गंगा स्नान कर दिया दान

Kanpur Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। भाद्रपद अमावस्या पर शुक्रवार को हजारों भक्तों ने गंगा में स्नान कर जप और दान किया। भोर से ही सरसैया घाट, गोला घाट, मैस्कर घाट, बिठूर, गंगा बैराज आदि प्रमुख घाटों में महोबा, हमीरपुर, कानपुर देहात, जालौन समेत आसपास के जिलों से भक्त पहुंचना शुरू हो गए। उधर, वर्ष भर की पूजा-पाठ के लिए आचार्यों ने कुश उखाड़कर भी रखे। विद्वानों के मुताबिक भदही अमावस से ही मलमास का माह भी शुरू हो गया है।
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विद्वानों की माने तो इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद पूजा पाठ, जप-तप, यज्ञ-हवन आदि शुभ कर्म करने का विशेष महत्व है। इस दिन किये गए हर शुभ कार्य का मनुष्य को अक्षुण्य फल मिलता है। भदही अमावस्या को कुशोत्पत्ति अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन खेतों में लगे कुश को तोड़ा जाता है। हिंदू धर्म में कुश को पवित्र माना जाता है। ज्योतिषाचार्य डा.आदित्य पांडेय ने बताया कि मलमास का बड़ा ही महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि एक बार सभी ने मलमास माह की अवेलहना कर दी। तब मलमास माह भगवान श्रीकृष्ण के पाये और अपनी व्यथा बताई। तब भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा कि जो भक्त मलमास में धार्मिक अनुष्ठान, उपासना करेगा वह सब मुझे प्राप्त होगा। इसके अलावा इसी माह में पुआ बनाकर कांस्य पात्र में दान करने से भूमि यज्ञ का फल उस भक्त को प्राप्त होगा।
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