ताली बजाओ, मच्छर मारो

Kanpur Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
रजा शास्त्री
कानपुर। पूरा शहर मच्छरों की गिरफ्त में है और अरबन मलेरिया विभाग के पास दवाएं खत्म हो गई हैं। विभाग के पास न तो छिड़कने वाली दवा है और न फॉगिंग का कोई इंतजाम। हालांकि दवाएं उसके पास थीं कब, ये शायद ही किसी शहरी को पता हो क्योंकि नालियों में छिड़काव होते तो कभी दिखा नहीं। ऐसे में सोमवार को विश्व मच्छर दिवस है। मच्छरों के हमले के आगे विभाग निहत्था खड़ा हुआ है। शहरी बेचारे क्या करें, ताली बजाओ मच्छर मारो। वेक्टर बोर्न अभियान प्रभारी और अरबन मलेरिया अधिकारी डॉ एसी पाठक कहते हैं कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के लिए तीन फर्मों का होना जरूरी है। शहर की दो ही फर्मों के पास लाइसेंस है, ऐसे में प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। अब लखनऊ की फर्मों को टेंडर के लिए दावत देंगे।
शहर की पैथोलोजियों में प्रतिदिन औसत सामान्य मलेरिया के 10 और फेल्सीपेरम मलेरिया के 2-3 मरीज पॉजीटिव आ रहे हैं। कानपुर रिसेस्टेंट मलेरिया का भी गढ़ है। ऐसी स्थिति में बिना दवाओं के सारा काम रुका हुआ है। इस मौसम में शहर में एक चौथाई मरीज मच्छर जनित इंफेक्शन से ग्रसित होते हैं। डेंगू, चिकुनगुनिया, डेंगू हेमरेजिक फीवर, फेल्सीपेरम, वायरल फीवर, डेंगू लाइक फीवर, फाइलेरिया, वायरल इंसेफलाइटिस आदि रोग मच्छर फैलाते हैं। इन मच्छरों की भरमार है। शहर के मच्छरों पर कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने सर्वेक्षण किया था। इसमें विभिन्न प्रकार की प्रजातियां पाई गईं। वेक्टर बोर्न अभियान के पूर्व स्टेट कोआर्डिनेटर प्रोफेसर सुरेशचंद्रा ने शासन को पत्र भी लिखे थे। इसके साथ ही अरबन मलेरिया विभाग ने मच्छरों के सैंपल लिए थे। डॉ पाठक कहते हैं कि मच्छरों को मारने के लिए नगर निगम का सहयोग चाहिए। इस संबंध में दो पत्र मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से नगर निगम को भेजे जा चुके हैं।

विश्व मलेरिया दिवस की बुनियाद 110 साल पहले पड़ी थी। ब्रिटिश डोनाल्ड रॉस ने 1902 में खोज की थी कि मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर फैलाती है। इस पर डॉ रॉस को नोबल प्राइज मिला था। तभी से ब्रिटेन में मलेरिया दिवस मनाया जाने लगा।
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शहर के मच्छरों के घराने
.एडीज प्रजाति- फ्लू बिलेटिन, सुंडेकस, लीको स्पायरस
-रोग: यलो फीवर, डेंगू फीवर, डेंगू हेमरेजिक फीवर, चिकुनगुनिया
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.क्यूलैक्स प्रजाति-फेटीगंस, विस्नोई
-रोग: फाइलेरिया, जापानी इंसेफलाइटिस, वायरल गठिया
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एनाफिलीज प्रजाति-एगेप्टी, बिटेट्स, एल्बो पिक्टस
-रोग: मलेरिया, फाइलेरिया
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इन देशों के मच्छर शहर में
.फिलीपींस-एनाफिलीज फ्लीपेमिमिर
.दक्षिण अफ्रीका-सेंड्राइकस
.इजिप्ट-एडीज एजिप्टाई
.इंडोनेशिया-क्यूलैक्स
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-इन मच्छरों की 20 उप प्रजातियां भी मौजूद हैं
-सारी प्रजातियां शहर में बिखरी हुई हैं
-दुनिया में मच्छरों की तीन सौ प्रजातियां हैं
-मच्छरों की एनाफिलीज, एडीज, क्यूलैक्स और मेनसोनिया ही मुख्य है
-सिर्फ 11 तरह के मच्छर ही मांसाहारी हैं
-सिर्फ मादा मच्छर ही मांसाहारी होती हैं नर मच्छर फूलों, फलों का जूस पीते हैं

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