भी बहुत समस्याएं हैं। हर जगह टेनरी की स्थापना हो नहीं सकती, जहां हैं भी वो विभिन्न कारणों से बंद होती जा रही हैं। सरकार को टेनरी को पनपाने के लिए छोटे-छोटे क्लस्टर्स बनाने चाहिए। एक बात अच्छी है कि भारत में लेबर कॉस्ट काफी कम है और कच्चे माल की उपलब्धता पर्याप्त है। इस दिशा में यदि प्रबल इच्छाशक्ति दर्शाई जाए तो इस ट्रेड में भारत शिखर पर पहुंच सकता है।

लेखक प्रमुख चर्म उत्पाद कंपनी सुपर हाउस लिमिटेड के निदेशक और फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (भारत सरकार) के चेयरमैन हैं

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Kanpur

गंगा का हाल देखने कानपुर पहुंची केंद्रीय कमेटी

‘इंप्रूविंग सालिड वेस्ट मैनेजमेंट फॉर क्लीन गंगा’ के तहत अाज दिल्ली से केंद्रीय टीम कानपुर में गंगा की स्थिति देखने और सीसामऊ नाले का जायजा लेने पहुंची।

10 दिसंबर 2018

विज्ञापन

VIDEO: रुला देगी इन बहनों की हालत, भीख मांगकर खाने को हैं मजबूर

कहते हैं वक्त की गुलाम हर शै होती है, कब राजा को रंक बना दे कुछ नही कहा जा सकता। ऐसा ही एक परिवार रहता है यूपी की राजधानी लखनऊ के सबसे पॉश इलाकों में से एक गोमतीनगर में।

10 दिसंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election